Personal Data Protection Bill 2019: क्या हैं इससे जुड़े प्रावधान?

डाटा कंपनियों को डर है कि एक राष्ट्र द्वारा ऐसा कानून पारित होने से अन्य राष्ट्रों में ऐसी मांगें उठ सकती हैं।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

आज के डिजिटल दौर में जब हर इंसान से जुड़ी कोई न कोई जानकारी किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद है तो ये बात कहीं न कहीं सही लगती है कि आज के दौर में डाटा ही सोना है। डाटा से जुड़े पिछले कई विवादों के बीच पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल 2019 (Personal Data Protection Bill 2019) लाया गया है। इसका ड्राफ्ट बीएन श्रीकृष्णा कमेटी ने तैयार किया है। इसमें चार जरूरी परिभाषाएं हैं:

1 – Data Principal – यूजर जिसका डाटा इस्तेमाल हो रहा है।
2 – Data Fiduciary – वह कंपनी जिसके द्वारा डाटा स्टोर और ट्रांसफर किया जा रहा है।
3 – Data Transfer – एक यूजर से दूसरे यूजर तक डाटा का ट्रांसफर।
4 – Data Localisation – किसी निश्चित सीमा के अंदर ही डाटा को स्टोर या ट्रांसफर करना।

इस बिल द्वारा डाटा का वर्गीकरण तीन हिस्सों में किया गया है:

1- Personal Data – ऐसी निजी सूचनाएं जो व्यक्ति विशेष से ही संबंधित हों, मसलन व्यक्ति का नाम, पता, उम्र और फोटो वगैरह।
2- Sensitive Personal Data – ऐसी सूचनाएं जो निजी होने के साथ संवेदनशील भी हों और हर किसी को बताना उचित न हो जैसे कि जाति, वर्ग, ट्रांसजेंडर स्टेटस व स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी आदि।
3- Critical Personal Data – ऐसी सूचनाएं जो निजी हो सकती हैं, लेकिन सरकार के लिए आवश्यक हों।

बिल के प्रावधानः

इस बिल के कुछ निम्न लिखित प्रावधान हैं:

1- संवेदनशील निजी सूचनाएं देश की सीमा के बाहर बिना डेटा प्रोटेक्शन ऑफिसर (Data Protection Officer) की इजाजत के नहीं भेजी जा सकेंगी।
2- कुछ अपवाद जिसमें बिना व्यक्ति की सहमति के डाटा का इस्तेमाल किया जा सकता है, वो है व्हिस्ल ब्लोइंग, गैरकानूनी गतिविधियां, कानून और व्यवस्था बनाए रखने इत्यादि।
3- एक डेटा प्रोटेक्शन ऑफिसर (Data Protection Officer) की नियुक्ति कंपनी द्वारा की जाए जो कि केंद्र द्वारा गठित डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी (Data Protection Authority) के साथ काम करे।
4- शेष अन्य मामलों में आपने डाटा का इस्तेमाल और ट्रांसफर का अधिकार व्यक्ति के स्वयं के हाथों में होगा।
5- किसी भी प्रकार का उल्लंघन छोटे मामलों में टर्नओवर के दो फीसदी या पांच करोड़ रुपए और बड़े मामलों में चार प्रतिशत या 15 करोड़ रुपए के जुर्माने द्वारा दंड प्रक्रिया को आकर्षित करेगा।
6- डाटा कंपनियों को डर है कि एक राष्ट्र द्वारा ऐसा कानून पारित होने से अन्य राष्ट्रों में ऐसी मांगें उठ सकती हैं।

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