स्किन प्रॉब्लम ने रश्मि देसाई को एक्टिंग से किया दूर, जानें सोरायसिस के लक्षण और उपचार

पिछले दिनों एक साक्षात्कार के दौरान रश्मि ने बताया कि वे त्वचा संबंधी बीमारी सोरायसिस से जूझ रही हैं। सोरायसिस के उपचार के दौरान उनका वजन भी काफी बढ़ गया था। यही कारण है कि वे टीवी धारावाहिक में नजर नहीं आ रहीं।

उतरन’ और ‘नागिन-3’ जैसे टीवी धारावाहिकों से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री रश्मि देसाई। (फोटो सोर्स- इंस्टाग्राम अकाउंट, @imrashamidesai)

उतरन’ और ‘नागिन-3’ जैसे टीवी धारावाहिकों से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री रश्मि देसाई काफी समय से छोटे पर्दे से दूर हैं। पिछले दिनों एक साक्षात्कार के दौरान रश्मि ने बताया कि वे त्वचा संबंधी बीमारी सोरायसिस से जूझ रही हैं। सोरायसिस के उपचार के दौरान उनका वजन भी काफी बढ़ गया था। यही कारण है कि वे टीवी धारावाहिक में नजर नहीं आ रहीं। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ दीपाली भारद्वाज का कहना है कि सोरायसिस एक त्वचा संबंधी रोग है, लेकिन यह आम त्वचा रोगों से काफी अलग होता है। यह रोग प्रतिरोधक तंत्र में गड़बड़ी होने की वजह से होता है, जिसमें त्वचा पर लाल और सफेद चकत्ते पड़ जाते हैं, जिसके ठीक होने में महीनों लग जाते हैं।

क्या है सोरायसिस
सोरायसिस तभी होता है जब रोग प्रतिरोधक तंत्र स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करते हैं। दरअसल, श्वेत रुधिर कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी) शरीर को बीमारियों से बचाने का काम करती हैं। वहीं जब ये श्वेत रुधिर कणिकाएं त्वचा की कोशिकाओं पर हमला कर देती हैं, तो त्वचा की ऊपरी कोशिकाएं (एपिडर्मिस) काफी तेजी से बढ़ने लगती हैं। यह वृद्धि असंतुलित होती है, जिसकी वजह से त्वचा पर सूखे, कड़े, लाल और सफेद चकत्ते पड़ जाते हैं। त्वचा में शुष्कता आ जाती है, हालांकि इसमें खुजली नहीं होती है। खुजली तब होती है, जब इस बीमारी की शुरुआत हो रही होती है। यह समस्या ज्यादातर सिर, हाथ-पैर, हथेलियों, पांव के तलवें, कोहनी और घुटने में होती है। वैसे यह बीमारी शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है।

सोरायसिस के प्रकार
प्लाक सोरायसिस : यह सबसे आम रूप होता है। आमतौर पर इसमें कोहनी के पीछे, घुटनों के सामने और निचले हिस्से में लाल चकत्ते पड़ जाते हैं।
ग्यूटेट सोरायसिस : ये शरीर पर स्केली और दानों के रूप में नजर आता है।
इन्वर्स सोरायसिस : यह शरीर के मुड़ने या जोड़ वाली जगहों पर होता है।
पस्ट्युलर सोरायसिस : इसमें लाल चकत्तों के आसपास सफेद चमड़ी जमा होने लगती है।
एरिथ्रोडर्मिक सोरायसिस : यह सोरायसिस का सबसे खतरनाक रूप है जिसमें खुजली के साथ तेज दर्द भी होता है।

लक्षण
’ कुछ दिनों तक लगातार खुजली का होना
’ त्वचा पर पपड़ी जैसी परत बनना
’त्वचा पर सफेद और लाल धब्बे और चकत्ते का होना
’ सूखी-फटी त्वचा, जिसमें खून रिसता हो
’कोहनी, घुटनों, कमर के पास लाल पपड़ी बनना
’ त्वचा में सूजन
’संकरे या उभरे हुए नाखून

उपचार
कई बार मरीज त्वचा रोग और सोरायसिस में अंतर नहीं कर पाता है और दवा की दुकान से स्टेरॉयड क्रीम या टैबलेट लाकर सेवन करने लगता है। डॉक्टर की राय में ऐसा करने से यह बीमारी बढ़ सकती है। जिन लोगों के खून में इस बीमारी की प्रवृत्ति हो, उन लोगों में गर्भावस्था के दौरान भी इस बीमारी के होने की संभावना होती है। सोरायसिस मधुमेह की तरह ही स्व-प्रतिरक्षित रोग है, जो खून से होता है। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को विशेष उपचार की आवश्यकता होती है। सही उपचार न मिलने के कारण मरीज के ठीक होने की संभावना बहुत कम होती है। इसके उपचार में स्टेरॉयड क्रीम, लाइट थेरेपी और बायोलॉजिक्स जैसी दवाएं शामिल है। हालांकि दुनिया में सबसे बेहतरीन इलाज का तरीका बायोलॉजिक्स कहलाता है। बायोलॉजिक्स के इंजेक्शन होते हैं। सोरायसिस मरीज को इनफिल्कसीमैब के पांच इंजेक्शन लेने होते हैं, जिसके बाद यह बीमारी ठीक हो जाती है और धब्बे न के बराबर रहते हैं।

एहतियाती उपाय
शरीर में किसी भी तरह की खुजली या चकत्ते होने पर डॉक्टर की सलाह लें। डॉ दीपाली भारद्वाज कहती हैं कि लंबे समय से सोरायसिस से पीड़ित होने पर रुमेटीइड गठिया यानी हड्डियों में दर्द जैसी समस्या हो सकती है और मरीज बिस्तर पकड़ सकता है। इस बीमारी में दवाओं के साइड इफेक्ट से बचने के लिए डॉक्टर समय-समय पर मरीज को खून की जांच की सलाह देते हैं। आमतौर पर सोरायसिस में डिस्प्रिन जैसी गोली लेने से भी मरीज को साइड इफ्केट हो सकता है। इसलिए मरीज को खुद का डॉक्टर बनने से बचना चाहिए।

परहेज है जरूरी
ऐसे मरीजों को प्याज, लहसुन, काली मिर्च टमाटर और चाय का सेवन नहीं करना चाहिए। आम खाने से भी यह बीमारी बढ़ सकती है।

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