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यूट्यूब के जरिए पैसे कमाने की प्लानिंग करने वालों को झटका, बदल गया नियम

यूट्यूब ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, "हम वाईपीपी वीडियो पर तब तक विज्ञापन जारी नहीं करेंगे, जब तक उसे 10,000 व्यूज नहीं मिल जाते। यह नई शुरुआत हमें चैनल की वैधता निर्धारित करने के लिए पर्यापत समय देगा।

Author न्यूयार्क | April 8, 2017 19:42 pm
यूट्यूब पर हर मिनट करीब 400 घंटे के वीडियो डाले जाते हैं। (File Photo)

यूट्यूब के जरिए सिर्फ वीडियो अपलोड करके लोग लाखों रुपए कमा लेते हैं, लेकिन अगर आप नया यू-ट्यूब चैनल बनाकर कमाई करने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपको झटका लग सकता है। यू-ट्यूब ने अपने नए कस्टमर्स के लिए नियम बदल दिए हैं। यूट्यूब के लाखों निर्माताओं के लिए वीडियो बनाना न सिर्फ रचनात्मक काम है, बल्कि आय का एक जरिया भी है। लेकिन अब यूट्यूब के वीडियो निर्माता तब तक कमाई नहीं कर पाएंगे, जब तक उनका चैनल 10,000 व्यूज हासिल न कर ले। यू-ट्यूब ने पाइरेटिड और ऑफेनसिव वीडियो को रोकने के लिए नया कदम उठाया है।

यूट्यूब ने अपनी ‘यूट्यूब पार्टनर कार्यक्रम (वाईपीपी)’ में बदलाव किया है, जिसे साल 2007 में शुरू किया गया था। यूट्यूब पर कोई भी व्यक्ति अपना वीडियो अपलोड कर सकता है और उसके वीडियो के साथ विज्ञापन दिखाए जाते हैं, जिसकी कमाई का हिस्सा वीडियो निर्माता को भी कंपनी की ओर से दिया जाता है। लेकिन अब किसी भी वीडियो को 10,000 व्यूज से ज्यादा होने पर ही यट्यूब उसके निर्माता को कमाई का हिस्सा देगी।

यूट्यूब ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, “हम वाईपीपी वीडियो पर तब तक विज्ञापन जारी नहीं करेंगे, जब तक उसे 10,000 व्यूज नहीं मिल जाते। यह नई शुरुआत हमें चैनल की वैधता निर्धारित करने के लिए पर्यापत समय देगा। साथ ही इससे हमें यह पुष्टि करने में भी मदद मिलेगी कि चैनल हमारे दिशानिर्देशों और विज्ञापनकर्ताओं की नीतियों के अनुरूप हैं कि नहीं।” पोस्ट में आगे कहा गया कि 10,000 व्यूज पार होने के बाद निर्माताओं को उनके 10,000 व्यूज तक की कमाई का भी हिस्सा दिया जाएगा।

हाल ही में ब्रिटिश सरकार, टेस्को, रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड, मैकडॉनल्ड और कुछ अन्य ने गूगल/यूट्यूब को विज्ञापन देने से उस समय मना कर दिया था जब उनके विज्ञापन कट्टरपंथी वीडियो पर आते हुए दिखाई दे रहे थे। जिसके चलते मार्च में गूगल को शिकायत के बाद विज्ञापन हटाना पड़ा और इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगनी पड़ी थी। हालांकि यूट्यूब की इस नई पॉलिसी का उन लोगों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा जो इसका इस्तेमाल पहले से कर रहे हैं, लेकिन नए चैनलों की वैधता निर्धारित करने के लिए यूजर को गूगल को पर्याप्त जानकारी देनी होगी।

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