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सेहत: स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं पैदल चलने का मंत्र कदम-कदम सेहत का दम

घर हो या दफ्तर कहीं पर भी हमें चलने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहिए। संभव हो तो लिफ्ट के बजाए सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।

अच्छी सेहत के लिए सुबह-शाम पैदल चलना अच्छा होता है।

अच्छी सेहत के नुस्खों की बात करें तो चलना और खूब चलने की सलाह सबसे ज्यादा दी जाती है। चलना एक ऐसी शारीरिक प्रक्रिया है जो पूरे शरीर का व्यायाम एक साथ करती है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी सेहत ठहरे नहीं तो इसके लिए जितनी जल्दी हो सके चलना शुरू कर दीजिए। सैर करना सबसे सस्ता नुस्खा है जिसमें आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है बल्कि अपने घर से सिर्फ निकलना है।

चलने को अपनी दिनचर्या में जितनी जल्दी शामिल कर लें उतना अच्छा रहेगा। पारंपरिक तौर पर सुबह की सैर को ही सर्वोत्तम माना गया है। लेकिन ऐसा नहीं है कि अगर आप किन्हीं वजहों से सुबह की सैर नहीं कर पाते हैं तो फिर आप सैर कर ही नहीं सकते। आपको अपनी दिनचर्या के हिसाब से जब भी वक्त मिले चलने की कोशिश करनी चाहिए। अगर आप दिन में नहीं जा सकते तो शाम में सैर करने जाएं। तेज गर्मी और उमस के दिनों को छोड़ कर दोपहर की सैर पर भी निकला जा सकता है।

अगर आप देर रात की ड्यूटी करते हैं और सुबह बिना पर्याप्त नींद लिए सैर पर निकल जाएंगे तो फिर यह चलना आपके लिए किसी भी तरह से फायदेमंद नहीं होगा। इसका विपरीत असर यह होगा कि आप दिन भर थकान महसूस करेंगे। इसलिए अगर आपको दिन चढ़ने के बाद या जिस वक्त भी समय मिले उस वक्त को ही सैर के नाम समर्पित करना चाहिए।

पहनावा हो आरामदायक
सैर पर निकलने के लिए आरादायक कपड़े पहनें। वैसे तो लोगों को जिस तरह के कपड़े पहनने की आदत होती है वही उनके लिए सबसे आरामदायक होता है। लेकिन कसी जींस या साड़ी जैसे कपड़ों को पहनने से बचना चाहिए। सलवार कुर्ता या ट्रैक सूट जैसे कपड़े चलने के लिए आरामदयक होते हैं।

नियमित सैर पर जाने वाले लोगों को अपने जूतों पर खास ध्यान देना चाएिह। फैंसी या हिल वाले जूते-चप्पल से तो परहेज ही करना चाहिए। सैर के लिए एक जोड़ी अच्छी गुणवत्ता के स्पोर्ट्स शूज रखना बेहतर होता है। इसकी गद्देदार परत के कारण तेज चलने में आसानी होती है और सड़क थोड़ी ऊबर-खाबर भी हो तो तलवों में चोट नहीं लगती है। कपड़े आप चाहे साड़ी पहनें या पजामा लेकिन पैरों में स्पोर्ट्स शूज डालना ही बेहतर होता है।

पहले छोटी शुरुआत
सैर की शुरुआत में आप थोड़ा कम भी चल सकते हैं। इस क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है। शुरू में आप तीन किलोमीटर चल रहे हैं तो एक-दो हफ्ते में उसे बढ़ा कर पांच किलोमीटर भी कर सकते हैं। लेकिन यह अपनी शरीर की ऊर्जा और क्षमता के अनुपात में ही करिए। सैर के वक्त शरीर को जरूर से ज्यादा थका लेंगे तो आप बाकी समय थकान महसूस करते रहेंगे और आपकी कार्यक्षमता भी प्रभावित होगी।

शोध का दावा
तेज चलने के कई फायदे हैं। यह दिल के मरीजों से लेकर घुटने के दर्द से परेशान लोगों को राहत दे सकता है। तेज चलना अवसाद दूर करने के लिए भी कारगर माना जाता है। उच्च रक्तचाप से बचाने में भी यह सहायक हो सकता है और मस्तिष्क आघात होने के खतरे को भी कम करता है। यह मोटापे से बचाव में भी सहायक होता है।

स्वास्थ्य पत्रिका ‘द लैंसेट’ में छपे एक शोध में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति बीस मिनट भी चलता है तो उसके शरीर में शर्करा का स्तर संतुलित रह सकता है। एक आम स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोजाना चालीस से लेकर अस्सी मिनट तक के पैदल चलने को आदर्श माना जाता है। पैदल चलने से एंडोर्फिन नाम के हार्मोन का स्राव होता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह हार्मोन हमारे शरीर को खुश रखने के लिए जिम्मेदार होता है। इसलिए पैदल चलने के बाद इंसान बेहतर महसूस करता है।

हर अवसर का लाभ
घर हो या दफ्तर कहीं पर भी हमें चलने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहिए। संभव हो तो लिफ्ट के बजाए सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। आस-पास की जगहों पर जाने के लिए वाहन का सहारा नहीं लें, पैदल ही जाएं। इन दिनों कई दफ्तरों में वाकिंग मीटिंग का भी चलन है जिसमें सहयोगी खुली जगह पर टहलते हुए सारे मसले तय करते हैं। अगर घर पर हैं तो एक जगह बहुत देर तक नहीं बैठें और थोड़ा चल लें।

कुल मिलाकर आपको किसी तरह की शारीरिक दिक्कत नहीं है या कोई खास चिकित्सकीय दिशानिर्देश नहीं है तो कहीं भी चलने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहिए।
(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें)

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