यूएफओ : क्या कहती है अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की टास्क फोर्स की रिपोर्ट है कि 17 साल में धरती पर दिखे 144 यूएफओ, भारत में भी 1951 से दिख रहीं उड़न तश्तरियां।

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सांकेतिक फोटो।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की टास्क फोर्स की रिपोर्ट है कि 17 साल में धरती पर दिखे 144 यूएफओ, भारत में भी 1951 से दिख रहीं उड़न तश्तरियां। नौ पन्नों की अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी टास्क फोर्स ने कहा है कि वर्ष 2004 से 2021 के बीच 144 यूएफओ जिसे अमेरिका ‘अन-आइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना’ (यूएएफ) कहता है, देखे गए।

अमेरिका के रक्षा मत्रालय ने तीन वीडियो जारी किए। इन्हें अमेरिकी नौसेना ने एफ-18 लड़ाकू विमान में लगे इंफ्रा रेड कैमरे की मदद से रिकॉर्ड किया था। बताया गया कि ये यूएफओ यानी ‘अन- आइडेंटिफाइड फ्लाइंग आॅब्जेक्ट’ हैं, जिन्हें आम भाषा में उड़न तश्तरी भी कहते हैं। जून 2021 में यूएफओ की जांच के लिए बनाई गई टास्क फोर्स ने एक रिपोर्ट जारी की। नौ पन्नों की इस रि पोर्ट में अमेरिकी सरकारी सूत्रों के जरिए 2004 से 2021 के बीच 144 यूएफओ, जिसे अमेरिका यूएएफ कहता है, उन्हें देखे जाने का जिक्र है।

यूएफओ की जांच के लिए बनाई गई अमेरिकी टास्क फोर्स ने न तो पुष्टि की है, न ही इस बात को खारिज किया है कि इस तरह की वस्तुएं पृथ्वी पर अन्य ग्रहों के वासियों (एलियंस) के आने का संकेत हो सकते हैं। यह रिपोर्ट ‘डायरेक्टर आॅफ नेशनल इंटेलिजेंस’ ने ‘प्रिलिमिनरी असेसमेंट : अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना’ नाम से जारी की गई है। इस टास्क फोर्स का गठन 10 महीने पहले किया गया था।

अमेरिका सात दशकों से यूएएफ के बारे में जानकारी जुटा रहा है। वर्ष 1947 से वर्ष 1969 तक अमेरिकी वायुसेना ने प्रोजेक्ट ब्लू बुक नाम से एक जांच अभियान चलाया। इसमें कुल 12,618 रिपोर्ट्स की जांच में पाया गया यह सामान्य घटनाएं थीं। जबकि 701 रिपोर्ट्स के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं निकल सकी। इसके बाद वर्ष 2007 से 2012 के बीच ‘एडवांस्ड एअरोस्पेस थ्रेट आइडेंटिफिकेशन प्रोग्राम’ (एएआइपी) लॉन्च हुआ। बाद में यह प्रोग्राम बंद कर दिया गया। इन सभी प्रोजेक्ट की रिपोर्ट गोपनीय रखी गई। वर्ष 2020 में एक कार्यक्रम शुरू किया गया, जिसे ‘अन-आइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना’ टास्क फोर्स नाम दिया गया। इसी टास्क फोर्स की रिपोर्ट 25 जून को सार्वजनिक की गई है।

अतीत में जाएं तो 24 जून 1947 को आई उड़न तश्तरी की पहली खबर। मशहूर बिजनेसमैन और पायलट केनेथ अर्नोल्ड वॉशिंगटन स्टेट में माउंट रेनियर के पास उड़ान भर रहे थे। केनेथ ने नौ चमकीली वस्तुओं को एकसाथ क्रमबद्ध आसमान में उड़ते हुए देखा। उनकी रफ्तार लगभग 2700 किमी प्रति घंटा थी, जो उस वक्त की किसी भी टेक्नोलॉजी से तीन गुना ज्यादा तेज थी। केनेथ ने बताया कि उन्होंने आसमान में तश्तरी जैसी वस्तुएं देखी हैं। अगले दिन कई अखबारों ने छाप दिया कि आसमान में उड़ती हुई तश्तरी देखी गई है।

इसके बाद यूएफओ देखने की घटनाएं बढ़ गईं। भारत में 1951 में पहली बार दिखा यूएफओ। वर्ष 1951 में दिल्ली में फ्लाइंग क्लब के सदस्यों ने कोई वस्तु आसमान में देखी, जो सिगार के आकार का था। थोड़ी देर दिखने के बाद ये आसमान में गायब हो गया। ऐसी ज्यादातर वस्तुएं 21वीं सदी की शुरुआत में देखी गईं। 29 अक्तूबर 2017 को एक तेजी से उड़ते हुए चमकीले आॅब्जेक्ट को कोलकाता के पूर्वी छोर पर देखा गया।

इसको कैमकॉर्डर से रिकॉर्ड भी किया गया था। वर्ष 2013 के बाद से चेन्नई से लखनऊ तक ऐसी वस्तुओं के देखे जाने की खबरें आम हो गर्इं। यूएफओ को लेकर विशेषज्ञों में मतभेद रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, देखे गए आधा से ज्यादा कथित यूएफओ उल्कापिंड, टूटते तारे और शुक्र ग्रह हो सकते हैं। अमेरिका की रोचेस्टर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एडम फ्रैंक का मानना है कि यूएफओ के वीडियो में वैज्ञानिक नजरिए से कुछ भी नहीं है। रिचमंड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जैक सिग्नल का मानना है कि जरूरी नहीं कि आसमान में दिखने वाली हर अजीब सी चीज दूसरे ग्रह की हो।

यूएफओ की जांच के लिए बनाई गई अमेरिकी टास्क फोर्स ने न तो पुष्टि की है, न ही इस बात को खारिज किया है कि इस तरह की वस्तुएं पृथ्वी पर अन्य ग्रहों के वासियों (एलियंस) के आने का संकेत हो सकते हैं। यह रिपोर्ट ‘डायरेक्टर आॅफ नेशनल इंटेलिजेंस’ ने ‘प्रिलिमिनरी असेसमेंट : अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना’ नाम से जारी की गई है। इस टास्क फोर्स का गठन 10 महीने पहले किया गया था।

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