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स्पेक्ट्रम नीलामी : आम उपयोक्ता को कैसे होगा फायदा

करीब छह साल बाद केंद्र सरकार ने दूसरी बार स्पेक्ट्रम की नीलामी की।

Telcom(बाएं )-जेएस दीपक, पूर्व दूरसंचार सचिव। (दाएं) लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर) एसपी कोचर, महासचिव, सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआइ) फाइल फोटो।

करीब छह साल बाद केंद्र सरकार ने दूसरी बार स्पेक्ट्रम की नीलामी की। करीब 3.92 लाख करोड़ रुपए कीमत के 2,250 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के विभिन्न बैंड की नीलामी की गई। 5जी वाले स्पेक्ट्रम की नीलामी बाद में की जाएगी। जो नीलामी की गई है, उससे भविष्य में 5जी सेवाओं के लिए आधार तैयार होगा। दूससंचार कंपनियों का कहना है कि हाल के नीलामी के बाद स्पेक्ट्रम आवंटन से एक तो गांवों में मोबाइल एवं इंटरनेट सेवाएं बेहतर हो सकेंगी।

घरों एवं बंद इमारतों में भी कनेक्टिविटी दुुरुस्त होगी। हाल की नीलामी में एक खास बात यह रही कि बड़ी मात्रा में स्पेक्ट्रम उपलब्ध होने के बावजूद 700 मेगाहर्ट्ज के बैंड में कोई बोली नहीं लगी। माना जाता है कि आर्थिक लिहाज से यह बैंड उपयोगी नहीं है। साथ ही, सरकार की ओर से इस बैंड का रिजर्व प्राइस भी काफी ज्यादा रखा गया।

स्पेक्ट्रम और उपयोग

दूरसंचार कंपनियों- रिलायंस जियो, भारती एअरटेल और वोडाफोन-आइडिया ने हाल में नीलामी में स्पेक्ट्रम अधिकार खरीदे। दरअसल, स्पेक्ट्रम मोबाइल के 2जी, 3जी और 4जी नेटवर्क से जुड़ी शब्दावली है। आसान शब्दों में कहें तो स्पेक्ट्रम का संबंध मोबाइल फोन उद्योग और अन्य क्षेत्रों के लिए एअरवेब्स के जरिए संचार के लिए आवंटित रेडियो फ्रीक्वेंसी से है।

बैंड की कवरेज और क्षमता के जरिए ही कोई भी मोबाइल सेवा प्रदाता ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ सकता है और इंटरनेट की तेज स्पीड उपलब्ध कराता है। दूरसंचार कंपनियां उपयोक्ताओं को सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करती हैं। मोबाइल फोन और टेलीविजन में रेडियो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। अगर कोई कंपनी किसी स्पेक्ट्रम का कारोबारी इस्तेमाल करना चाहती है तो उसे पहले यह तय करना होगा कि उसे तरंग की लंबाई कितनी चाहिए होती है। साथ ही कितनी फ्रीक्वेंसी, कितनी ऊर्जा के साथ तरंगों को कितनी दूर तक ले जा सकती है? दूरसंचार क्षेत्र में रेडियो तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है।

स्पेक्ट्रम की वैधता

जब वर्ष 2015 में स्पेक्ट्रम की नीलामी हुई थी तब इसकी वैधता पांच साल थी। हालिया नीलामी की खास बात यह है कि स्पेक्ट्रम की वैधता 20 साल के लिए है। दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी एअरटेल ने हाल की नीलामी में 18,699 करोड़ रुपए की लागत से 355.45 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम, मिड बैंड और 2,300 मेगाहर्ट्ज बैंड का अधिग्रहण किया है। कंपनी का कहना है कि इसके चलते उसे भविष्य में 5जी सेवाएं उपलब्ध कराने में आसानी होगी।

अब उसके पास देशभर में गीगाहर्ट्ज सब-सेक्टर में स्पेक्ट्रम हासिल हो गया है। इससे शहरों में उसकी सेवाएं घरों के अंदर और इमारतों में भी अच्छा संपर्क मिल सकेगा। इसके अलावा कंपनी की दूरसंचार सेवाएं गांवों में भी बेहतर होंगी। 4जी स्पेक्ट्रम नीलामी में सबसे कम आक्रामक रुख अपनाने वाली वोडाफोन-आइडिया ने कहा कि उसने अपनी 4जी क्षमता बढ़ाने के लिए पांच सर्कल में वायु तरंगें हासिल की हैं।

हाल की नीलामी कैसी रही

दूरसंचार विभाग की स्पेक्ट्रम नीलामी में कुल सात बैंड में चार लाख करोड़ रुपए के 2,308.80 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को नीलामी के लिए रखा गया था। नीलामी के पहले दिन कुल 77,146 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुई थीं। दूसरे दिन की भी बोलियों को मिलाकर 77,800 करोड़ रुपए से अधिक की बोलियां हासिल हुईं। इसमें रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया ने हिस्सा लिया।

सरकार ने कहा था कि स्पेक्ट्रम नीलामी उम्मीद से बेहतर रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहयोगी कंपनी रिलायंस जियो ने नीलामी में सबसे अधिक खर्च किया। जियो ने 800 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज और 2300 मेगाहर्ट्ज जैसे बैंड में कुल 488.35 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम 57,122.65 करोड़ रुपए में खरीदा। कंपनी ने सभी 22 सर्किल में स्पेक्ट्रम इस्तेमाल के अधिकार हासिल किए।

वहीं, भारती एअरटेल ने 355.45 मेगाहर्ट्ज के लिए 18,699 करोड़ रुपए की बोली लगाई, जबकि वोडाफोन-आइडिया ने 1,993.40 करोड़ रुपए में 11.90 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम खरीदे। अब खरीदे गए स्पेक्ट्रम के अग्रिम भुगतान को लेकर दूरसंचार कंपनियों को डिमांड नोट जारी करेगा दूरसंचार विभाग। नीलामी की शर्तों के मुताबिक सफल बोलीदाता एक ही बार में पूरी बोली राशि का भुगतान कर सकते हैं या एक निश्चित राशि का अग्रिम भुगतान करने के विकल्प का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
पाकिस्तान का

क्या कहते
हैं जानकार

स्पेक्ट्रम से दूरसंचार कंपनियों को डेटा के बढ़े इस्तेमाल की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। हालांकि, यदि रेडियोतरंगों के आधार मूल्य कम होते तो कंपनियों को नेटवर्क में अतिरिक्त निवेश करने का प्रोत्साहन मिलता।
– लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर) एसपी कोचर, महासचिव, सेल्युलर आॅपरेटर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (सीओएआइ)

आगामी समय देश की दूरसंचार कंपनियों के लिए अगले दशक की दशा व दिशा तय करेगा। कोरोना संकट की चुनौतियों से पार पाने में अर्थव्यवस्था को दूरसंचार क्षेत्र से खासी मदद मिली। पूर्णबंदी में डिजीटल अर्थव्यवस्था ने हालात संभाले। पूर्णबंदी के दौरान देश की अर्थव्यवस्था का 35 फीसद हिस्सा दूरसंचार से ही चल रहा था।
-जेएस दीपक, पूर्व दूरसंचार सचिव

5जी से क्या होगा फायदा

भारत में 5जी की शुरुआत के बाद उपयोक्ता 1जीबीपीएस की रफ्तार से इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकेंगे और इससे फोन की बैटरी की खपत भी कम होगी। 5जी के आने के बाद स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में लाभ होगा। घर बैठे स्वास्थ्य और कृषि से जुड़े सवालों का जवाब मिलेगा। इस सेवा के बाद चालकरहित वाहनों की संख्या बढ़ सकती है और रोबोटिक इस्तेमाल बढ़ सकता है।

इस सेवा को मुहैया करवाने के लिए दूरसंचार कंपनियों को पास-पास में टावर लगाने होंगे, जिससे उनका खर्च बढ़ेगा और इस खर्च को ग्राहकों से ही वसूला जाएगा। हालांकि, इससे मोबाइल ई-कॉमर्स को बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही, इंफोटेनमेंट एवं डिजीटल सेवाओं की मांग भी बढ़ेगी। अधिक डेटा स्पेक्ट्रम मिलने से डेटा स्पीड में 40 फीसद की बढ़ोतरी होगी।

ऐसा होने पर 4 जी उपयोक्ता तेजी से डाउनलोड कर पाएंगे। इंटरनेट ब्राउजिंग और वीडिओ देने का अनुभव भी पूरी तरह बदल जाएगा। वीडिओ स्ट्रीमिंग में आसानी से कंपनियों को ज्यादा उपयोक्ताओं को ब्रॉडबैंड से जोड़ने करने में मदद मिलेगी। इसके लिए रिकॉर्ड 2300 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की बिक्री की गई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि खराब सेवा के लिए कंपनियां स्पेक्ट्रम की कमी का बहाना नहीं कर सकतीं।

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