Surya Grahan 2026: साल 2026 की पहली बड़ी खगोलीय घटना इस महीने आसमान में नज़र आने वाली है। अगले सप्ताह मंगलवार, 17 फरवरी को एक शानदार वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) लगने जा रहा है। इसे अक्सर ‘रिंग ऑफ फायर’ (Ring Of Fire) कहा जाता है।
यह वलयाकार सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका में दिखाई देगा जहां दो वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (scientific research stations) स्थित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह ग्रहण मंगलवार को 07:01 UTC (भारतीय समय अनुसार दोपहर 3.26 बजे) से शुरू होगा। बर्फीले महाद्वीप के अलावा, अर्जेंटीना और दक्षिण अफ्रीका के कुछ हिस्सों में सूर्योदय के बाद आंशिक ग्रहण दिखाई देने की संभावना है। हालांकि, भारत सहित दुनिया के अधिकांश हिस्सों में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
सूर्य ग्रहण से जुड़ी बड़ी बातें
-Solar Eclipse दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से शुरू होकर शाम 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। यह ग्रहण लगभग 4 घंटे 32 मिनट की अवधि का होगा। गौर करने वाली बात है कि इसी दिन चीनी चंद्र नव वर्ष (Chinese Lunar New Year) भी है।
-इस सूर्य ग्रहण का चरम 12:12 UTC (5:42 PM) पर होगा। और इस दौरान दुनियाभर के विभिन्न देशों में लोग आसमान में सूर्य को रिंग ऑफ फायर की तरह देख सकेंगे। हालांकि, 2 मिनट 20 सेकेंड तक पीक पर रहने के बाद ग्रहण कम होना शुरू हो जाएगा। और यह सूर्य ग्रहण 14:27 UTC (07:57 PM) पर खत्म हो जाएगा।
-2026 के बाद अगला वलयाकार सूर्य ग्रहण फरवरी 2027 में होने की संभावना है। इस दौरान ‘रिंग ऑफ फायर’ चिली, अर्जेंटीना, उरुग्वे, ब्राज़ील, कोट डी आइवर, घाना, टोगो, बेनिन और नाइजीरिया से दिखाई देने की उम्मीद है।
-सूर्य ग्रहण का मार्ग अंटार्कटिका के ऊपर लगभग 4,282 किलोमीटर तक फैलेगा और फिर डेविस सागर (Davis Sea) के पार जाकर खत्म हो जाएगा।
-कॉनकॉर्डिया स्टेशन (Concordia Station) जो महाद्वीप के अंदर स्थित एक फ्रेंच-इटालियन बेस है, वहां ग्रहण का वलयाकार फेज (annular phase) 11:46 UTC पर शुरू होगा और 2 मिनट 1 सेकंड तक चलेगा।
Surya grahan Livestreaming
अगले सप्ताह लगने वाले सूर्य ग्रहण को अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA द्वारा लाइवस्ट्रीम किए जाने की उम्मीद है। यानी जिन देशों में वलयाकार ग्रहण दिखाई नहीं देगा, वे लोग नासा के यूट्यूब चैनल पर जाकर लाइव देख पाएंगे।
वलयाकार सूर्य ग्रहण क्या है ( What is an annual solar eclipse?)
वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य के सामने से गुजरता है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण से अलग होता है। Total Solar Eclipse में पृथ्वी के कुछ हिस्सों में दिन के समय अंधेरा छा जाता है। हालांकि, पूर्ण सूर्य ग्रहण के उलट वलयाकार सूर्य ग्रहण में सूर्य पूरी तरह से ढका नहीं होता।
वलयाकार सूर्य ग्रहण में आमतौर पर चंद्रमा की आकृति के चारों ओर चमकदार ‘रिंग ऑफ फायर’ (आग के छल्ले जैसी) दिखाई देती है। ध्यान देने वाली बात है कि ‘Annular’ का मतलब होता है ‘वलयाकार’ (अंगूठी के आकार का) और इसे देखने वाले लोग ग्रहण के दोनों किनारों से इसे आंशिक रूप में देख पाते हैं। ध्यान रहे कि वलयाकार सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखना सुरक्षित नहीं होता।
सूर्य ग्रहण देखते समय बरतें सावधानियां
ग्रहण को देखने का एकमात्र सुरक्षित तरीका विशेष रूप से बनाए गए इक्लिप्स ग्लासेज हैं। वलयाकार सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य से थोड़ा छोटा दिखाई देता है और अपोजी (पृथ्वी से उसकी सबसे दूर की स्थिति) के पास होता है। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह आमतौर पर सूर्य की डिस्क के केंद्र के लगभग 96 प्रतिशत हिस्से को ढक लेता है जिससे ‘रिंग ऑफ फायर’ बनती है जो अधिकतम 2 मिनट 20 सेकंड तक रह सकती है।
2026 का दूसरा ग्रहण कब है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि सूर्य ग्रहण के साथ-साथ चंद्र ग्रहण भी लगता है। वलयाकार सूर्य ग्रहण के करीब दो सप्ताह बाद एक पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। और यह नॉर्थ अमेरिका समेत यूनाइटेड स्टेट्स में दिखाई देगा।
2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब है?
साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को होगा। यह एक Total Solar Eclipse होगा और भारत में दिखाई नहीं देगा।
2026 में कुल कितने ग्रहण लगेंगे?
2026 में कुल कितने ग्रहण होंगे? पहला सूर्य ग्रहण कब लगेगा? चंद्र ग्रहण कब-कब होंगे? ऐसे बहुत सारे सवाल फिलहाल लोगों के मन में हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि साल 2026 में कुल कितने ग्रहण लगेंगे। यहां पढ़ें पूरी खबर…
