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Kids Coding Languages की 50वीं सालगिरह पर Google ने बनाया पहली बार ऐसा Doodle, जानिए क्या है ये

Kids Coding Languages Doodle: यह एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जिसे मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में लाइफेलॉन्ग किंडरगार्टन ग्रुप द्वारा बनाया गया है।

Kids Coding Languages: लोगो बच्चों को टर्टल प्रोग्राम और मूवमेंट्स कंट्रोल करने की इजाजत देती है।

Kids Coding Languages: गूगल आज (4 दिसंबर) चिल्ड्रेन प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की पचासवीं सालगिरह मना रहा है। इस अवसर पर गूगल ने पहली बार कोडिंग डूडल बनाए हैं। आज का गूगल डूडल विंडोज से पहले के नॉस्टेल्जिया के नाम है। एलिस, स्क्रैच और गेम मेकर जैसी कोडिंग लैंगवेज हैं जो आज भी बच्चों को कोडिंग सिखाने में मदद करती हैं, हालांकि आज भारत में कंप्यूटर चला रही पीढ़ी में से ज्यादातर ने उस दौर को शायद ही जिया हो। मगर आज के गूगल डूडल के जरिए आप कंप्यूटर के एक दौर की झलक ले सकते हैं। यूजर्स स्क्रैच को यूज करके ऐसा कर सकते हैं, यह एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जिसे मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में लाइफेलॉन्ग किंडरगार्टन ग्रुप द्वारा बनाया गया है।

आज से कंप्यूटर साइंस एजुकेशन वीक की शुरुआत है, जो 10 दिसंबर तक जारी रहेगी। इस गूगल डूडल को तीन टीमों ने मिलकर बनाया है। इनमें गूगल डूडल टीम, गूगल ब्लॉकली टीम और एमआईटी स्क्रैच के रिसर्चर्स शामिल हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है जब यह दुनिया भर के लाखों बच्चों और बड़ों को कोडिंग में अपना हाथ आजमाने का मौका दे रहे हैं।

1960 के दशक में पहली बच्चों के लिए कोडिंग लैंग्वेज लोगो आई थी तो लोग इसे असंभव और बिना मतलब का मानते थे। इस लैग्वेज को सेमोर पेपर्ट और एमआईटी के रिसर्चर्स ने डिवेलप और डिजाइन किया था। लोगो बच्चों को टर्टल प्रोग्राम और मूवमेंट्स कंट्रोल करने की इजाजत देती है। साथ ही यह गणित और साइंस में आइडिया एक्सप्लोर करने का भी मौका देती है।

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