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ब्रह्मांड के अध्ययन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता

खगोलविद मशीनों से किए जाने वाले अध्ययन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) की ओर मुखातिब हो रहे हैं, ताकि अगली बड़ी सफलता को जल्द तलाशने के लिए नए उपक्रम बनाए जा सके।

सांकेतिक फोटो।

खगोलविद मशीनों से किए जाने वाले अध्ययन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) की ओर मुखातिब हो रहे हैं, ताकि अगली बड़ी सफलता को जल्द तलाशने के लिए नए उपक्रम बनाए जा सके। यहां एआई के चार तरीके हैं जो खगोलविदों की मदद कर रहे हैं। पहला है ग्रहों की खोज। ग्रहों का पता लगाने के कुछ तरीके हैं, लेकिन इनमें सबसे सफल तरीका उनकी गति के जरिये पता लगाना है। जब बहिर्ग्रह (सौरमंडल से बाहर के ग्रह) अपने पितृ तारे के सामने से गुजरते हैं, तब प्रकाश की कुछ मात्रा को बाधित करते हैं जिसे हम देख सकते हैं।

बहिर्ग्रह की कई कक्षाओं पर नजर रख, खगोलविदों ने प्रकाश के अंतर पर आधारित तस्वीर बनाई है जिसके आधार पर वे ग्रह की अवस्था की पहचान कर सकते हैं जैसे उसका वजन, आकार और उसके तारे से दूरी। नासा की केप्लर अंतरिक्ष दूरबीन में लगी प्रौद्योगिकी बहुत सफल रही है जिसके जरिये एक बार में हजारों तारों पर नजर रखी जा सकती है, यह तारों से उत्पन्न प्रकाश पर भी नजर रखती है। इंसान इन अंतर (गिरावट) को देखने में काफी पारंगत है लेकिन यह कुशलता है जिसके विकसित होने में समय लगता है, तब कृत्रिम बुद्धिमत्ता काम आती है।

दूसरा है गुरुत्वीय तरंगें। समय-शृंखला मॉडल केवल बहिर्ग्रहों का पता लगाने में ही उपयोगी नहीं है बल्कि यह ब्रह्रांड में होने वाली सबसे विनाशकारी घटनाओं के संकेतों का पता लगाने में भी सटीक है, जैसे ब्लैकहोल और न्यूट्रॉन स्टार के मिलने की घटना। जब यह अत्याधिक सघन पिंड ब्लैकहोल की तरफ खिंचता है तो वे अंतरिक्ष में तरंगे भेजते हैं जिनका पता पृथ्वी पर आ रहे कमजोर संकेतों से लगा सकते हैं। गुरुत्वीय तरंग संसूचक सहयोग ‘लिगो’ और ‘विर्गो’ की मदद से गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाने वाले उपकरण इन घटनाओं की दर्जनों तरंगों का पता लगा लेते हैं और यह मशीन द्वारा किए गए अध्ययन से होता है। लिगो और विर्गो स्थित टीम कुछ क्षण में ही संभावित घटना का पता लगा सकती हैं और दुनियाभर के खगोलविदों को सतर्कता संकेत दे सकती हैं ताकि वे अपनी-अपनी दूरबीनों की दिशा दूसरी ओर कर सके।

तीसरा है आसमान में बदलाव। जब चिली में बन रही वेरा रुबीन वेधशाला तैयार हो जाएगी तो यह पूरे आसमान का सर्वेक्षण पूरी रात करेगी- एक बार में यह वेधशाला करीब 80 टेराबाइट के बराबर तस्वीर एकत्र करेगी- ताकि देखा जा सके कि ब्रह्रांड में तारों और आकाशगंगाओं में समय के साथ क्या बदलाव आता है। एक टेराबाइट में 8,000,000,000,000 बिट होते हैं। रुबीन योजनागत परिचालन, अंतरिक्ष सर्वेक्षण की विरासत और समय के साथ सैकड़ों पेटाबाइट आंकड़ों को एकत्र कर विश्लेषण करेगी। संदर्भ के लिए बता दें कि 100 पेटाबाइट का अभिप्राय है फेसबुक पर मौजूद सभी तस्वीरों को जमा करने के स्थान के बराबर या 700 साल तक लगातार चलने वाला एचडी वीडियो। चौथा है गुरुत्वाकर्षी लेंस। जैसे-जैसे हम ब्रह्रांड के संबंध में अधिक से अधिक आंकड़े एकत्र करेंगे, कई बार हमें उन्हें संभालने और बेकार के आंकड़ों को नष्ट करने की भी जरूरत पड़ेगी।

ऐसे में हम कैसे दुर्लभ जानकारी को इन आंकड़ों के ढेर से निकाल सकेंगे? एक आकाशीय परिपाटी है जो कई खगोलविदों को उत्साहित करती है और वह है गुरुत्वाकर्षी लेंस। यह तब होता है जब दो आकाशगंगा हमारी दृष्टि के सामने होती हैं और नजदीकी आकाशगंगा का गुरुत्वाकर्षण लेंस की तरह काम करता है और यह दूर की वस्तुओं को बड़े आकार का दिखाता है। वर्ष 2018 में दुनियाभर के खगोलविद मजबूत गुरुत्वाकर्षी लेंस की तलाश करने की चुनौती में शामिल हुए थे जिसमें उन्हें इन लेंसों का स्वत: पता लगाने के लिए बेहतरीन कलनविधि विकसित करना था। आने वाले दशक में वीरा रुबीन वेधशाला जैसे साधनों का इस्तेमाल कर खगोलविद पेटाबाइट में डाटा एकत्र करेंगे जो हजारों टेराबाइट होगी।

नए ग्रहों की खोज, गुरुत्वीय तरंगे, आसमान में बदलाव, गुरुत्वाकर्षी लेंस से जुड़ी दुर्लभ जानकारी और आंकड़ों के विश्लेषण में वैज्ञानिक कर रहे कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल। एश्ले ंिस्पडलर, शोधकर्ता, खगोल भौतिकी, हर्टफोर्डशायर विश्वविद्यालय ने इस्तेमाल से कई नई खोज कीं। विज्ञानियों के मुताबिक, ब्रह्रांड का विस्तार होता जा रहा है और इसके साथ ही हमें मिल रही इससे जुड़ी सूचनाएं भी बढ़ती जा रही हैं, लेकिन खगोलशास्त्रियों की अगली पीढ़ी के सामने बड़ी चुनौती यह है कि कैसे इन आंकड़ों का अध्ययन किया जाए जिन्हें हमने एकत्र किया है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल से वैज्ञानिकों को खासी मदद मिल रही है।

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