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इन जगहों पर बिना आधार मिलना शुरू होगा जियो, एयरटेल, बीएसएनएल और वोडाफोन कनेक्‍शन

टेलीकॉम विभाग ने आगे कहा,''टेलीकॉम कंपनी एक आईडी पर एक दिन में ग्राहक को सिर्फ दो ही कनेक्शन दे सकेगी। ये प्रक्रिया हर कनेक्शन पर लागू होगी। टेलीकॉम विभाग ने टेलीकॉम आॅपरेटर्स को वैकल्पिक केवाईसी प्रक्रिया के लिए 5 नवंबर तक तैयार रहने को कहा था।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल फोटो)

टेेलीकॉम सेवा कंपनियों ने दूरसंचार विभाग को पहचान पत्र की जांच प्रक्रिया के लिए दो जगहों के चुनाव की सूचना दे दी है। ये कवायद नवीन बिना आधार कार्ड वाली केवाईसी प्रक्रिया के लिए की जा रही है। टेलीकॉम विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए अधिसूचना जारी की थी कि हर आॅपरेटर दो जगहों पर इस प्रक्रिया को करेगा। बीते 6 नवंबर को जारी हुई इस ​अधिसूचना के मुताबिक, भारती एयरटेल ये प्रक्रिया दिल्ली और मेरठ में करेगा। जबकि रिलायंस जियो ने इस सूची में मुंबई में ही दो जगहों का चुनाव किया है। नए विलय के बाद बनी वोडाफोन ​आइडिया ने ये प्रकिया करने के लिए दिल्ली और महाराष्ट्र के बारामती का चुनाव किया है।

वहीं निजी टेलीकॉम कंपनी टाटा टेली सर्विसेज ने पहचान पत्रों की जांच के लिए हरियाणा में ही दो जगहों का चुनाव किया है। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी, बीएसएनएल ने इस प्रकिया के लिए तेलंगाना की दो जगहों का चुनाव किया है। जबकि एमटीएनएल ने मुंबई और दिल्ली की अपनी पसंद बताया है। अधिसूचना के मुताबिक,”पहचान पत्र प्रमाणन के नतीजों के आधार पर, प्रक्रिया में किसी भी बदलाव के संबंध में आगे निर्देश दिए जाएंगे।” वहीं टेलीकॉम उद्योग द्वारा सुझाई गई वैकल्पिक डिजिटल केवाईसी प्रकिया के मुताबिक, ग्राहक जिस फॉर्म पर आवेदन करेगा, उसी फॉर्म में वह अपनी हालिया तस्वीर और ओरिजनल पहचान और निवास प्रमाण पत्र नत्थी करेंगे। इसके बाद की सारी प्रकिया पूरी तरह से डिजिटल होगी।

टेलीकॉम विभाग के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया सिर्फ लाइसेंसधारी टेलीकॉम कंपनी द्वारा अधिकृत की गई एप्लिकेशन के जरिए ही होगी। टेलीकॉम विभाग ने आगे कहा,”टेलीकॉम कंपनी एक आईडी पर एक दिन में ग्राहक को सिर्फ दो ही कनेक्शन दे सकेगी। ये प्रक्रिया हर कनेक्शन पर लागू होगी। टेलीकॉम विभाग ने टेलीकॉम आॅपरेटर्स को वैकल्पिक केवाईसी प्रक्रिया के लिए 5 नवंबर तक तैयार रहने को कहा था। ये निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा बीते 26 सितंबर को जारी किए गए फैसले के ​बाद दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में निजी कंपनियों को ग्राहकों की आधार जानकारी लेने की अनुमति पर रोक लगा दी थी।

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