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नए स्मार्टफोन्स में पहले से ही इंस्टॉल आ रहे वायरस, कहीं आपके स्मार्टफोन के साथ भी तो नहीं आया वायरस

अगर आपने नया स्मार्टफोन खरीदा है तो उसमें पहले से ही एेसा वायरस हो सकता है जो आपकी जानकारी चुराकर हैकर्स को भेज रहा है।

कई कंपनियों के 30 से ज्यादा एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स और टैब्स में एक ऐसे वाइरस की पहचान की गई है।

ज्यादातर लोग एंड्रॉयड स्मार्टफोन या टैब का ही इस्तेमाल करते हैं लेकिन उसकी सुरक्षा को लेकर यूजर्स को सतर्क रहना होगा। अगर आप भी एंड्रॉयड स्मार्टफोन या टैब इस्तेमाल करते हैं तो आपके लिए यह बहुत महत्वपूर्ण खबर है। आपके डिवाइस में ऐसा ऐप हो सकता है जो चुपके से आपकी जानकारी चुराकर हैकर्स को भेज रहा हो। चौंकाने वाली बात यह है ऐसा ऐप आपके स्मार्टफोन्स में प्री-इंस्टॉल हो सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि यह मैलवेयर (वाइरस) नए फोन को पहली बार स्विच ऑन करने से पहले से ही मौजूद हो सकता है। विभिन्न कंपनियों के 30 से ज्यादा एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स और टैब्स में एक ऐसे वाइरस की पहचान की गई है जो पहले से ही इंस्टॉल हुआ आता है। एक साइबर सिक्यॉरिटी कंपनी के मुताबिक ये वायरस इन डिवाइसेज में तभी से थे, जबसे यूजर्स ने उन्हें स्विच ऑन भी नहीं किया था।

चेक पॉइंट ने अपने दो कॉर्पोरेट क्लाइंट्स द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 36 हैंडसेट्स में यह वायरस पाया। इन क्लाइंट्स में से एक टेलिकम्यूनिकेशन कंपनी है और दूसरी मल्टीनैशनल टेक्नोलॉजी कंपनी। सैमसंग, एलजी और गूगल समेत कई बड़े ब्रैंड्स के स्मार्टफोन्स को इस वायरस से इन्फेक्टेड पाया गया है। चेक पॉइंट ने अपने ब्लॉग में लिखा है, ‘हमने पाया है कि डिवाइसेज में वायरस तभी से था, जब से यूजर्स के पास पहुंचे तक नहीं थे। वाइरस वाले ये ऐप्स वेंडर द्वारा दिए गए ऑफिशल ROM में शामिल नहीं थे मगर सप्लाई चेन के बीच में कहीं पर ऐड हुए हैं।

चेक पॉइंट ने जिन संदिग्ध ऐप्स की पहचान की है वे यूजर्स की इन्फर्मेशन चुराते हैं। मगर इनमें से एक फोन में तो Slocker नाम का रैनसमवेयर था। रैनसमवेयर उन ऐप्स या सॉफ्टवेयर्स को कहा जाता है जिनकी मदद से हैकर्स लोगों के डिवाइसेज को लॉक कर देते हैं और दोबारा ऐक्सेस देने के बदले पैसे मांगते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, पहले से ही इंस्टॉल हुए मैलवेयर्स उन यूजर्स की सिक्यॉरिटी को भी खतरे में डाल देते हैं जो बेहद सावधान रहते हैं। जिन यूजर्स को पहले ही इंस्टॉल्ड मैलवेयर वाला डिवाइस मिलता है, उन्हें इसका पता ही नहीं चलता।ब्लॉग में लिखा गया है कि नए फोन लेने के बाद सबसे पहले मैलवेयर स्कैनर को डाउनलोड करके रन करके यूजर्स खुद को बचा सकते हैं। ​

चेक पॉइंट ने इन डिवाइसों में बताया है एेसा वायरस- सेमसंग गैलेक्सी नोट 2, नोट 3, नोट 4, नोट 5, नोट 8, नोट एेज,  सेमसंग गैलेक्सी  S7, S4, A5,  सेमसंग गैलेक्सी टैब 2, टैब S2, LG G4,  ZTE x500, Oppo N3, वीवो X6 plus, शियोमी Mi 4i,  नेक्सस 5, 5X, असुस जेनफोन 2, लेनोवो S90, ओप्पो R7 प्लस, शियोमी रेडमी, रेडमी A850। अगर आपके पास और कोई ऐंड्रॉयड फोन है, तब भी आप उसे स्कैन कर लें। हो सकता है कि उसमें भी कोई मैलवेयर छिपा हो। नया स्मार्टफोन लेने पर भी उसे ऐंटीवाइरस ऐप से स्कैन कर लेना चाहिए।

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