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आचार्य प्रमोद बोले- मनुस्मृति में कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था का जिक्र, जाति राजनीति की देन; लोग ने घेरा

एमके स्टालिन ने यह भी कहा कि तमिल को मद्रास हाईकोर्ट की भाषा बनाया जाना चाहिए।

आचार्य प्रमोद बोले- मनुस्मृति में कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था का जिक्र, जाति राजनीति की देन; लोग ने घेरा
कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम (फोटो क्रेडिट : द इंडियन एक्सप्रेस)

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा है कि जजों की नियुक्ति में सभी वर्गों के लोगों की नियुक्ति होना चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने चेन्नै में सुप्रीम कोर्ट की बेंच की भी मांग की। स्टालिन ने कहा कि तमिल को मद्रास हाईकोर्ट की भाषा बनाया जाना चाहिए। इस पर जवाब देते हुए कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद एक यूजर से भिड़ गए। 

क्या बोले आचार्य प्रमोद?

स्टालिन की मांग पर ट्वीट कर आचार्य प्रमोद ने लिखा कि पढ़े लिखे होना कोई जरूरी नहीं? इस पर संदीप सिंह नाम के यूजर ने लिखा कि मनुस्मृति के पथ पर चलने की ठान ली है क्या बाबा जी? दिमाग में जाति व्यवस्था का कीचड़ लिए घूमते हो, घटिया सोच। इस पर आचार्य प्रमोद ने भी पलटवार किया है।

ऐसे हुआ वार-पलटवार

आचार्य प्रमोद ने संदीप सिंह को जवाब देते हुए लिखा कि मनु स्मृति में तो कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था का उल्लेख है। जन्म के आधार पर जातियों का भेदभाव तो विकृत मानसिकता और सत्ता लोलुप राजनीति की देन है। आचार्य प्रमोद के इस ट्वीट पर लोग भी अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

लोगों की प्रतिक्रियाएं

आचार्य प्रमोद के ट्वीट पर जवाब देते हुए @abhaya0930 यूजर आईडी से लिखा गया कि काश ये ज्ञान उनको दिया होता जिन्होंने धर्म के आधार पर देश का विभाजन करवाया, हमें दुःख है कि आप इस धरती पर देर से प्रकट हुए। @Soo7nn यूजर आईडी से लिखा गया कि कांग्रेस को डुबाने में आपका योगदान कांग्रेस को बदनाम करने वालों से ज्यादा है।

संदीप सिंह के ट्वीट पर जवाब देते हुए @Dharma_CSA यूजर आईडी से लिखा कि बाबा जी ने जाति व्यवस्था की बात ही कहां की? उन्होंने तो सही प्रश्न पूछा कि पढ़ा-लिखा जरूरी नहीं? @GSGauttam यूजर आईडी से लिखा गया कि देखो, जाति-व्यवस्था की बात भी कौन कर रहा जिसकी दुकान ही इसी से चलती हैं। हकीकत में पाखंडी तो आप लोग हो।

बता दें कि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक स्टालिन ने कहा है कि दक्षिण भारत के लोगों के लिए चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच बनाई जानी चाहिए। यह बहुत जरूरी है, क्योंकि तमिलनाडु के लोगों को दिल्ली आने-जाने में परेशानी होती है। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि जजों की नियुक्ति में सभी वर्गों के लोगों की नियुक्ति होना चाहिए।

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First published on: 06-09-2022 at 05:40:59 pm
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