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शोध: स्मार्टफोन से दिमाग को नियंत्रित करने की कवायद

कैलिफोर्निया में टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क ने अपनी नई स्टार्टअप न्यूरोलिंक के जरिए ऐसी एक कंप्यूटर चिप विकसित करने का दावा किया है, जो मानव के मस्तिष्क को नियंत्रित करेगी। माइक्रोचिप का बंदर और सूअर पर प्रयोग सफल रहा है। कंप्यूटर को सीधे दिमाग से जोड़ने की है। इसका पहला प्रोटोटाइप अगले साल के अंत तक इंसान में फिट किया जा सकता है। एलन मस्क ने न्यूरोलिंक स्टार्टअप में 100 मिलियन डॉलर का निवेश किया है।

Updated: February 16, 2021 12:02 AM
सांकेतिक फोटो।

कंप्यूटर को सीधे दिमाग (इसे जोड़ना अभी तक केवल कहानियों में ही होता आया है) अब दिमाग को कंप्यूटरीकृत चिप से नियंत्रित करने की योजना परवान चढ़ने वाली है। स्मार्टफोन में लगी एक चिप से इंसानी दिमाग नियंत्रित होगा। इसके जरिए दिमाग के भीतर की जानकारी सीधे स्मार्टफोन या फिर कंप्यूटर में दर्ज होगा। इस खोज का मकसद इंसान की याददाश्त बढ़ाना, मस्तिष्क आघात या जन्मजात न्यूरोलॉजिकल रोगों से ग्रस्त मरीजों के लिए लाभकारी साबित होगी।

अमेरिकी कंपनी स्पेस-एक्स (निजी अंतरिक्ष यात्राएं कराने और चांद व मंगल पर इंसानी बस्तियां बसाने की योजना पर काम कर रही कंपनी) के प्रमुख एलन मस्क की अन्य एक कंपनी न्यूरोलिंक ने कैलिफोर्निया में इस योजना पर काम शुरू किया है। मस्क ने कैलिफोर्निया के एक कार्यक्रम में फ्लेक्सिबल चिप पेश की है। मस्क ने हाल में अपनी स्टार्टअप न्यूरोलिंक के नए शोध के बारे की घोषणा की है जिसके तहत उनकी योजना कंप्यूटर को सीधे दिमाग से जोड़ने की है। इस अभियान को वे इंसान की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ जीवन की कोशिश बता रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पहला प्रोटोटाइप अगले साल के अंत तक इंसान में फिट किया जा सकता है। एलन मस्क ने न्यूरोलिंक स्टार्टअप में 100 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। इसका मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को में है। जानवरों के स्तर पर प्रयोग में सफलता मिली है। कैलिफोर्निया एकेडमी आॅफ साइंसेस में मस्क ने कहा कि संपूर्ण लक्ष्य तक पहुंचने में समय लग सकता है।

इस मामले में जानवरों पर प्रयोग चल रहा है और एक बंदर अपने दिमाग के जरिए कंप्यूटर को नियंत्रित करने में सफल भी हुआ है। मस्क ने नयूरोलिंक कॉर्प जुलाई 2016 में स्थापित की थी। तब उनका उद्देश्य अल्ट्रा-हाई बैंडविथ ब्रेन मशीन इंटरफेस बनाना था जिससे इंसान और कंप्यूटर को जोड़ा जा सके। कंपनी ने 2017 में कहा था कि उनके शुरुआती लक्ष्यों में से ब्रेन इंटरफेसेस बनाना शामिल है, जिससे गंभीर चिकित्सकीय हालात में मदद मिल सके।

उनका दावा है कि इस चिप का एक उद्देश्य दिमाग की गड़बड़ियों को ठीक करना है। उन्होंने कहा कि हम इसे केवल एक चिप के जरिए ठीक कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इसे आपको अपने खुद के दिमाग और के सुरक्षित रखने और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और एक बेहतर संयोजित भविष्य भी। हालांकि, इसके कानूनी पहलुओं को लेकर दुनिया भर में बहस तेज हो गई है।

कैसे जुड़ेगा कंप्यूटर से दिमाग। मस्क के मुताबिक, इसके लिए दिमाग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ दिमाग को मिलाना होगा। ज्यादातर संभावना इस बात की है कि दिमाग के दो मिलीमीटर भीतर एक छोटी सी वायरलेस चिप डाली जाएगी। इस मामले में सबसे बड़ी तकनीकी बाधा मस्क बैंडविथ को मानते हैं।

यह चिप बहुत पतली है। यह 1000 तार से जुड़ी है। ये तार चौड़ाई में इंसानों के बाल के दसवां हिस्से के बराबर हैं। न्यूरोलिंक का कहना है कि इसे बनाने में दो साल से ज्यादा का वक्त लगा। डिवाइस को रोबोट द्वारा दिमाग में इंस्टाल किया जाएगा। सर्जन इस रोबोट की मदद से व्यक्ति की खोपड़ी में दो मिलीमीटर छेद करेंगे। फिर चिप को छेद के जरिए दिमाग में लगाया जाएगा।

तार या धागे के इलेक्ट्रॉड्स, न्यूरल स्पाइक्स को मॉनिटर करने में सक्षम होंगे। ये इलेक्ट्रॉड्स ना सिर्फ इंसानों के दिमाग को पूरी तरह से जान पाएंगे, बल्कि उनके व्यवहार में आने-वाले उतार-चढ़ाव को भी समझ पाएंगे। न्यूरोलिंक ने बताया कि सभी पैरामीटर खरा उतरने के बाद 2020 की शुरुआत में इसे मानव परीक्षण के लिए एफडीए से मंजूरी लेने की योजना है।

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