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इजराइल : क्यों चर्चा में है ‘आयरन डोम’ मिसाइल प्रणाली

अमेरिका, रूस की तरह ही इजराइल भी मिसाइल रक्षा प्रणाली में महारत हासिल कर चुका है। इजराइल ने कई साल से अमेरिका की मदद से अपनी रक्षा प्रणाली को बहुत मजबूत कर लिया है। जहां तक भारत की बात है तो भारत रूस से एस-400 वायु रक्षा प्रणाली खरीद रहा है। एस-400 भी रॉकेट, मिसाइल और क्रूज मिसाइलों के हमले से बचाता है। इसकी रेंज आयरन डोम से ज्यादा है। भारत इजराइल की तुलना में क्षेत्रफल के लिहाज से बड़ा देश है। इस कारण भारत के लिए एस-400 को मुफीद बताया जा रहा है।

मिसाइल रक्षा प्रणाली ‘आयरन डोम’ को दो कंपनियों- ‘राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम’ और ‘इजराइल एअरोस्पेस इंडस्ट्री’ ने मिलकर बनाया है।

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। दोनों के बीच हवाई हमले हो रहे हैं। इन हमलों में अब तक 70 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 300 से ज्यादा घायल हुए हैं। 2014 के बाद ये इजराइल पर सबसे बड़ा रॉकेट हमला है। इजराइल पर अब तक एक हजार से ज्यादा मिसाइलें दागी जा चुकी हैं। इनमें से 90 फीसद को इजराइली मिसाइल रक्षा प्रणाली ‘आयरन डोम’ ने नष्ट कर दिया है।

मिसाइल रक्षा प्रणाली ‘आयरन डोम’ को दो कंपनियों- ‘राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम’ और ‘इजराइल एअरोस्पेस इंडस्ट्री’ ने मिलकर बनाया है। 2006 के इजराइल-लेबनान युद्ध के दौरान हिजबुल्लाह ने इजराइल पर हजारों रॉकेट दागे थे। इसके बाद इजराइल ने नया एडवांस एअर डिफेंस सिस्टम बनाने की घोषणा की, जो उसके लोगों और शहरों की रक्षा करे। इसी के तहत इजराइल ने आयरन डोम को विकसित किया। 2011 में इसे लगाया गया। इस प्रणाली को बनाने में अमेरिका ने इजराइल को तकनीकी और आर्थिक मदद दी है। इस अल्प दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली, वायु रक्षा प्रणाली में रडार और तामिर इंटरसेप्टर मिसाइल लगाई गई हैं, जो किसी भी रॉकेट या मिसाइल को खोजकर उसे रास्ते में ही ध्वस्त कर देती है। वहां मध्यम दूरी और सुदूरवर्ती हमलों के लिए दो अलग प्रणालियां हैं, जिन्हें डेविड्स स्लिंग और ऐरो कहा जाता है।

इससे रॉकेट, आर्टिलरी और मोर्टार के साथ-साथ विमान, हेलिकॉप्टर और मानव रहित हवाई यानों का मुकाबला किया जा सकता है।
जब दुश्मन रॉकेट दागता है तो आयरन डोम रडार प्रणाली सक्रिय होकर उसके रास्ते का विश्लेषण करता है। पता चलता है कि आखिर ये रॉकेट कहां गिरने वाला है, क्या ये इजराइल के लिए खतरा है। अगर ऐसा होता है तो किसी चलायमान या स्थिर इकाई से एक इंटरसेप्टर लॉन्च होता है, जो रॉकेट के किसी रिहायशी इलाके या अहम इमारत पर गिरने से पहले ही उसे हवा में ही नष्ट कर देता है।
इसे बनाने वाली कंपनी राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम और इजराइल सरकार का दावा है कि इस प्रणाली की सफलता दर 90 फीसद से ज्यादा है।

कुछ रक्षा जानकारों का कहना है कि इजराइल का दावा वास्तविक नहीं है। कनाडा की ब्रॉक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइकल आर्मस्ट्रॉन्ग ने 2019 में अमेरिकी पत्रिका नेशनल इंटरेस्ट में लिखा था कि कोई भी मिसाइल रक्षा प्रणाली पूरी तरह से भरोसेमंद नहीं हो सकती है। प्रोफेसर आर्मस्ट्रॉन्ग अलग-अलग रक्षा प्रणालियों पर अध्ययन कर रहे हैं। दुनिया के कई विशेषज्ञ इजराइली प्रणाली की सफलता दर 80 फीसद मानते हैं। हाल के संघर्ष में इजराइली सेना ने दावा किया कि गाजा की ओर से दागे गए एक हजार से ज्यादा रॉकेट में से 90 फीसद को आयरन डोम ने हवा में ही नष्ट कर दिया।

इस प्रणाली के एक इकाई की कीमत 50 मिलियन डॉलर (करीब 368 करोड़ रुपए) होती है। वहीं, एक इंटरसेप्टर तामिर मिसाइल की कीमत करीब 80 हजार डॉलर (59 लाख रुपए) होती है। एक रॉकेट एक हजार डॉलर (करीब 74 हजार रुपए) से भी कम का होता है। इस सिस्टम रॉकेट को इंटरसेप्ट करने के लिए दो तामिर मिसाइलें लगी होती हैं।

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