Google ने अगस्त में 93,550 आइटम्स हटाए, कू ने 38,456 सामग्रियों को किया काबू

सामग्रियों को हटाने के लिए कॉपीराइट (92,750), ट्रेडमार्क (721), नकल (32), धोखाधड़ी (19), अदालती आदेश (12), ग्राफिक यौन सामग्री (12) और अन्य कानूनी अनुरोध (4) सहित कई श्रेणियों के तहत अनुरोध किया गया था।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Pixabay)

अमेरिकी इंटरनेट सर्च इंजन गूगल ने अपनी मासिक पारदर्शिता रिपोर्ट में कहा कि उसे अगस्त 2021 में उपयोगकर्ताओं से 35,191 शिकायतें मिलीं और इनके आधार पर उसने 93,550 सामग्रियों को हटाया। दूसरी ओर घरेलू सोशल मीडिया मंच कू ने इस दौरान 38,456 सामग्रियों को सक्रिय रूप से नियंत्रित किया।

उपयोगकर्ताओं की शिकायत के अलावा गूगल ने स्वचालित प्रक्रिया के तहत अगस्त में 651,933 सामग्रियों को हटाया। इससे पहले गूगल को जुलाई में उपयोगकर्ताओं से 36,934 शिकायतें मिली थीं और इनके आधार पर 95,680 सामग्रियों को हटाया गया था। जुलाई में स्वचालित प्रक्रिया से 5,76,892 सामग्रियों को हटाया गया था। अमेरिका स्थित प्रौद्योगिकी कंपनी ने यह जानकारी भारत के आईटी नियमों के अनुपालन के तहत दी, जो 26 मई को लागू हुए थे। गूगल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा कि उसे भारत में अगस्त में व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं से 35,191 शिकायतें मिलीं, जिसके आधार पर 93,550 सामग्रियों को हटाया गया।

रिपोर्ट में कहा गया कि ये शिकायतें तीसरे पक्ष की सामग्री से संबंधित हैं और इनमें स्थानीय कानूनों या व्यक्तिगत अधिकारों के उल्लंघन की बात पाई गई। रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ शिकायतें बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित थीं, जबकि दूसरी शिकायतों में मानहानि जैसे आधार पर सामग्रियों को प्रतिबंधित करने की मांग की गई थी। सामग्रियों को हटाने के लिए कॉपीराइट (92,750), ट्रेडमार्क (721), नकल (32), धोखाधड़ी (19), अदालती आदेश (12), ग्राफिक यौन सामग्री (12) और अन्य कानूनी अनुरोध (4) सहित कई श्रेणियों के तहत अनुरोध किया गया था।

सोशल मीडिया मंच कू ने अनुपालन रिपोर्ट में बताया कि अगस्त में उसने 38,456 सामग्रियों को सक्रिय रूप से नियंत्रित किया और इस दौरान उसे उपयोगकर्ताओं से 4,493 शिकायतें मिलीं। कू ने कहा कि इस दौरान उसने 38,456 पोस्टों को सक्रिय रूप से नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए, जिनमें से 1,220 पोस्ट को डिलीट कर दिया गया और जबकि शेष 37,236 के खिलाफ ‘अन्य कार्रवाई’ की गई।

FB ऐड्स ने लिंग, जाति और उम्र आधारित भेदभाव बढ़ाया!: सोशल मीडिया मंच ने ऑनलाइन विज्ञापनों के तौर तरीकों को बदल दिया है साथ ही भेदभाव के नये तरीकों और विपणन के ढंग ने भी नयी चिंताओं को जन्म दिया है। रविवार रो आरएमआईटी के नेतृत्व में एक बहु-विश्वविद्यालय इकाई एआरसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ऑटोमेटेड डिसीजन मेकिंग एंड सोसाइटी (एडीएम प्लस एस) ने ऑस्ट्रेलिया में विज्ञापन वेधशाला आरंभ की। इस शोध परियोजना से यह पता लगाया जाएगा कि कैसे सोशल मीडिया मंच विज्ञापनों के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया के उपयोगकर्ताओं तक पहुंचते हैं, जिसका मकसद ऑनलाइन विज्ञापन में सार्वजनिक पारदर्शिता की आवश्यकता के बारे में बातचीत को बढ़ावा देना है।

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