भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने नेविगेशन सैटेलाइट NVS-02 को जनवरी 2025 में निर्धारित कक्षा (orbit) में नहीं पहुंचा सका। अब करीब एक साल बाद इसकी वजह सामने आई है। मिशन की असफलता की जांच कर रही समिति के अनुसार, एक टूटा हुआ इलेक्ट्रिकल सर्किट इस मिशन के फेल होने के पीछे संभावित कारण हो सकता है।
NVS-02 उपग्रह को 29 जनवरी को GSLV-F15 रॉकेट के जरिए एक दीर्घवृत्तीय ट्रांसफर कक्षा (elliptical transfer orbit) में स्थापित किया गया था। इसरो का यह 100वां प्रक्षेपण था। हालांकि, बाद में इस सैटेलाइट को उसकी निर्धारित वृत्ताकार कक्षा (circular orbit) में डालने के लिए किए गए तकनीकी गतिविधियां असफल रहीं। इसके चलते यह उपग्रह अपनी मूल नेविगेशन और सैटेलाइट-बेस्ड पोजिशनिंग के उद्देश्य के लिए इस्तेमाल में नहीं लाया जा सका।
यद्यपि उपग्रह के सौर पैनलों को तैनात करना और ऊर्जा उत्पादन के लिए उसकी स्थिति ठीक करना जैसी कई स्वायत्त गतिविधियां योजना के अनुसार पूरी की गईं, लेकिन अंतिम कक्षा में उपग्रह डालने वाला इंजन विफल रहा।
उपग्रह के सौर पैनल सही तरह से खोल दिए गए। ऊर्जा बनाने के लिए उसकी दिशा भी ठीक कर दी गई। ये सभी काम योजना के अनुसार पूरे हुए। लेकिन उसे अंतिम कक्षा में पहुंचाने वाला इंजन काम नहीं कर पाया।
‘पाइरो वाल्व तक सिग्नल नहीं पहुंचा’ बना मुख्य कारण: ISRO
ISRO ने बताया कि सिमुलेशन डेटा के गहन विश्लेषण के बाद मामले की समीक्षा के लिए गठित शीर्ष समिति ने निष्कर्ष निकाला कि विफलता का मुख्य कारण इंजन की ऑक्सीडाइज़र लाइन के पाइरो वाल्व तक सिग्नल का ना पहुंचना था। इसका मतलब है कि इंजन को इग्नाइट नहीं किया जा सका।
समिति का मानना है कि यह समस्या संभवतः कनेक्टर के कम से कम एक संपर्क के अलग हो जाने के कारण हुई। इससे सिग्नल पहंचाने वाला सर्किट पूरा नहीं हो सका।
अंतरिक्ष एजेंसी ने एक बयान में कहा, “समिति ने भविष्य के मिशनों में पाइरो सिस्टम के ऑपरेशन की अतिरिक्त सुरक्षा (redundancy) और विश्वसनीयता बढ़ाने के उद्देश्य से कई सिफारिशें दी हैं।”
इन सिफारिशों को पिछले साल नवंबर में प्रक्षेपित CMS-03 उपग्रह मिशन में लागू किया गया। जिसमें सभी पाइरो सिस्टम अपेक्षा के अनुसार काम करते हुए उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित करने में सफल रहे।
इस बीच, अंतरिक्ष एजेंसी ने इस साल जनवरी में विफल रहे पीएसएलवी रॉकेट के प्रक्षेपण में आई गड़बड़ियों की जांच के लिए भी एक समिति का गठन किया है।
इसरो का ‘वर्कहॉर्स’ कहे जाने वाला रॉकेट पिछले साल मई और इस साल जनवरी में लगातार दो बार विफल रहा। दोनों ही मामलों में रॉकेट के तीसरे चरण में आई गड़बड़ी के कारण उपग्रह अपनी निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच सके।
हालांकि समिति अभी इन दोनों घटनाओं की जांच कर रही है। केंद्रीय अंतरिक्ष राज्य मंत्री Jitendra Singh ने कहा कि दोनों विफलताएं अलग-अलग कारणों से हुईं।
