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बुलेट ट्रेन से 4 गुणा ज्यादा रफ्तार पर दौड़ेगी यह सवारी

आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि बुलेट ट्रेन की जगह पर एक ऐसी सवारी भी लाई जा सकती है जो 1,200 km प्रतिघंटा की रफ्तार तक पहुंच जाएगी!

Author Updated: July 27, 2017 6:35 PM
हाइपरलूप तकनीक का एक डिजाइन। (Source: hyperloopindia.in)

भारत में पहली बुलेट ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद रूट पर दौड़ेगी। अनुमान है कि 320-350km प्रतिघंटा की रफ्तार हासिल करने के बाद यह ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद की दूरी लगभग 2 घंटे में तय कर लेगी। लेकिन आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि बुलेट ट्रेन की जगह पर एक ऐसी सवारी भी लाई जा सकती है जो 1,200 km प्रतिघंटा की रफ्तार तक भी पहुंच जाएगी! यानी की बुलेट ट्रेन से 4 गुणा ज्यादा रफ्तार। अगर यह सपना सच साबित हो गया तो 2 घंटे का सफर महज 40 मिनट में ही तय हो जाएगा। समाचार एजंसी आईएएनएस के मुताबिक बिरला इंस्टिट्यूट ऑफटेक्नॉलजी एंड साइन्स, पिलानी (BITS) के कुछ छात्र इसी प्रॉजेक्ट को लेकर काम कर रहे हैं। छात्र एक “Hyperloop” तकनीक से चलने वाला वाहन तैयार कर रहे हैं जो 1,200 km प्रतिघंटा की रफ्तार पर दौड़ सकेगा।

हाइपरलूप तकनीक का इस्तेमाल कर छात्र एक “पॉड” बना रहे हैं। यह “पॉड” या एक वैक्यूम ट्यूब होगा जिसके लिए तैयार किया गया खास वाहन 1,200 km प्रतिघंटा की रफ्तार हासिल कर सकेगा। “Hyperloop India” इस वैक्यूम ट्यूब या पॉड को बनाने के आखिरी मुकाम पर हैं। सिंगल कम्पार्टमेंट के इस पॉड के अगस्त महीने के अंत तक सामने आने की उम्मीद है। कैलिफोर्निया स्थित SpaceX मुख्यालय में इससे पर्दा उठया जाएगा। आईएएनएस से बातचीत में प्रॉजेक्ट पर काम कर रहे एक छात्र पृथ्वी शंकर ने इसके बारे में बताया। शंकर ने कहा, “हाइपरलूप एक ट्यूब ट्रेवल तकनीक है। ट्यूब में एक वाहन होता है जो चुम्बकीय शक्ति के कारण हवा में एक ऊंचाई पर तैरते हुए ट्रेवल करता है।”


(Source: YouTube/ColdFusion)

वहीं शंकर ने इस प्रॉजेक्ट की कीमत को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “अगर बुलेट ट्रेन को हाइपरलूप से बदला जाता है तो पूरे प्रॉजेक्ट की कीमत 40 फीसद तक कम हो जाएगी। इसकी मेंटेनेंस कॉस्ट भी काफी कम हो जाएगी और जमीन का भी कम इस्तेमाल होगा।” रिपोर्ट के मुताबिक हाइपरलूप की रफ्तार न सिर्फ बुलेट ट्रेन बल्कि मैग्लेव (Magnetic Levitation) ट्रेन से भी तेज होगी। मैग्लेव ट्रेन चुम्बकीय तकनीक पर दौड़ती हैं और यह 650 km प्रतिघंटा तक की रफ्तार हासिल कर सकती हैं। मैग्लेव ट्रेन अभी जापान और चीन में ही ऑपरेट करती हैं। मैग्लेव और हाइपरलूप दोनों ही चुम्बकीय शक्ति की तकनीक पर काम करते हैं लेकिन वैक्यूम ट्यूब में होने के कारण हाइपरलूप ज्यादा रफ्तार हासिल कर सकती है।


(Source: YouTube/nav san)

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