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Tech Update 2019: जुकरबर्ग की बड़ी रणनीति, पूरी दुनिया में चले ‘फेसबुक का सिक्का’

फेसबुक के इस डिजिटल करेंसी लाने की खबरों के बीच ही ये भी आशंका जानकारों के बीच आने लगी है कि क्या ये मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा जरिया बन जाएगा। कंपनी को इस दिशा में ठोस नियम व शर्तें बनानी होंगी, तभी उनका ये प्रोजेक्ट सफल होगा।

Author नई दिल्ली | June 3, 2019 11:34 AM
फेसबुक संस्थापक मार्क जुकरबर्ग बहुत जल्द डिजिटल करेंसी की दुनिया में आने की तैयारी कर रहे हैं। फोटो- जुकरबर्ग के सोशल अकाउंट से

फेसबुक क्या करेंसी मार्केट में उतरने की योजना बना रही है? क्या पूरी दुनिया को सोशल मीडिया से जोड़ने वाली कंपनी अब डिजिटल करेंसी से छाने की योजना बना रही है? इस तरह के सवाल पूरी सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं। इस खबर के आने की वजह भी है। दरअसल डिजिटल करेंसी लाने की पूरी तैयारी के तहत फेसबुक ने अमेरिका की टॉप अथॉरिटी से बात करना शुरू कर दिया है।

फाइनेंशियल टाइम्स की खबर के अनुसार, दुनिया का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफार्म अब जमीनी स्तर पर पेमेंट की दुनिया में आने की तैयारी शुरू कर चुका है। हालांकि अमेरिकी अधिकारी क्रिस्टोफर गैनकार्लो ने कहा कि अभी ये बहुत शुरुआती स्तर है फेसबुक के साथ बातचीत को लेकर। हमें देखना होगा कि डिजिटल क्वाइन के लिए फेसबुक को इजाजत देना अमेरिका के नियमों के तहत आता है या नहीं। साथ ही फेसबुक को डिजिटल क्वाइन की मंजूरी देने के फायदे और नुकसान दोनों देखने होंगे।

आपको बता दें कि फेसबुक पहले ही डिजिल पेमेंट्स नेटवर्क बनाने की दिशा में काम शुरू कर चुकी है। इसके तहत यूजर न सिर्फ दूसरे यूजर को पैसे ट्रांसफर कर सकेगा बल्कि फेसबुक के जरिए खरीदारी भी कर सकेगा। कंपनी इस योजना को व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर भी एक साथ शुरू करेगी। इस योजना के अतिरिक्त फेसबुक अपना स्टेबल क्वाइन या डिजिटल क्वाइन भी लॉन्च करना चाहती है।

फाइनेंसियल टाइम्स ने ये भी जानकारी दी है कि पिछले दिनों बैंक आॅफ इंग्लैंड के गवर्नर मार्क कार्ने ने भी फेसबुक से उनकी भविष्य की संभावी योजनाओं पर बड़ी मीटिंग की थी। हालांकि इस बारे में पूरी विस्तृत जानकारी देने से बैंक अधिकारियों ने इनकार कर दिया।

क्या ग्लोबल क्वाइन बनाने की दिशा में है फेसबुक
बिटक्वाइन जैसी तमाम डिजिटल करेंसी पहले ही पूरी दुनिया में छाईं हुईं हैं। डिजिटल करेंसी का काम दरअसल भविष्य की संभावनाओं के आधार पर होता है न कि बाजार की नकदीकरण पर। इसलिए फेसबुक किस तरह की डिजिटल करेंसी की योजना के साथ ग्लोबल मार्केट में आना चाहती है ये अभी कुछ भी कहना मुश्किल है। अनुमान है कि फेसबुक क्वाइन का अमेरिकी डॉलर से कोई लेना देना नहीं होगा बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए एक यूनीक ग्लोबल क्वाइन होगा।

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कहीं मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा न दे
अमेरिकी नियामकों को एक अंदेशा ये भी है कि अगर फेसबुक डिजिटल क्वाइन के साथ ग्लोबल मार्केट में आता है तो कहीं ये मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा जरिया न बन जाए। इस खतरे को देखते हुए इसकी मंजूरी से पहले सभी नियम व शर्तों को ठीक से समझना होगा। अगर इंडिया की बात करें तो यहां क्रिप्टो करेंसी या डिजिटल करेंसी को वैध नहीं माना गया है।

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