ऐलन मस्क ने कहा- सीमित है मार्क जुकरबर्ग की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की समझ - Elon Musk Says Mark Zuckerberg's Understanding of artificial intelligence is Limited - Jansatta
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ऐलन मस्क ने कहा- सीमित है मार्क जुकरबर्ग की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की समझ

पांच साल पहले ज्यादातर कंपनियां एआई पर फोकस शुरू करने की शुरुआत कर रही थीं।

ऐलन मस्क जैसे लोगों को चिंता है कि हमें इन प्रयासों को विनियमित करने की जरूरत है, क्योंकि इससे मानव सभ्यता के अस्तित्व को खतरा हो सकता है। (File Photo)

दुनिया में तकनीक लगातार बढ़ती जा रही है। टेस्ला, स्पेसएक्स के फाउंडर ऐलन मस्क ने कहा था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इस विश्व के लिए खतरा हो सकती है। इस पर फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा था कि ऐलन मस्क का यह बयान गैर जिम्मेदाराना है। इस पर अब ऐलन मस्क ने मार्क जुकरबर्ग को जवाब देते हुए कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर जुकरबर्ग की समझ सीमित है। एआई का अभी शुरूआती दौर है। पांच साल पहले ज्यादातर कंपनियां एआई पर फोकस शुरू करने की शुरुआत कर रही थीं। हां, बड़ी कंपनियां आक्रामक रूप से इस पर बड़ा दांव लगा रही हैं। कंपनियां अपने उत्पादों और सेवाओं को बेहतर बनाने और प्रॉडक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए एआई उपयोग करने के तरीके तलाश रही हैं।

कुछ लोग इस पर जबरदस्त ध्यान दे रहे हैं। ऐलन मस्क जैसे लोगों को चिंता है कि हमें इन प्रयासों को विनियमित करने की जरूरत है, क्योंकि इससे मानव सभ्यता के अस्तित्व को खतरा हो सकता है। उधर, गूगल एक ऐसा सिस्टम विकसित करने पर काम कर रहा है जिससे आर्टिफिशल इंटेलिजेंस को बेकाबू होने से रोका जा सके और इंसानों से इसके टकराव को भी टाला जा सके।

कंपनी की ‘डीप माइंड’ डिवीजन, टेस्ला के ऐलन मस्क के द्वारा फंड किए गए रिसर्च ग्रुप के साथ मिलकर इस पर काम कर रही है, जिससे कि मशीनें एक निश्चित तरीके से काम करें। इसके लिए इस ग्रुप ने एक रिसर्च पेपर के द्वारा यह बताया कि किस तरह से इंसानों के फीडबैक का इस्तेमाल करके मशीनों के काम करने के तरीके को बेहतर बनाया जा सकता है। इस आर्टिफिशल इंटेलिजेंस रिसर्च में एक पॉप्युलर तकनीक की मदद ली जा रही है।

इस रिसर्च में इस्तेमाल की जा रही यह तकनीक अभी काफी समय लेती है इसलिए अभी इसका इस्तेमाल करना संभव नहीं है, लेकिन यह मशीनों को भविष्य में काबू में रखने के लिए एक आइडिया जरूर दे देती है। कई बार ऐसा देखा गया है कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस ठीक से काम नहीं कर पाता या फिर इंसानों से इसका टकराव हो जाता है। अगर यह रिसर्च पूरी तरह से कामयाब रहती है तो आने वाले वक्त में कंपनियों की आर्टिफिशल इंटेलिजेंस पर निर्भरता बढ़ेगी।

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