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TikTok क्यों हुआ इंडिया में बैन? 7 महीने पहले शुरू हुआ था विवाद, पढ़ें पूरी टाइमलाइन

टिक टॉक के साथ आखिर ऐसा क्या हुआ जो पिछले सात महीने में यह ऐप विवादों में आ गया। टाइमलाइन के माध्यम से नीचे बताई गई हैं।

टिक टॉक (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

गूगल और ऐप्पल ने अपने ऑनलाइन स्टोर से टिक टॉक को 16 अप्रैल को हटा दिया है। इसके बाद टिक टॉक के चाहने वालों को बड़ी निराशा हाथ लगी है। मद्रास हाईकोर्ट ने 3 अप्रैल के अपने आदेश में केंद्र सरकार को इस ऐप पर बैन लगाने को कहा था। पिछले कुछ ही महीनों में इसके यूजर्स में काफी बढ़ोत्तरी हुई है और इसके फैंस भी करोड़ों में बने हैं। लेकिन आखिर ऐसा क्या हुआ जो पिछले सात महीने में यह ऐप विवादों में आ गया। आइये टाइमलाइन के माध्यम से जानते हैं।

टिक टॉक से पहली मौत 17 अक्टूबर 2018: चेन्नई के एक 24 वर्षीय व्यक्ति ने कथित तौर पर महिला पोशाक में खुद के वीडियो पोस्ट करने और टिक टॉक यूजर द्वारा उत्पीड़न के बाद आत्महत्या कर ली।

01 जनवरी 2019: दक्षिण भारत में तमिलनाडु के पट्टली मक्कल काची पार्टी के संस्थापक एस रामदॉस ने इस ऐप पर पहली बार बैन लगाने की बात कही थी। उनका कहना था कि यह ऐप यौन विकृतियों को बढ़ावा देता है और इससे युवा भ्रमित भी होतें है।

11 फरवरी 2019: तमिलनाडु के आईटी मंत्री एम मणिकंदन ने कहा कि वे केंद्र सरकार से देश में संस्कृति को अपमानित करने और अश्लील साहित्य को बढ़ावा देने के लिए देशभर में टिक टॉक पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहेंगे।

22 फरवरी 2019: बाइक सवार स्कूली छात्रों के द्वारा टिक टॉक से वीडियो बनाने के दौरान एक की मौत हो गई जबकि दो और युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। इन युवकों की बाइक एक ट्रक से टकराने के बाद हादसा हुआ था।

01अप्रैल 2019: एडवोकेट मुथु कुमार ने पोर्नोग्राफी के प्रसार और बच्चों को असंवेदनशील सामग्री के संपर्क में आने के चलते टिक टॉक पर प्रतिबंध लगाने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

03 अप्रैल 2019: मद्रास उच्च न्यायालय ने भारत सरकार को टिक टॉक ऐप पर प्रतिबंध लगाने का आदेश देता है और मीडिया को टिक टॉक पर बनाई गई किसी भी सामग्री का उपयोग करने से भी रोकने को कहा है।

12 अप्रैल 2019: कोर्ट द्वारा बैन के आदेश के बाद टिक टॉक कंपनी ने कहा कि उसने अपने जरुरी दिशानिर्देशों का पालन नहीं करने के लिए करीब छह मिलियन वीडियो हटा दिए हैं।

13 अप्रैल 2019: दिल्ली के एक 19 वर्षीय व्यक्ति की उसके दोस्त ने एक कार की सवारी में एक टिक टॉक वीडियो बनाने के दौरान गलती से गोली मार दी। जिसके बाद उस शख्स की मौत हो गई थी।

15 अप्रैल 2019: सर्वोच्च न्यायालय ने टिक टॉक पर मद्रास उच्च न्यायालय के प्रतिबंध के आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने का कहना था कि ये रोक अस्थाई है और मामला अभी उच्च न्यायालय में लंबित है।

16 अप्रैल 2019: कोर्ट के आदेश के बाद गूगल और ऐप्पल स्टोर ने भी टिक टॉक को हटा दिया है।

 

बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय 22 अप्रैल को फिर से टिक टॉक की याचिका पर सुनवाई करेगा। इस बीच मौजूदा उपयोगकर्ता टिक टॉक ऐप का उपयोग जारी रख सकते हैं और नए उपयोगकर्ता अभी भी इसे इंटरनेट से डाउनलोड कर सकते हैं।

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