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यूजर्स के फालतू पोस्ट्स हटाने के लिए फेसबुक ने रखी है 4500 लोगों की फौज, जानिए कैसे करती है काम

फेसबुक पर कॉन्टेंट मॉडरेशन की गाइडलाइंस लीक हुई हैं। इसमें बताया गया है कि फेसबुक पर कॉन्टेंट कैसे कंट्रोल किया जाता है। यह काम कौन करता है और कैसे करता है। ये बातें गाइडलाइंस में दर्ज हैं।

इस फोटो का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

फेसबुक दुनिया का सबसे बड़ा सोशल नेटवर्क प्लैटफॉर्म है। यह खुला मंच है, इसलिए ऐसा न समझिएगा कि यहां कुछ भी पोस्ट किया जा सकता है। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर आप अश्लील, अभद्र, भड़काऊ, हिंसात्मक और वैमनस्य फैलाने वाला कॉन्टेंट नहीं डाल सकते।

ऐसे कॉन्टेंट के लिए फेसबुक के पास मॉडरेशन पॉलिसी है। वेल ट्रेन्ड स्टाफ है। फेसबुक के सिपाहसलार मॉडरेटर्स और सबजेक्ट मैटर एक्सपर्ट्स (एसएमई) के तौर पर जाने जाते हैं। फेसबुक इस बारे में चर्चा करने से बचता है, लिहाजा कम ही लोग इस बारे में जानते होंगे।

हम आपको ये सब इसलिए बता रहे हैं, क्योंकि हाल ही में फेसबुक पर कॉन्टेंट मॉडरेशन की गाइडलाइंस लीक हुई हैं। इसमें बताया गया है कि फेसबुक पर कॉन्टेंट कैसे कंट्रोल किया जाता है। यह काम कौन करता है और कैसे करता है। कॉन्टेंट किस पैमाने पर पास किया जाता है। यानी वह पोस्ट होने लायक है या नहीं। ये सारी बातें लीक हुई गाइडलाइंस में दर्ज हैं।

ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ की वेबसाइट ने इसे जारी किया है। जानकारी के मुताबिक, मॉडरेटर्स फेसबुक पर कॉन्टेंट मॉडरेट करते हैं। यानी वे उसे कंट्रोल/मैनेज करते हैं। और आसानी से समझें तो फेसबुक पर आपका पोस्ट दिखेगा या नहीं, यह मॉडरेटर्स ही तय करते हैं।

Mark Zuckerberg, viatnaam photo, Norway, Facebook, facebook CEO Mark Zuckerberg,historic photograph, Vietnam war, Aftenposten,napalm girl, फेसबुक की ओर से जारी किए गए नोटिस में कहा गया था कि कोई भी फोटो जिसमें नग्न महिला के ब्रेस्ट अथवा यौन अंगों को दिखाया जा रहा होगा उसे फेसबुक से हटा दिया जाएगा।

3000 और रखे जाने हैं एम्पलॉई

फेसबुक के सीईओ मार्क जुगरबर्ग ने इस काम को करने के लिए भारी-भरकंप स्टाफ रख रखा है। फिलहाल उनकी टीम में 4500 कॉन्टेंट मॉडरेटर्स हैं। वह यह संख्या बढ़ाना चाहते हैं, इसलिए 3000 और नए कर्मचारी रखने पर सोच-विचार रहे हैं।

डिटेल साझा करने से बचता है फेसबुक

मॉडरेटिंग टीम में ज्यादातर लोग कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं। वह दुनिया भर में फैले हैं। जगह-जगह मॉडरेटिंग हब भी हैं। फेसबुक भी उनके बारे में चर्चा नहीं करता। वह अपने मॉडरेटर्स की संख्या और लोकेशन भी नहीं बताता।

ट्रेनिंग बाद बताए जाते हैं मैनुअल्स

मॉडरेटर्स अपना काम परफेक्शन से करें, इसके लिए उन्हें दो हफ्तों की ट्रेनिंग दी जाती है। फेसबुक एक्जिक्यूटिव्स इसके साथ ही उन्हें मैनुअल्स से वाकिफ कराते हैं। यह पूरा प्रोसेस कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क में बने फेसबुक हेडक्वार्टर में होता है।

कॉन्टेंट करते हैं कंट्रोल

अब आप सोच रहे होंगे कि यह टीम करती क्या होगी। दरअसल, फेसबुक पर दुनिया भर के लोग पल-पल में कुछ न कुछ कॉन्टेंट अपलोड करते हैं। उसमें से कुछ अश्लील, आपत्तिजनक, भड़काऊ, हिंसात्मक और आतंकी गतिविधियों से भी जुड़ा होता है। अगर फेसबुक यूज़र्स किसी विवादास्पद मुद्दे पर बात कर रहे होते हैं, तो FB के पास ऐसे हालात से निपटने के लिए तरीका है। मॉडरेटर्स के पास इससे जुड़ी पॉलिसी होती है।

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एक्सट्रीम कॉन्टेंट के लिए है ‘रामबाण इलाज’

अगर कोई फेसबुक पर बेहद आपत्तिजनक फोटो या वीडियो अपलोड करता है, तो ऐसा नहीं कि वह तुरंत पोस्ट हो जाता है। FB में कुछ ऑटोमैटिक सिस्टम है, जिससे एक्सट्रीम कॉन्टेंट साइट पर पोस्ट होने से पहले ही रोक दिया जाता है। यह रामबाण इलाज का काम करता है। खासकर चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज़ और टेररिज्म से जुड़े कॉन्टेंट के मामलों में।

संवाद हो, लेकिन सीमा में

फेसबुक इस बाबत दावा करता है कि वह ज्यादा से ज्यादा इस बात की कोशिश करता है कि संवाद को जगह दे। पोस्ट होने दे, लेकिन दुनिया को इससे किसी तरह का नुकसान न हो, इसके लिए एक सीमा तय करनी पड़ती है। आमतौर पर लोग फेसबुक पर परेशान किए जाने पर अवहेलना और असहमति जताते हैं। FB का उद्देश्य रहता है कि उस प्लैटफॉर्म पर पोस्ट और वायरल होने वाला किसी प्रकार का भी कॉन्टेंट दुनिया को नुकसान न पहुंचाए।

मैनुअल्स के आधार पर कॉन्टेंट बढ़ाते हैं आगे

मॉडरेटर्स रोजाना कबाड़नुमा करोड़ों की संख्या में पोस्ट्स से गुजरते हैं। वह उन्हीं मैनुअल्स के आधार पर तय करते हैं कि किस चीज को अनदेखा करना है, किसे आगे बढ़ाना (एसकेलेट) है और क्या कॉन्टेंट डिलीट करना है। मॉडरेटर जब किसी पोस्ट को आगे बढ़ाते हैं, तो वह बाकी के सीनियर मैनेजर्स के पास भेजी जाती है। फिर वे तय करते हैं कि उसका क्या करना है। ऐसा सुसाइड और खुद को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में जरूरी हो जाता है। चूंकि फेसबुक के पास ऐसी टीम है, जो ऐसे लोगों की मदद करने वाली संस्थाओं और चैरिटी से संपर्क रखती है।

हाद पार करने पर बंद कर देते हैं अकाउंट

असंवेदनशील और क्रूर कॉमेंट्स के लिए मॉडरेटर्स के पास ‘क्रुएलिटी चेकप्वॉइंट’ का ऑप्शन होता है। अगर वे इसे चुनते हैं, तो पोस्ट करने वाले को उसे हटाने के लिए मैसेज भेजा जाता है। अगर फिर भी यूजर नहीं मानता है और आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट तो उसका अकाउंट अस्थाई तौर पर बंद कर दिया जाता है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

ये टीम भी है FB के पास

फाइल्स ये भी बताती हैं कि फेसबुक ने लॉ इनफोर्समेंट रिसपॉन्स टीम भी बनाई है। वह पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से मांगी गई मदद को हैंडल करती है।

दिक्कत के हल को ‘स्पेशल’ पेज

मॉडरेटर्स को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए कंपनी ने एक स्पेशल पेज भी डिजाइन कर रखा है, जिसका नाम सिंगल रिव्यू टूल (एसआरटी) है। एसआरटी स्क्रीन के दाहिनी तरफ एक मीन्यू होता है, जो मॉडरेटर्स को कॉन्टेंट फिल्टर करने में मदद करता है।

सेक्सुअल कॉन्टेंट के मामले में होती है चूक

यह मॉडरेशन प्रोसेस को और भी तेज कर देता है। कई बार कुछ पोस्ट्स मॉडरेटर्स का ध्यान भटका देते हैं। इसी के चक्कर में वे गलती कर बैठते हैं। ज्यादातर ऐसा सेक्सुअल कॉन्टेंट के मामले में होता है।

सेक्सुअल एक्टिविटी में फेसबुक पर ये सब है मान्य

– सेक्सुएलिटी का मॉडरेटेड कॉन्टेंट
.सेक्सुअल कॉन्टेंट (कपड़े पहने हुए)
.खुले आम चूमना
– नशे में धुत होकर सेक्सुअल एक्टिविटी करना (एडल्ट्स के लिए)

परफॉर्मेंस रिव्यू बढ़ाता है काम

वेबसाइट ने जो फेसबुक मैनुअल्स देखे हैं, वह नए वर्जन्स के साथ अपडेट हो चुके हैं। सबजेक्ट मैटर एक्सपर्ट्स (एसएमई) के मामले में पॉलिसी में कुछ छोट-मोटे बदलाव हैं। उनका काम मॉडरेटर्स को FB के नियमों में होने वाले सुधारों से जुड़ी सलाह देना होता है। वे मॉडरेटर्स का काम भी देखते हैं। उन्हें परफॉर्मेंस रिव्यू भी देना पड़ता है। यह उनके काम में तनाव बढ़ाता है। मॉडरेटर्स भी मानते हैं कि उन्हें इस वजह से चिंता और काम के बाद तनाव महसूस होता है।

‘दिमाग का दही कर देता है कॉन्टेंट’

फेसबुक भी जानता है कि उनका स्टाफ कैसी समस्याएं झेलता है। मॉडरेटर्स बताते हैं कि यह बेहद चुनौतीपूर्ण और कठिन काम है। बहुत सारा कॉन्टेंट दिमाग का दही कर देता है। हमारी पूरी कोशिश रहती है कि रिव्यूर्स पूरे कॉन्फिडेंस के साथ सही फैसला ले सकें, लेकिन स्वस्थ रहना भी हमारे लिए बड़ी चुनौती होती है।

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