एप्पल ने आखिरकार अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ा दी हैं। कंपनी ने कई मैकबुक और iPad मॉडल्स को महंगा कर दिया है, जबकि फिलहाल आईफोन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब एक हफ्ते पहले ही कंपनी के CEO टिम कुक ने चेतावनी दी थी कि मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतों के कारण प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाना जरूरी हो सकता है।
एप्पल का कहना है कि एआई डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग के चलते मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की लागत तेजी से बढ़ी है, जिसका असर अब कंपनी के प्रोडक्ट्स की कीमतों पर भी दिखने लगा है। ऐसे में सवाल है कि किन डिवाइसेज की कीमत बढ़ी है और ग्राहकों पर इसका कितना असर पड़ेगा?
कीमतों में बदलाव से पहले एप्पल ने हमेशा की तरह नए प्रोडक्ट्स की घोषणा के लिए अपना ऑनलाइन स्टोर कुछ समय के लिए बंद कर दिया। स्टोर दोबारा शुरू होने पर कई मैक मॉडल्स की कीमतें करीब 15% से 20% तक बढ़ी हुई थीं, जबकि iPad की कीमतों में लगभग 15% से 25% तक का इजाफा देखा गया। भारत में Apple Online Store पर भी नई कीमतें लागू कर दी गई हैं। हालांकि, कंपनी ने फिलहाल आईफोन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।
एनालिस्ट्स के अनुसार, यह फैसला एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत का असर कंज्यूमर डिवाइस की कीमतों पर पड़ने का अब तक का सबसे साफ उदाहरण है। IDC के क्लाइंट डिवाइस के वाइस प्रेसिडेंट फ्रांसिस्को जेरोनिमो ने कहा, “एआई से चलने वाली मेमोरी की कमी अब कंज्यूमर कीमतों में उस लेवल पर दिख रही है जो हमने पहले कभी नहीं देखा। एप्पल भी बढ़ती मेमोरी कीमतों से अछूता नहीं है।”
“यह बात कि एप्पल ने आईफोन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया, यह बताता है कि उसकी प्राथमिकताएं क्या हैं। चूंकि आईफोन कंपनी के आधे से ज्यादा रेवेन्यू से आता है, इसलिए एप्पल अपनी अगली पीढ़ी की लाइनअप के लिए कीमतों का अंदाजा लगाते समय आईफोन की मांग को बनाए रखने पर ध्यान देता हुआ लगता है।”
भारत में महंगे हुए एप्पल के प्रोडक्ट
एप्पल द्वारा कीमतों में किए गए नए बदलाव का असर भारत में बेचे जा रहे उसके डिवाइस की लाइन पर भी पड़ा है। कई मैकबुक, iPad और HomePod मॉडल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। अपनी ओरिजिनल लॉन्च कीमतों की तुलना में कई Apple प्रोडक्ट अब लगभग 14 प्रतिशत से 46 प्रतिशत ज्यादा महंगे हैं।
जब कीमतों में बढ़ोतरी की बात आती है, तो HomePod Mini, जिसकी कीमत 10,900 रुपये थी, उसमें सबसे ज्यादा 45.87 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और अब यह 15,900 रुपये में बिक रहा है, जो 5,000 रुपये की बढ़ोतरी है। होमपॉड की कीमत 32900 रुपये से बढ़कर 44,900 रुपये हो गई।
टैबलेट डिवाइस की बात करें तो, 11-इंच वाले आईपैड एयर की कीमत में 30.82 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और इसकी कीमत 64,000 रुपये से बढ़कर 84,900 रुपये हो गई है। 11-इंच वाले आईपैड प्रो की कीमत 99,900 रुपये से बढ़कर 1,19,900 रुपये हो गई है।
इस बीच मैक में बेस मॉडल मैकबुक प्रो की कीमत 50,000 रुपये बढ़कर 1,89,900 रुपये से 2,39,900 रुपये हो गई है। मैकबुक एयर (512GB मॉडल) की कीमत 18,000 रुपये बढ़ गई है, जबकि हाल ही में लॉन्च हुए मैकबुक नियो की कीमत 69,900 रुपये से बढ़कर 79,900 रुपये हो गई है।
मैकबुक नियो, जो एप्पल की किफायती कंप्यूटिंग डिवाइस कैटेगरी में एंट्री थी, उसकी कीमत में सबसे कम 14.31 परसेंट की बढ़ोतरी हुई।
जेरोनिमो ने कहा, “मैकबुक नियो की कीमत में बढ़ोतरी खास तौर पर ध्यान देने लायक है। यह एप्पल के सबसे तेजी से बिकने वाले लैपटॉप में से एक है, इसलिए इसकी कीमत बढ़ाना दिखाता है कि एप्पल का मानना है कि ज्यादा कीमत के बावजूद डिमांड मजबूत बनी रहेगी।”
दूसरों की तुलना में एप्पल पर शायद कम असर
कुल मिलाकर, यह बदलाव एप्पल के पूरे इकोसिस्टम में काफी बढ़ोतरी दिखाता है, जिसमें स्मार्ट स्पीकर में सबसे ज़्यादा परसेंट बढ़ोतरी हुई है और मैक और आईपैड में लगभग 15 से 31 परसेंट के बीच बढ़ोतरी देखी गई है।
IDC के एग्जीक्यूटिव ने कहा, “इन बढ़ोतरी के बावजूद, एप्पल पर कई कॉम्पिटिटर की तुलना में कम असर पड़ने की संभावना है। इसका कस्टमर बेस ज्यादा प्रीमियम है, कीमत को लेकर कम सेंसिटिव है और कई खरीदार ट्रेड-इन और इंस्टॉलमेंट प्रोग्राम के जरिए अपग्रेड करते हैं, जिससे ज्यादा स्टिकर कीमतों का असर कम होता है।”
कीमतों में यह बढ़ोतरी DRAM और NAND फ्लैश जैसे मेमोरी चिप्स की कमी की वजह से हो रही है, जिनका इस्तेमाल स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट वगैरह में होता है। यह संकट AI कंपनियों के डेटा सेंटर के लिए AI मॉडल को ट्रेन करने और चलाने के लिए बहुत ज़्यादा एडवांस्ड मेमोरी खरीदने का भी नतीजा है, जिससे मेमोरी सप्लायर ज्यादा मार्जिन वाले ऑर्डर को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की सप्लाई कम हो गई है, जिससे मेमोरी की कीमतें और बढ़ गई हैं।
कंपोनेंट की कीमतें बढ़ने के साथ डिवाइस बनाने वाली कंपनियां उन्हें खुद उठाने के बजाय कंज्यूमर पर डाल रही हैं। Apple का कहना है कि वह अब मेमोरी कंपोनेंट की ज़्यादा कीमत नहीं उठा सकता, जिससे उसने मैकबुक, iPad और दूसरे प्रभावित प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ा दी हैं, जबकि iPhone की कीमतें फिलहाल वैसी ही रखी हैं।
मेमोरी की कमी की वजह से कीमतें बढ़ाने वाली अकेली कंपनी एप्पल नहीं है। Dell Technologies, HP और Lenovo जैसी कंपनियों ने चेतावनी दी है कि मेमोरी की ज्यादा कीमतें PC की कीमतों और मार्जिन पर असर डाल सकती हैं। एप्पल उन पहली बड़ी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में से है जिसने एआई से चलने वाली मेमोरी की कमी से जुड़ी रिटेल कीमतों में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी की घोषणा की है।
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ऐप्पल ने हाल ही में घोषणा की कि उसका वर्चुअल असिस्टेंट SIRI अब एक बिल्कुल नए रूप में अधिक स्वाभाविक तरीके से बातचीत करने और यूजर्स के व्यक्तिगत संदर्भ (पर्सनल कॉन्टेक्स्ट) को समझने की क्षमता हासिल कर रहा है। इसके साथ ही इसमें डीप और एडवांस्ड AI फीचर्स भी जोड़े जा रहे हैं। यहां पढ़ें पूरी खबर…
