रूस ने बुधवार, 29 जुलाई को टेलीग्राम के फाउंडर पावेल डुरोव पर “आतंकवाद में मदद करने” का आरोप लगाया और मैसेजिंग ऐप के हेड को इंटरनेशनल वांटेड लिस्ट में डाल दिया है।
डुरोव के खिलाफ ये आरोप तब लगे हैं जब रूसी अधिकारी टेलीग्राम पर पाबंदियां लगा रहे हैं। यह इंटरनेट को क्रेमलिन के पूरे कंट्रोल में लाने की लंबी कोशिश का हिस्सा है, जो फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के बड़े हमले के बाद और तेज हो गई है।
एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस की मुख्य घरेलू सिक्योरिटी एजेंसी, फेडरल सिक्योरिटी सर्विस ने आरोप लगाया कि टेलीग्राम के एडमिनिस्ट्रेशन ने “कई चैनल, चैट और बॉट्स” को नहीं हटाया है, जिनका इस्तेमाल “यूक्रेनी इंटेलिजेंस एजेंसियां, आतंकवादी और कट्टरपंथी संगठन रूस में तोड़फोड़, आतंकवाद और साइबरफ्रॉड की घटनाओं की तैयारी और तालमेल के लिए सक्रिय रूप से करते हैं”
एजेंसी ने कहा कि जुलाई 2025 से अब तक पूरे रूस में चैटबॉट के 46 यूजर्स (जिनकी उम्र 12 से 22 साल के बीच है) को कानून लागू करने वाले अधिकारियों पर हमले, आगजनी और अन्य कामों के लिए हिरासत में लिया गया है।
डुरोव ने इस साल की शुरुआत में घोषणा की थी कि रूसी अधिकारियों ने उनके खिलाफ आपराधिक जांच शुरू की है और उन पर टेलीग्राम तक पहुंच को सीमित करने के लिए झूठे बहाने बनाने का आरोप लगाया था, जो “प्राइवेसी और बोलने की आजादी के अधिकार को दबाने” की कोशिश का हिस्सा है।
दोषी पाए जाने पर इस एंटरप्रेन्योर को रूस में उम्रकैद की सजा हो सकती है। टेलीग्राम ने टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।
एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, कंपनी दुबई में स्थित है और डुरोव, जिनके पास फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात की दोहरी नागरिकता है, वहीं रहते हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के बाद Meta ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वीडियो को गलती से प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था। Meta ने कहा कि जैसे ही इस त्रुटि का पता चला, वीडियो की समीक्षा की गई और उसे दोबारा बहाल कर दिया गया। यहां पढ़ें पूरी खबर…
