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नूपुर शर्मा विवादित बयान न देती तो इस तरह की घटना ना होती? इस सवाल पर जानिए क्या बोले आरिफ मोहम्मद खान

उदयपुर की घटना के विषय पर चर्चा कर रहे केरल के गवर्नर ने मदरसों को लेकर भी कई तरह के सवाल उठाए।

Arif Mohammad Khan, Modi Government
आरिफ मोहम्मद खान(फोटो सोर्स: PTI)।

पैगंबर मोहम्मद पर विवादित बयान देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार करने के साथ ही देश की मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदार भी ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के विषय पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने टीवी चैनल से बातचीत की। जिसमें उन्होंने मदर के को लेकर भी कई तरह के सवाल उठाए।

दरअसल, आरिफ मोहम्मद खान ‘आज तक न्यूज़ चैनल’ से बातचीत कर रहे थे। जहां उन्होंने मदरसों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमारे कानून में बच्चों को 14 साल तक बेसिक शिक्षा देने का अधिकार है। मदरसे को लेकर विपक्षी दलों द्वारा की जा रही आलोचना पर उन्होंने कहा कि हम आलोचना से डर कर अपने रास्ते से भटक नहीं सकते हैं। एंकर ने उनसे पूछा कि विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी और संघ हिंदुत्व को बढ़ाने के लिए मुसलमानों के खिलाफ एजेंडा चला रही है?

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि इस देश में सभी योजनाएं सभी धर्मों के लिए दी गई हैं। क्या गैस का सिलेंडर किसी एक धर्म के अनुयाई को दिया गया है? क्या शौचालय किसी एक समुदाय के लिए बनाया गया? उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि दिल्ली और मुंबई में बैठकर बिना चुनाव जीते सत्ता का सुख भोगने वाले लोग आज परेशान हैं।

इस दौरान एंकर अंजना ओम कश्यप ने आरिफ मोहम्मद खान से पूछा, ‘क्या नूपुर शर्मा विवादित बयान ना देती तो उदयपुर जैसी घटना ना होती?’ केरल के राज्यपाल ने कहा कि भारत का मतलब नूपुर, आप और हम नहीं हैं। भारत का संस्कृति का इतिहास 5000 साल पुराना है। उन्होंने संस्कृत के कई इस लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में विभिन्न प्रकार के लोग होने के बावजूद भी सभी लोग एक हैं।

लोगों के रिएक्शन : एक सोशल मीडिया यूजर्स ने इस वीडियो पर कमेंट किया कि मुसलमानों से नफरत नहीं होनी चाहिए, नफरत तो गलत इंसान से होनी चाहिए जो किसी भी धर्म का हो। अखिलेश कुमार सिंह नाम के एक टि्वटर हैंडल से लिखा गया – अगर बयानों से समाज का खून खोलता है तो हिंदुओं के खिलाफ की गई बयानबाजी के बाद हंगामा क्यों नहीं होता?

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