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चीनी ऐप से देश को खतरा: सैनिकों को आदेश- हटा लें UC Browser, UC News, Truecaller

अधिकारियों और जवानों को जारी की गई एडवाइजरी से पता चलता है कि विदेशी खुफिया एजेंसियां, विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान की, मोबाइल ऐप से डेटा चुराने का काम कर रही थीं।

विदेशी खुफिया एजेंसियां मोबाइल ऐप को ब्रेक करके डेटा चोरी करने का काम कर रही थीं।

सीमा पार से जासूसी की अटकलों के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने चीनी ऐप को देश के लिए खतरा बताया है। इन ऐप्स के जरिए चीन भारतीय सेना के अफसरों और जवानों के फोन से डेटा चुरा रहा है। चीनी सीमा के बॉर्डर पर तैनात जवानों से कहा गया है कि वह अपने स्मार्टफोन से वीचैट, ट्रूकॉलर, विबो, यूसी ब्राउजर और यूसी न्यूज को हटा दें। इसके बाद अपना फोन फॉरमेट कर दें। अधिकारियों का कहना है कि अधिकारियों और जवानों को जारी की गई एडवाइजरी से पता चलता है कि विदेशी खुफिया एजेंसियां, विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान की, मोबाइल ऐप से डेटा चुराने का काम कर रहे थे। यह कंपनियां मोबाइल ऐप को ब्रेक करके डेटा चोरी करने का काम कर रही थीं।

सेना के साथ साथ दूसरी सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स जैसे इंडो-ताइबान बॉर्डर पुलिस लद्दाक से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 4,057 किलोमीटर लंबी एलएसी पर तैनात है। आर्म्ड फोर्स खुद भी ऐसे निर्देश जारी करते रहते हैं। इसमें सभी कर्मियों को स्मार्टफोन और कंप्यूटर में खतरनाक  सॉफ्टवेयर ऐप्स से बचने के लिए कहा जाता है ताकि जासूसी के प्रयासों के बीच साइबर सुरक्षा बनाए रखने को सुनिश्चित किया जा सके। अधिकारियों ने कहा है कि कर्मियों से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने फोन की सुरक्षा बनाए रखेंगे साथ ही कंप्यूटर की सुरक्षा का भी ध्यान रखेंगे। यह निर्देश खासकर उनके लिए हैं जो चीन से लगे बॉर्डर पर तैनात हैं।

हाल ही में गूगल ने प्ले स्टोर से UC ब्राउजर एप को अस्थाई तौर पर हटा दिया था। बाद में इसे फिर उपलब्ध करा दिया गया था। इसके साथ ही UC ब्राउजर पर डेटा सुरक्षा उल्लंघन का आरोप भी लगाया था। ऐसे में चीन की चोरी की इस नई चाल से सचेत रहने की जरूरत है। यूसी ब्राउजर एप्लीकेशन कुछ दिन पहले ही भारत सरकार की नजरों में आया था, नरेंद्र मोदी सरकार ने शंका जाहिर की थी कि यूसी द्वारा चीन को जानकारियां भेजी जा रही हैं। ऐसा कहा गया था कि फोन में से इस एप्लीकेशन को हटाने के बाद भी यूसी यूजर्स के डेटा को पा सकता है। फिलहाल तो हैदराबाद की एक सरकारी लैब (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग) में इस मामले की जांच की जा रही है।

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