ग्लोइंग स्किन पाने के लिए अपनाएं ये असरदार टिप्स और सर्दी में रहें खिली खिली

सर्दी का मौसम पहनने-ओढ़ने, खाने-पीने, सैर-सपाटे के लिहाज से बहुत आनंददायक होता है। मैदानी इलाकों में लोग इस मौसम का इंतजार करते हैं कि यह आए और वे इसका आनंद ले सकें। मगर कई लोग इस मौसम में साज-शृंगार के मामले में आवश्यक ध्यान नहीं दे पाते। खासकर त्वचा की देखभाल में अक्सर लापरवाही बरतते हैं। सर्दी के मौसम में किस तरह त्वचा का निखार बनाए रखें और खिली-खिली दिखें, बता रही हैं अनीता सहरावत।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

सर्द मौसम में चाय की प्याली जितना सुकून देती है, गुनगुनी धूप जितना लुभाती है, कोहरे, कुहासे का लुत्फ आग की ताप से ही सेंक ही मिल पाता है। हर शख्स के पास अपनी वजहें हैं इस मौसम को पसंद-नापसंद करने की। मगर इन सबसे अलग हर मौसम अपने साथ कुछ परेशानियां भी साथ लेकर आता है। खुश्क त्वचा सर्दियों में एक आम परेशानी है। खारिश, खुजली से शुरू होकर मुश्किल त्वचा रोगों की आगत का सबब बन सकती है फटी त्वचा। दरार भरे हाथ-पैर दिखने में जितने भद्दे लगते हैं उनका दर्द भी उतना ही दुखदायी होता है। ऐसे में खासकर सर्दी में त्वचा की देखभाल बहुत जरूरी होती है।

सूखती क्यों हैं त्वचा
हमारी त्वचा की बाहरी परत में प्राकृतिक तेल और मृत कोशिकाएं होती हैं, जो खाल के भीतर पानी और नमी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखती हैं। इस नमी के चलते हमारी त्वचा नर्म और चिकनी बनी रहती है। सर्दियों में लगातार लुढ़कता पारा हमारी त्वचा को बुरी तरह से प्रभावित करता है। ठंड के चलते हवा में उमस कम हो जाती है, जो हमारी खाल से नमी छीन लेती है। उस पर गरम पानी से नहाना त्वचा की बची-खुची नमी को भी सोख लेता है। सर्दियों में त्वचा में रूखेपन की समस्या आम है, लेकिन कुछ लोगों की त्वचा कुछ ज्यादा संवेदनशील होने की वजह से उन्हें औरों के मुकाबले ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। मसलन, दाद-खुजली, एलर्जी, अस्थमा और दूसरे त्वचा संबंधी रोगों का पुराना रिकार्ड रखने वाले लोगों की ठंड में दिक्कतें ओर बढ़ जाती हैं। इसके अलावा वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन, तनाव, थकान या फिर त्वचा पर कठोर साबुन का इस्तेमाल भी आपकी त्वचा को और ज्यादा खुश्क बना सकता है। हाथ-पैरों में सूजन, लालिमा, दाने-फोड़े, खारिश त्वचा में खुश्की के आम लक्षण हैं। आमतौर पर हाथ-पैरों पर ही इसका ज्यादा असर रहता है। लेकिन कई बार यह पूरे शरीर में भी फैल जाती है।

समस्या से कैसे निपटें
मॉइशचाराइजर, क्रीम, लोशन ठंड की खुजली से निपटने का आसान और सबसे पहला विकल्प है। यह हमारे शरीर की नमी को खाल के भीतर ही लॉक कर देते हैं। कम से कम दिन में दो बार इनका इस्तेमाल जरूर करें। नहाने के तुरंत बाद पूरे शरीर को मॉइशचराइज करना बेहद जरूरी है, क्योंकि साबुन आप भले ही कोई भी इस्तेमाल करें, गरम पानी और साबुन के इकट्ठे इस्तेमाल के बाद त्वचा का रूखा होना लाजमी है। ठंड में गरम पानी से देर तक नहाना और शरीर को सेंकना भी त्वचा के लिए खतरे की घंटी है। ज्यादा गरम पानी से नहाने की बजाय हल्के गुनगुने पानी से ही नहाएं। पेट्रोलियम जैली भी खाल में नमी बनाए रखने के लिए एक अच्छा विकल्प है। जिनकी त्वचा ज्यादा रूखी रहती है, उनके लिए रात में सोने से पहले जैली लगाना सही है। जैली में ज्यादा चिकनाहट होने की वजह से दिन में इसे लगाना सही नहीं। क्योंकि यह धूल-मिट्टी को खींचेगी, जिससे फुंसियां-मुहांसे होने का डर है। अगर आप पेट्रोलियम जैली का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, तो वैसलीन या पेट्रोलियम रहित उत्पाद भी आजमा सकते हैं। इसके अलावा प्राकृतिक तेल- नारियल और ऑलिव का तेल भी त्वचा में नमी बनाए रखने के लिए बेहतर चुनाव है। इससे न केवल शरीर को आराम मिलेगा, बल्कि फटी त्वचा में दर्द से भी राहत मिलेगी। गांवों में तो आज भी सरसों का तेल पका कर या देसी घी से ही त्वचा को ठंड से बचाया जाता है। कोशिश करें कि सप्ताह में एक बार तेल से शरीर की मालिश जरूर करें, मसाज रूखेपन से त्वचा को बचाने का सबसे कारगर तरीका है।

सर्द मौसम में गरम और ऊनी कपड़े बड़े सुहाते हैं, लेकिन हमारी त्वचा को ये ज्यादा रास नहीं आते। जिनकी खाल ज्यादा रूखी होती है उन्हें खुजली और खारिश की समस्याएं ज्यादा होती हैं। ऊनी कपड़ों का शरीर से सीधे संपर्क होने से बचाएं। यह सही है कि ठंड में अलग-अलग स्टाईल और डिजाइन के कपड़ों से सजने का शौक हर कोई रखता है। साल भर में यही एक ऐसा मौसम होता है, जिसमें आप बेहिसाब तरीकों से तैयार हो सकते हैं। लेकिन अंदरूनी कपड़ों में सूती कपड़ों को ही तवज्जो दें। क्योंकि गरम कपड़ों से शरीर की दूरी बनाए रखने में ये फिल्टर की तरह काम करते हैं। ये गरम कपड़ों की गरमाहट तो शरीर तक जाने देते हैं, लेकिन त्वचा को उनकी रगड़ से बचा कर भी रखते हैं। यह तो हुई त्वचा की बाहरी देखरेख। मगर त्वचा को हर मौसम में तंदरुस्त रखने के लिए उसे भीतरी पोषण देना सबसे जरूरी है। हमारे शरीर में सत्तर प्रतिशत पानी है। सर्दियों में हम कम पानी पीते हैं, इस तरह पानी की कमी शरीर में खुश्की की एक बड़ी वजह बनती है। त्वचा की सेहत सुधारने में सबसे पहला कदम है कि खूब पानी पिएं और शरीर में पानी की कमी न होने दें। विशेषज्ञ दिन में कम से कम तीन लीटर पानी पीने की सलाह देते हैं। इसके अलावा खूब सारे रसीले फल और सब्जियां सर्दियों के मौसम का तोहफा हैं। फलों, हरी पत्तेदार सब्जियों की खाने में मात्रा बढ़ाएं। साथ ही सूखे मेवों- बादाम, अखरोट, किशमिश, पिस्ता, काजू को दैनिक आहार में जरूर जगह दें। नॉन-वेज खाने के शौकीन हैं तो मछली अपने आहार में जरूर शामिल करें। मछली में मौजूद ओमेगा तीन और छह त्वचा की रौनक बढ़ाने में सबसे ज्यादा कारगर है।

एक और खास बात, त्वचा की जब हम बात करते हैं तो चेहरे से लेकर पांवों तक का खयाल रखते हैं। लेकिन सिर को अक्सर भूल जाते हैं। बाकी शरीर की तरह हमारी खोपड़ी भी शुष्क होती है और उसे भी तरलता और पोषण की दरकार रहती है। इसकी अनदेखी के चलते रूसी यानी डैंड्रफ भी आजकल एक आम समस्या है। ठंड में यह खुश्की और बढ़ जाती है। विज्ञापनों में ढेरों शैंपू, कंडीशनर, जैल बालों की खूबसूरती बढ़ाने का दावा ठोंकते हैं और हम बड़े शौक से इन्हें आजमाते भी हैं। स्टाइलिश दिखने के लिए जैल और रंग-बिरंगे रासायनिक रंगों का इस्तेमाल हमारी खोपड़ी की सेहत के लिए कतई फायदेमंद नहीं है। फिर भी अगर आप इनके आर्कषण से अभिभूत हैं तो कम से कम सिर को उसकी खुराक देने में कंजूसी न करें। यानी सिर में नियमित तेल जरूर लगाएं। सप्ताह में कम से कम एक बार सिर की चंपी जरूर करें। नहाने से आधा घंटा पहले तेल लगाने की औपचारिकता से बचें और कम से कम बारह घंटे सिर में तेल को टिकने दें। ये कोशिशें छोटी हैं, पर इनके परिणाम सर्द मौसम में गरमाहट देने के लिए काफी हैं।

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