ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन से “एक्सप्रेस अड्डा” कार्यक्रम के दौरान खास बातचीत हुई। इस चर्चा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर चैटजीपीटी में आने वाले नए फीचर्स तक कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बात की गई।

चर्चा के दौरान ऑल्टमैन से पूछा गया कि हाल ही में वे लीजेंडरी डिजाइनर जॉनी आइव (Jony Ive) को साथ लेकर आए हैं, जिन्होंने एप्पल के कई प्रतिष्ठित प्रोडक्ट्स की डिजाइन तैयार की थी। ऐसे में आगे क्या खास होने वाला है? इस सवाल के जवाब में ऑल्टमैन ने कहा कि साल के अंत तक वे इस बारे में खुलकर बात कर पाएंगे। हालांकि उन्होंने यह जरूर माना कि कंपनी की इस लंबी यात्रा में यह एक बड़ा माइलस्टोन साबित होगा।

बातचीत के दौरान ऑल्टमैन ने कंप्यूटर और एआई के बीच का अंतर भी समझाया। उन्होंने कहा कि अब आप कंप्यूटर से नेचुरल लैंग्वेज में बात कर सकते हैं। जटिल से जटिल काम आसानी से किया जा सकता है और मुश्किल विषयों को भी समझा जा सकता है।

सिलिकॉन वैली और मौजूदा अमेरिकी प्रशासन के साथ उनके संबंधों पर भी सवाल किया गया। इस पर ऑल्टमैन ने कहा कि कुछ मामलों में वे सरकार के साथ काफी करीब होकर काम कर रहे हैं, जबकि कुछ मामलों में उतनी निकटता नहीं है। उन्होंने माना कि टेक कंपनियों और सरकारों के बीच मजबूत तालमेल बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव अब समाज पर तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए सरकारों के साथ मजबूत संबंध बनाना टेक कंपनियों की जिम्मेदारी बन गई है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में एआई एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

ऑल्टमैन से यह भी पूछा गया कि भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में किस दिशा में ज्यादा ध्यान देना चाहिए-एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर, चिप्स या एप्लीकेशंस? इसके जवाब में उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत को सभी स्तरों पर मजबूती से काम करने की जरूरत है। एआई के नौकरी पर पड़ने वाले असर को लेकर भी ऑल्टमैन ने अपनी राय रखी। उनका कहना था कि लोग जितना डर रहे हैं, स्थिति उतनी गंभीर नहीं होगी। बदलाव जरूर आएगा, लेकिन इतनी जल्दी नहीं। समय के साथ लोग खुद को ढालना और नई चीजें सीखना शुरू कर देंगे।

एआई की दुनिया में चीन के बढ़ते प्रभाव पर ऑल्टमैन ने कहा कि इस समय चीन की ताकत मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक मोटर्स और मैग्नेट्स में है। एनर्जी के क्षेत्र में भी वह तेजी से काम कर रहा है। हालांकि, कुछ ऐसे क्षेत्र अभी भी हैं जहां अमेरिका, चीन की तुलना में अधिक मजबूत है। ऑल्टमैन ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में किसी कारणवश वे चैटजीपीटी का उपयोग नहीं कर पाए, तो जानकारी के लिए वे गूगल जेमिनी का इस्तेमाल करेंगे। | ऑल्टमैन ने और भी कई मुद्दों पर खुलकर बात की है, पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें