मान्या : सब्जियों के छिलकों से कागज बना रही बच्ची

प्‍याज, लहसुन, आलू, मटर और मक्का के छिलकों से क्या कागज बनाए जा सकते हैं।

मान्‍या हर्ष। फाइल फोटो।

प्‍याज, लहसुन, आलू, मटर और मक्का के छिलकों से क्या कागज बनाए जा सकते हैं। यह साकार कर दिखाया है 11 साल की बच्ची मान्या हर्ष ने। मान्या हर दिन अपनी रसोई के कचरे को पर्यावरण-हितैषी कागज में तब्दील (री-साइकिल) कर रही है। इस छोटी बच्ची ने इस उम्र में वो कारनामा कर दिखाया है जो कभी कोई सोच भी नहीं सकता।

भारत में औसतन हर घर में हर दिन लगभग 300 ग्राम सब्जियों का कचरा निकलता है। अगर इस कचरे का सही इस्तेमाल किया जाए तो हम चमत्कार कर सकते हैं। 6ठीं कक्षा में पढ़ने वाली बंगलुरू की रहने वाली मान्या ने ये चमत्कार कर दिखाया है। उन्होंने इन कचरों को कागज में तब्दील किया है।
अपनी दादी के घर की हरियाली के बीच पली-बढ़ी मान्या को हमेशा प्रकृति से प्यार रहा है। जैसे ही मान्या ने शहर में कचरे की बढ़ती समस्या को देखा, इसके लिए कुछ करने का सोचा। इसके लिए मान्या ने एक अनूठी पहल की है। वह प्याज, लहसुन, मटर, आलू, मक्का, नारियल इन सबके छिलकों से पर्यावरण हितैषी कागज तैयार कर रही है।

मान्या कहती है, रसोई के कचरे से कागज बनाने की पहल को बढ़ाया जाता है तो यह समाज के लिए एक बड़ी सेवा हो सकती है। कागज बनाने के लिए हर साल लाखों पेड़ काटे जाते हैं। यदि सब्जियों के कचरे से कागज बनाने की इस पहल को सभी बच्चों के लिए घरेलू गतिविधि बना दिया जाए, तो हम पेड़ों को काटने से बनने वाले कागजों के उपयोग को कम करने में सक्षम हो सकते हैं। यह विचार तो बस एक शुरुआत है, इसे प्रोत्साहित किया जाए तो यह एक बहुत बड़ी क्रांति बन सकती है।

मान्या हर जन्मदिन पर पौधा लगाकर लोगों को संदेश देने की कोशिश करती है। इसे बनाने के लिए मान्या पहले सब्जियों और फलों के छिलको को इकट्ठा करती है। फिर उन्हें पानी में उबालती हैं। उबालने के बाद सभी का पेस्ट बनाती हैं। पेस्ट बनाने के बाद मान्या उसे एक फ्लैट कंटेनर या सरफेस पर रख देती हैं। पेस्ट से जो भी अतिरिक्त पानी होता है, उसे छानने के बाद सूखने के लिए छोड़ देती हैं। इस तरह छिलको से ईको-फ्रेंडली पेपर तैयार हो जाता है। आप इन पेपर पर लिख सकते हैं, आर्ट-क्राफ्ट कर सकते हैं, पेंट कर सकते हैं, और उसे मोड़ भी सकते हैं।

आठ साल की उम्र में मान्या ने स्थानीय समुदाय में बच्चों के वॉकथॉन के लिए उन्हें बुलाकर पानी बचाने के लिए जागरूक करने का बीड़ा उठाया। अपने पिता के साथ मिलकर मान्या ने अपने क्षेत्र को साफ करने के लिए एक मिशन शुरू किया। वह लोगों से कूड़ेदान का उपयोग करने और झील में कचरा नहीं फेंकने का आग्रह करती हैं।

हाल में संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएन वाटर ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर मान्या के प्रयासों की सराहना की है। उन्हें वाटर हीरो से भी सम्मानित किया गया है। जल संरक्षण के लिए जागरुकता फैलाने में उनके योगदान के लिए मान्या को जल शक्ति मंत्रालय द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। मान्या ने पर्यावरण को लेकर पांच किताबें भी लिखी हैं।

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