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बेटी बचाओं के इस पोस्टर पर बढ़ गया है विवाद, लोग बोल रहे- अबकी बार रोटी अचार

लोग मोदी सरकार के स्लोगन 'अबकी बार मोदी सरकार' का भी मजाक बनाने लगे। एक यूजर ने इस स्लोगन और पोस्टर को मिलाकर बीजेपी सरकार पर तंज कसते हुए कहा, 'अबकी बार रोटी अचार।' वहीं हसीबा बी आमीन ने ट्वीट कर कहा, '...तो बेटी को केवल इसलिए पैदा करो कि वह तुम्हारे लिए खाना बना सके और घर का बाकी सारा काम कर सके। सरकार ने अच्छा काम किया। बस एक साल और है।'

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है यह पोस्टर। (फोटो सोर्स- ट्विटर/@karunanundy)

आज के समय में बेटी को बचाने और उसे पढ़ाने को लेकर काफी जोर दिया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी आए दिन लोग इस मुहीम से संबंधित तस्वीरें पोस्ट करते हैं और सरकार भी इसे लेकर काफी सतर्क है। सरकार द्वारा बेटी को बचाने के लिए कई तरह के विज्ञापन भी चलाए जा रहे हैं। इसी मुहीम से संबंधित एक तस्वीर इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। तस्वीर एक पोस्टर की है, जिसमें ‘कैसे खाओगे उनके हाथ की रोटियां, जब पैदा ही नहीं होने दोगे बेटियां’ लिखा है। इसके साथ ही इस पोस्टर में एक बच्ची की तस्वीर बनी हुई है जो सिर पर चुनरी ओढ़कर रोटी बनाते दिख रही है।

सोशल मीडिया का एक धड़ा इस विज्ञापन की जमकर आलोचना कर रहा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या बेटियों का काम केवल रोटियां बनाने का ही है। वहीं सुप्रीम कोर्ट वकील करुणा नंदी ने इस पोस्टर की आलोचना करते हुए कहा कि रोटी बनाना केवल बेटी का काम नहीं है, आप खुद रोटियां बनाना सीखो। उन्होंने लिखा, ‘बेटी बचाओ, काम पर लगाओ, रोटी सिकाओ। बेवकूफ लोग, अपनी रोटियां खुद बनाना सीखो।’ एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘ओढ़नी पहनाओ, रसोई में बैठाओ, एलपीजी तो है न?’

इसके साथ ही लोग मोदी सरकार के स्लोगन ‘अबकी बार मोदी सरकार’ का भी मजाक बनाने लगे। एक यूजर ने इस स्लोगन और पोस्टर को मिलाकर बीजेपी सरकार पर तंज कसते हुए कहा, ‘अबकी बार रोटी अचार।’ वहीं हसीबा बी आमीन ने ट्वीट कर कहा, ‘…तो बेटी को केवल इसलिए पैदा करो कि वह तुम्हारे लिए खाना बना सके और घर का बाकी सारा काम कर सके। सरकार ने अच्छा काम किया। बस एक साल और है।’ एक यूजर ने कहा, ‘तो क्या लड़कियों को केवल इसलिए बचाया जाए ताकि वो खाना बना सके।’ एक यूजर ने लिखा, ‘यही इनकी असली विचारधारा है। ये लोग महिलाओं को इसी तरह से देखते हैं। इन्हें शर्म आनी चाहिए। ये लोग चाहते हैं कि लड़कियां रोटी बनाएं और अचार बेचें। ये लोग महिलाओं को प्रगति करते नहीं देखना चाहते। वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि यह विज्ञापन कम पढ़े लिखे लोगों को संदेश देने के लिए बनाया गया है।

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