कभी सोचा था मायावती पीछे बैठेंगी और आप चलाएंगे साइकिल? इस सवाल पर अखिलेश यादव ने दिया था कुछ ऐसा जवाब

विचारों का मेल इसलिए है क्योंकि आप नरेंद्र मोदी से डरते हैं? इसके जवाब में अखिलेश यादव ने डॉ राम मनोहर लोहिया और भीम राव अम्बेडर कर जिक्र करते हुए जवाब दिया था।

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कभी सोचा था मायावती पीछे बैठेंगी और आप चलाएंगे साइकिल? इस सवाल पर अखिलेश यादव ने दिया था कुछ ऐसा जवाब (फोटो सोर्स – पीटीआई)

राजनीतिक पार्टियां सत्ता पर काबिज होने के लिए कभी-कभी ऐसी पार्टियों के साथ गठबंधन करती हैं जिनके बीच सबसे ज्यादा तू – तू मैं – मैं हुई होती है। एक ऐसा ही गठबंधन 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का हुआ था। इस गठबंधन को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव से सवाल पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि डॉ राम मनोहर लोहिया और भीमराव अंबेडकर भी एक साथ मिलकर समाज के लिए काम करना चाहते थे।

‘आज तक’ न्यूज़ चैनल के एक कार्यक्रम में पहुंचे अखिलेश यादव से पूछा गया था कि कभी सोचा था कि एक ऐसा दिन आएगा, जब आप साइकिल चलाएंगे और मायावती उस पर बैठेंगी? इस पर अखिलेश ने कहा था, “आपके द्वारा स्क्रीन पर दिखाए जा रही तस्वीर पर मजा नहीं आया। इस पर हाथी साइकिल चला रहा होता और साइकिल अपने आप चल रही होती तो और ज्यादा अच्छा लगता।”

इस पर पूछा गया कि साइकिल चला कौन रहा है? इसके जवाब में अखिलेश ने कहा था कि मायावती और हम मिलकर साइकिल चला रहे हैं। एक जमाना यह भी था जब एक पहिए की साइकिल चलाई जाती थी लेकिन अब उस जमाने को वापस नहीं लाया जा सकता है। अब तो दो पहियों की साइकिल है। एंकर राजदीप सरदेसाई ने उनसे पूछा था कि क्या आप दोनों के पार्टी के कार्यकर्ता भी इस गठबंधन को स्वीकार करेंगे? क्या मजबूरी का गठबंधन है?

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अखिलेश ने जवाब दिया था कि यह सिर्फ संविधान बचाने की लड़ाई है। ये विचारों का संगम है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ का जिक्र करते कहा था कि इस प्रदेश के मुख्यमंत्री की सीट पर हारने वाले प्रत्याशी को किसने हराया था.. प्रदेश के डिप्टी सीएम को किसने हराया था? जहां से बीजेपी ने सांप्रदायिकता की आग लगाकर लड़ाई करवाई थी उस कैराना में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने सांप्रदायिकता की लड़ाई को खत्म किया।

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विचारों का मेल इसलिए है क्योंकि आप नरेंद्र मोदी से डरते हैं? इसके जवाब में अखिलेश यादव ने कहा था कि जितने भी पॉलीटिकल हिस्ट्री में घटनाएं हुई होंगी उनको आपने जरूर पढ़ा होगा। क्या राम मनोहर लोहिया और भीमराव अंबेडकर मिलकर काम नहीं करना चाहते थे? गौरतलब है कि 2019 लोकसभा चुनाव में हुई हार के बाद सपा और बसपा का गठबंधन टूट गया था।

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