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मैग्लेव : जल्द आएगी भारतीय बुलेट ट्रेन, स्पीड होगी 1200 किलोमीटर प्रति घंटा

यह ट्रेन हवा से बातें करेगी, यह 600 से लेकर 1200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी। औसत रफ्तार आठ सौ किलोमीटर प्रति घंटे की होगी।

Author July 9, 2019 3:39 AM
जापान की बुलेट ट्रेन

भारत में गत वर्षों से तेज गति से चलने वाली (हाई स्पीड) ट्रेनों को लेकर खूब चर्चाएं हो रही हैं। ट्रेन और ट्रेन की स्पीड को लेकर देश में लगातार शोध हो रहे हैं। इसी कड़ी में मैग्लेव ट्रेन का नाम जुड़ गया है। यह ट्रेन हवा से बातें करेगी, यह 600 से लेकर 1200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी। औसत रफ्तार आठ सौ किलोमीटर प्रति घंटे की होगी।

इंदौर स्थित राजा रामन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (आरआरसीएटी) के वैज्ञानिकों ने हवा में चलने वाली मैग्लेव ट्रेन का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है। वैसे तो यह अनुसंधान केंद्र लेजर तकनीक और परमाणु ऊर्जा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों पर शोध और विकास के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां के वैज्ञानिक चुंबकीय शक्ति के साथ साथ कई नई तकनीक पर भी शोध करते रहे हैं। हाल ही में यहां के वैज्ञानिकों ने बुलेट ट्रेन से भी तेज रफ्तार से चलने वाली मैग्लेव ट्रेन के मॉडल का सफल परीक्षण किया है। जो 600 से लेकर 1200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है। ट्रेन की सबसे खास बात यह है कि यह ट्रेन पटरी से करीब 2 सेंटीमीटर ऊपर हवा में चलती नजर आएगी। इसलिए कहा जाता है कि यह ट्रेन हवा में चलती है।

दरअसल यह ट्रेन मैग्नेटिक फील्ड (चुंबकीय प्रणाली) पर चलती है। फिलहाल यह तकनीक जापान और चीन के पास है और उसी आधार पर भारतीय वैज्ञानिकों ने ट्रेन का निर्माण किया है। इस ट्रेन में ईंधन के रूप में नाइट्रोजन और ऊर्जा के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है। सुपर कंडक्टर से लिक्विड नाइट्रोजनयुक्त कूलर सिस्टम द्वारा चलने वाली यह ट्रेन पूरी तरह से इकोफ्रेंडली बनाई गई है।

वैज्ञानिक आरएनएस शिंदे के मुताबिक, करीब 50 वैज्ञानिकों, तकनीशियनों की मदद से इस ट्रेन का प्रोटोटाइप तैयार किया गया है। इस प्रोटोटाइप को बनाने में भी वैज्ञानिकों को लगभग 10 साल का समय लगा है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल पिछले दो साल से पूरी तरह से तैयार है। इस ट्रेन में टक्कर और दुर्घटना होने की संभावना नहीं है। ट्रेनों को लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कि हम हर दिन शोध कर रहे हैं और इसकी रफ्तार को 600 से बढ़ाकर 800 और फिर 1200 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं। ट्रेन के प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण किया गया है। पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक से बनाई ये मैग्लेव ट्रेन की तकनीक जापान और चीन की तकनीक के बराबर है। हालांकि सरकार इस तकनीक का किस तरह इस्तेमाल करगी, ये आने वाले सालों में पता चल सकेगा।

वैज्ञानिक शिंदे ने कहा कि विश्व में अगर हमें विकसित राष्ट्र से आगे बढ़ना है तो अपनी वैज्ञानिक तकनीक को और मजबूत करना होगा और हमारे वैज्ञानिक इस ओर काम कर रहे हैं। भारत में प्रदूषण और जनसंख्या दोनों बड़ी समस्या है ऐसे में मैग्लेव ट्रेन एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है। शिंदे ने कहा कि आने वाले समय में जब पेट्रोल और डीजल का भंडार खत्म हो रहा है ऐसे में यह ट्रेन एक क्रांति साबित हो सकती है। वैज्ञानिकों ने इस ट्रेन की कई खूबियां बताई हैं लेकिन इसे बनाने में कितना खर्चा आएगा इसकी जानकारी नहीं दी है।

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