सिम-बाइंडिंग (Sim Binding) नियमों को लेकर स्थिति अब काफी स्पष्ट हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मैसेजिंग ऐप्स के लिए यूज़र अकाउंट को एक्टिव सिम कार्ड से जोड़ना जरूरी होगा और इस नियम में फिलहाल किसी भी तरह की छूट देने की योजना नहीं है।

डेडलाइन को लेकर भी सरकार का रुख सख्त बना हुआ है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने ओटीटी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि हर यूज़र का अकाउंट उसके सक्रिय और रजिस्टर्ड सिम से लिंक होना चाहिए। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को कहा था कि नवंबर 2025 में जारी सिम-बाइंडिंग निर्देश लागू रहेंगे।

सिम-बाइंडिंग के इन निर्देशों के तहत मैसेजिंग ऐप्स को दो बड़े काम करने होंगे। WhatsApp इनमें सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है। पहला-व्हाट्सऐप वेब जैसी सर्विसेज से यूजर को हर 6 घंटे में लॉगआउट करना जरूरी होगा। दूसरा- अगर यूजर के डिवाइस में रजिस्टर्ड सिम एक्टिव नहीं है यानी काम नहीं कर रही है तो वह ऐप काम नहीं करेगा। बता दें कि इन नियमों का पालन करने की आखिरी तारीख 28 फरवरी तय की गई है।

WhatsApp पर क्या असर पड़ेगा?

इन नियमों का मतलब यह है कि अगर आपके फोन में वह सिम कार्ड नहीं है जिसे आपने WhatsApp या Telegram पर रजिस्टर करने के लिए इस्तेमाल किया है तो हो सकता है कि ऐप में आपको लिमिटेड फीचर्स ही मिलें। इसके अलावा, हो सकता है कि आपका अकाउंट बंद ही हो जाए।

गौर करने वाली बात है कि व्हाट्सऐप भारत समेत दुनियाभर में सबसे लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप है। बहुत सारे यूजर्स एक व्हाट्सऐप अकाउंट को मल्टीपल डिवाइसेज पर इस्तेमाल करते हैं। नए नियमों के आने का साफतौर पर मतलब है कि ऐसे कई लाख यूजर्स का व्हाट्सऐप काम नहीं करेगा जिनका अकाउंट अलग-अलग डिवाइसेज पर एक्टिव है।

Sim Binding से कौन-कौन होगा प्रभावित?

Meta Platforms के मालिकाना हक वाली WhatsApp कथित तौर पर ऐप के ‘Beta’ वर्ज़न में ऐसा कोड टेस्ट कर रही है जिसके तहत यूज़र्स को एक मैसेज दिखाया जाएगा। इस मैसेज में यह लिखा होगा कि भारतीय नियमों के अनुसार कंपनी को यह जांचना जरूरी है कि उनका सिम कार्ड अब भी डिवाइस में मौजूद है या नहीं।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि कंपनी हर छह घंटे में अनिवार्य लॉगआउट के नियम का पालन करेगी या नहीं। इंडस्ट्री ऑर्गनाइज़ेशन Internet and Mobile Association of India (IAMAI) ने सरकार को चेतावनी दी है कि यह प्रावधान उन पेशेवरों के लिए बाधा बन सकता है जो WhatsApp Web पर निर्भर हैं। और उन परिवारों के लिए भी परेशानी खड़ी कर सकता है जो एक ही व्हाट्सऐप अकाउंट शेयर करते हैं।

जो यूजर अलग-अलग डिवाइसेज पर एक ही व्हाट्सऐप अकाउंट चलाते हैं। बार-बार सिम कार्ड बदलने वाले यूजर्स भी प्रभावित होंगे।
WhatsApp Web अपने आप हर छह घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। अगर आप व्हाट्सऐप चलाना चाहेंग तो QR कोड दोबारा स्कैन करना होगा।
60-80% तक छोटे बिजनेस के संचालन पर सर पड़ सकता है।

डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगेगी?

पिछले कुछ सालों सेदेश में डिजिटल और साइबर फ्रॉड के मामले लगातार बढ़े हैं। फर्जी कॉल सेंटर, फेक व्हाट्सऐप अकाउंट और कॉल सेंटर के जरिए धोखाधड़ी के मामलों में जमकर इजाफा हुआ है। सरकार का कहना है कि अगर मैसेजिंग अकाउंट एक्टिव और असली सिम से लिंक रहेगा तो जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों को पकड़ना आसान होगा।

केंद्रीय संचार मंत्री ने भी कहा था, ”कुछ मुद्दे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं और कुछ राजस्व प्रभाव से संबंधित हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।”

किन ऐप्स पर होगा असर
गौर करने वाली बात है कि नए नियम सिर्फ WhatsApp तक सीमित नहीं हैं। नए Sim Binding नियम Telegram, Signal और दूसरे मैसेजिंग ऐप्स भी इसके दायरे में आएंगे।

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स्कैमर्स लोगों से पैसे ठगने और उन्हें लालच देने के लिए अलग-अलग नए तरीके अपनाते रहते हैं। अधिकतर यूजर्स इस जाल में फंसकर अपना निजी डेटा लीक करने, पैसे गंवाने और डिवाइस में मैलवेयर डाउनलोड करने जैसे काम कर बैठते हैं। पिछले कुछ महीनों में इन ठगों ने एक नया तरीका अपनाया है जिसके जरिए व्हाट्सऐप यूजर्स को निशाना बनाया जा रहा है। ठगी का यह तरीका steganography है जिसे स्कैमर्स अब आम भोलेभाले लोगों का पैसा लूटने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…