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बिना किसी की मदद लिए अब फटाफट पढ़ सकेंगे दृष्टिहीन, वैज्ञानिकों ने ईजाद की नई मशीन ‘दिव्य नयन’

भारत में करीब 1.5 करोड़ लोग दृष्टिबाधित हैं। जबकि पूरी दुनिया में ऐसे लोगों की संख्या 3.9 करोड़ है। ये लोग किसी भी प्रिंटेड मटेरियल यानि कि किताब, अखबार, पत्रिका वगैरह नहीं पढ़ सकते हैं।

वाई-फाई और ब्लूटूथ इंटरनेट कनेक्टिविटी से लैश इस दिव्य नयन मशीन के अंदर 32 जीबी की इंटरनल स्टोरेज कैपसिटी है जो 3 घंटे तक चल सकता है। (फोटो- CSIR)

काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के वैज्ञानिकों ने दृष्टि बाधितों को नए साल पर तोहफा दिया है। उनके लिए पढ़ने वाला अत्याधुनिक मशीन बनाया है जिसका नाम दिव्य नयन रखा गया है। इस मशीन के जरिए दृष्टिहीन लोग बिना किसी की सहायता के अब फटाफट पढ़ सकेंगे। इस मशीन की कीमत भी बहुत कम रखी गई है ताकि अधिक से अधिक लोग इसका फायदा उठा सकें।

सीएसआईआर के तहत चंडीगढ़ स्थित सेन्ट्रल साइंटिफिक इन्स्ट्रूमेन्ट्स ऑर्गनाइजेशन (सीएसआईओ) के वैज्ञानिकों ने इस मशीन का आविष्कार किया है। इसमें स्कैनर लगा हुआ है जो हिन्दी और अंग्रेजी की किसी भी स्क्रिर्ट को पढ़ सकता है और उसे जोर-जोर से बोल सकता है ताकि दृष्टिहीन उसे समझ सकें। यह पोर्टेबल डिवाइस किसी भी कंटेंट को स्कैन कर पढ़ने और उसे स्पीच में बदलने की तकनीक पर आधारित है।

दिव्य नयन वायरलेस पोर्टेबल डिवाइस है जिसमें ओपेन सोर्स हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया है। यह उपकरण एक साथ एकाधिक दस्तावेज को सहज तरीके से पढ़ सकता है और उसका विश्लेषण भी कर सकता है। सीएसआईओ के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आशीष गौरव ने कहा कि यह डिवाइस शब्द, पेज और पाठ स्तर का नेविगेशन पढ़ने में सक्षम है। वाई-फाई और ब्लूटूथ इंटरनेट कनेक्टिविटी से लैश इस मशीन के अंदर 32 जीबी की इंटरनल स्टोरेज कैपसिटी है जो 3 घंटे तक चल सकता है। इस मशीन का वजन भी केवल 410 ग्राम है। इसे किसी कम्प्यूटर मॉनीटर से भी जोड़ा जा सकता है और इसे मिनी कम्प्यूटर के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

फिलहाल, यह मशीन सिर्फ हिन्दी और अंग्रेजी कन्टेन्ट ही पढ़ सकता है लेकिन बहुत जल्द ही इसे अन्य भारतीय और विदेशी भाषाओं में भी विकसित किया जाएगा। सीएसआईओ के निदेशक डॉ. आर के सिन्हा ने बताया, “यह एक फास्ट ट्रैक परियोजनाओं में से एक है जो अनुवाद को एक उत्पाद के तौर पर पेश करता है। इस डिवाइस को हिंदी के अलावा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के लिए भी सक्षम बनाया गया है। हम एक वर्ष के भीतर इस लक्ष्य को हासिल कर लेंगे। हमलोग पाठकों की इच्छा के अनुरूप कोई भी पाठ पढ़ने की गति पर भी काम कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि जल्द ही इस मशीन का व्यापारिक स्तर पर उत्पादन शुरू किया जाएगा।

गौरतलब है कि भारत में करीब 1.5 करोड़ लोग दृष्टिबाधित हैं। जबकि पूरी दुनिया में ऐसे लोगों की संख्या 3.9 करोड़ है। ये लोग किसी भी प्रिंटेड मटेरियल यानि कि किताब, अखबार, पत्रिका वगैरह नहीं पढ़ सकते हैं। फिलहाल ब्राइल लिपि की मदद से ये लोग कुछ भी पढ़ पाते हैं लेकिन किसी टेक्स्ट को ब्राइल लिपि में बदलने में बहुत वक्त लगता है। दिव्य नयन इस कठिनाई को दूर करने वाला उपकरण बन सकता है।

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