अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने बुधवार (2 अप्रैल 2026) को Artemis II को अंतरिक्ष में रवाना किया। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री चांद की ओर रवाना हुए। 50 साल बाद लॉन्च किया गया यह पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन है। Apollo program के बाद पहला मानव मिशन है जो चंद्रमा की परिक्रमा करेगा। यह मिशन दो साल में चांद पर उतरने की अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ (नासा) की कोशिश की शुरुआत है।

यह मिशन Kennedy Space Center से लॉन्च किया गया और इसे अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के उस प्रयास में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। स्पेस एजेंसी इस मिशन के साथ अंतरिक्ष यात्रियों को फिर से चंद्रमा की सतह पर भेजना चाहती है।

लॉन्च से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Truth Social पर एक पोस्ट में कहा, ”50 साल में पहली बार अमेरिका फिर से चंद्रमा पर जा रहा है… कोई भी हमारे करीब नहीं है! अमेरिका सिर्फ प्रतिस्पर्धा नहीं करता, हम दबदबा बनाते हैं और पूरी दुनिया देख रही है।”

लॉन्च से पहले कई घंटों तक लॉन्च पैड पर देर तक तैयारियां की गईं। NASA के लाइव मिशन अपडेट के अनुसार, Artemis II की क्लोज़आउट टीम ने अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेससूट पहनाने, केबिन की जांच, Orion spacecraft में एंट्री, हैच बंद करने और अन्य अंतिम प्रक्रियाओं में मदद की। इसके बाद टीम ने लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39B को छोड़ दिया और अंतरिक्ष यान को लॉन्च कंट्रोलरों के हवाले कर दिया।

मिशन देखने के लिए उमड़ा हुजूम

यह मिशन दो साल में चांद पर उतरने की अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ (नासा) की कोशिश की शुरुआत है। अमेरिका के तीन और कनाडा के एक अंतरिक्ष यात्री को लेकर 32 मंजिला रॉकेट नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से रवाना हुआ जहां इस नए युग की शुरुआत देखने के लिए दसियों हजार लोग एकत्र हुए थे। आसपास की सड़कें और समुद्र तट भी लोगों से खचाखच भर गए जिससे 1960 और 70 के दशक के अपोलो चंद्र अभियानों की याद ताजा हो गई। यह चांद पर स्थायी मौजूदगी स्थापित करने की दिशा में नासा का अब तक का सबसे बड़ा कदम है।

आर्टेमिस 2 ने फ्लोरिडा के उसी प्रक्षेपण स्थल से उड़ान भरी जहां से बहुत पहले अपोलो के अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजा गया था। उनमें से जो चंद लोग अब भी जीवित हैं, उन्होंने भी स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट से उड़ान भर रही नई पीढ़ी का उत्साह बढ़ाया।

कौन कर रहा आर्टेमिस-2 की अगुवाई

आर्टेमिस-2 के कमांडर रीड वाइजमैन ने ‘चलो चांद पर चलते हैं’ के घोष के साथ अंतरिक्ष की ओर इस अभियान की अगुवाई की। उनके साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन थे। यह चंद्रमा के लिए रवाना हुआ अब तक का सबसे विविध दल है जिसके तहत पहली बार कोई महिला, गैर-श्वेत समुदाय का कोई व्यक्ति और कोई गैर-अमेरिकी नागरिक नासा के नए ओरियन कैप्सूल में सवार हुए। अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने परिवारों को अलविदा कहते समय हाथों से दिल का आकार बनाया और प्रक्षेपण स्थल तक जाने के लिए एस्ट्रोवैन में सवार हुए जहां उनका अंतरिक्षयान उनका इंतजार कर रहा था।

अंतरिक्ष यात्री अपनी 10 दिवसीय परीक्षण उड़ान के पहले 25 घंटे पृथ्वी के करीब ही रहेंगे, पृथ्वी के चारों ओर कक्षा में कैप्सूल की जांच करेंगे और फिर मुख्य इंजन को चालू करेंगे जो उन्हें चंद्रमा तक ले जाएगा। वे न तो चंद्रमा पर रुकेंगे और न ही उसकी परिक्रमा करेंगे, जैसा कि अपोलो 8 के पहले चंद्रयात्रियों ने 1968 की क्रिसमस की पूर्व संध्या पर किया था। उनका कैप्सूल चंद्रमा के पास से गुजरेगा और उससे 6,400 किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद यू-टर्न लेकर सीधे प्रशांत महासागर में उतरेगा। इसी के साथ वे सबसे दूर तक जाने वाले इंसान बन जाएंगे।

तीन साल पहले आर्टेमिस 1 का प्रक्षेपण

आर्टेमिस 1 के प्रक्षेपण के बाद से तीन साल से अधिक समय बीत चुका है। उस समय आर्टेमिस 1 कैप्सूल में कोई भी मनुष्य सवार नहीं था। उसमें जीवन रक्षक उपकरण और पानी की व्यवस्था करने वाला यंत्र एवं शौचालय जैसी अन्य आवश्यक सुविधाएं मौजूद नहीं थीं। ये प्रणालियां आर्टेमिस 2 के जरिए अंतरिक्ष में पहली बार इस्तेमाल हो रही हैं, जिससे जोखिम बढ़ गया है। यही वजह है कि नासा वाइजमैन और उनके दल को चांद की ओर चार दिन की यात्रा और चार दिन की वापसी यात्रा पर भेजने से पहले पूरा एक दिन इंतजार कर रहा है।

समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ