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1992 में आज के ही दिन रंगभेद नीति को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया था

दक्षिण अफ्रीका में साल 1992 में आज के ही दिन रंगों के आधार पर इंसानों में भेदभाव के नियम को खत्म कर दिया गया था। सरकार को इस नतीजे पर पहुंचने के लिए जनमत संग्रह करवाना पड़ा था।

17 मार्च की तारीख का आधुनिक इतिहास में खास महत्व है। ये भी कहा जा सकता है कि मानवाधिकार के लिए ये तारीख सबसे अहम मानी जाती है। दरअसल दक्षिण अफ्रीका में साल 1992 में आज के ही दिन रंगों के आधार पर इंसानों में भेदभाव के नियम को खत्म कर दिया गया था। सरकार को इस नतीजे पर पहुंचने के लिए जनमत संग्रह करवाना पड़ा था। इस ऐतिहासिक जनमत संग्रह में बड़े पैमाने पर लोगों ने इस नियम को उखाड़ फेंकने की पैरवी कर एक नजीर पेश कर दी थी।

इस नियम के लागू होने के दो साल पहले ही अश्वेतों के बड़े नेता नेल्सन मंडेला 27 साल बाद जेल से रिहा हुए थे। तब तत्कालिक प्रेसिडेंट एफडब्ल्यू डी क्लार्क ने सोचा कि क्यों ना लोगों की राय ली जाए कि वो इस तरह की रंगभेद नीति को खत्म करना चाहते हैं या नहीं। दरअसल 1948 से ही दक्षिण अफ्रिका में रंगभेद नीति का बोलबाला था जिसके कारण दुनिया भर ने उस पर पाबंदी लगा रखी थी।

राष्ट्रपति क्लार्क को डर था कि अगर जल्द ही इस रंगभेद की नीति को खत्म नहीं किया गया तो वैश्विक स्तर पर देश की स्थिति और भी खराब हो सकती है। बदलते दौर में उसे दुनिया की उपेक्षा का शिकार होना पड़ सकता है। साथ ही उन्हें ये डर भी सता रहा था कि कहीं देश में गृह युद्ध ना छिड़ जाए। इन आशंकाओं से पार पाने के लिए सरकार ने देश के करीब 33 लाख श्वेत वोटरों से एक जनमत संग्रह में हिस्सा लेने का आह्वाहन किया। 17 मार्च, 1992 को कराए गए इस जनमत संग्र में 33 लाख शेवेत वोटरों में से 28 लाख वोटरों ने हिस्सा लिया। इन 28 लाख वोटरों में से 68.73 प्रतिशत लोगों का मानना था कि रंगभेद नीति देश को काफी पीछे धकेल रही है इसिलिए इसे तत्काल समाप्त कर देना चाहिए।

सरकार ने भी बहुमत का पूरा सममान करते हुए इस नीति को तुरंत समाप्त करने का फरमान सुना दिया। बरसों तक गुलामी में रहने के बाद उस दिन आखिरकार जंजीर टूट गई। नेल्सन मंडेला के 27 साल तक जेल में रहने की तपस्या भी पूरी हुई। नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाले राष्ट्रपति डी क्लार्क ने अगले दिन एलान किया कि हमने रंगभेद वाली किताब बंद कर दी है। मंडेला ने मुस्कुरा कर फैसले का स्वागत किया और केपटाइम्स अखबार ने पूरे पन्ने पर आलीशान अक्षरों में छापा, ‘यस, इट्स यस’.

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