ताज़ा खबर
 

दाना-पानी: बिन चटनी सब सून

सर्दी में पाचन तंत्र दूसरे मौसमों की अपेक्षा अधिक बेहतर रहता है, जो कुछ खाओ, आसानी से पच जाता है। इन दिनों खाने-पीने की चीजें भी बहुतायत में मिलती हैं। इनमें कई ऐसी चीजें होती हैं, जो हमारे शरीर को साल भर स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती हैं।

Author Updated: December 13, 2020 3:26 AM
दाना-पानीस्वाद से भरपूर मीठी शलजम और अमरूद की चटनी।

मानस मनोहर

कहते हैं कि सर्दी का खाया शरीर को भरपूर लगता है। इसलिए कि सर्दी में पाचन तंत्र दूसरे मौसमों की अपेक्षा अधिक बेहतर रहता है, जो कुछ खाओ, आसानी से पच जाता है। इन दिनों खाने-पीने की चीजें भी बहुतायत में मिलती हैं। इनमें कई ऐसी चीजें होती हैं, जो हमारे शरीर को साल भर स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती हैं। इस बार कुछ ऐसी ही चीजें।

चटपटी हल्दी
हल्दी के गुणों से तो सभी परिचित हैं। यह शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर निकालती है। घाव भरने में मदद करती है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। इस समय जब कोरोना विषाणु के प्रभाव को रोकने के लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, उसमें हल्दी एक सर्वोत्तम खाद्य है। इस मौसम में कच्ची हल्दी की फसल तैयार होती है। बाजार में बहुतायत में उपलब्ध होती है।

कच्ची हल्दी ऊपर से देखने में कुछ-कुछ अदरक की तरह होती है। इससे सब्जी और चटनी पारंपरिक रूप से बनाई जाती है। इन दिनों अगर गरम दूध में कच्ची हल्दी डाल कर पीएं या चाय में इस्तेमाल करें। हल्दी का हलवा बना कर खाएं या बाजरे के लड्डू में इसे मिला लें तो सेहत की दृष्टि से बहुत गुणकारी होता है। सर्दी में कच्ची हल्दी का सेवन करने से ठंड लगने का खतरा भी नहीं रहता। शरीर गरम रहता है।

कच्ची हल्दी को अपने नियमित आहार में शामिल करने का सबसे आसान तरीका यह है कि इसकी चटनी बना कर रख ली जाए और भोजन के समय एक चम्मच लेकर खा लिया जाए। कच्ची हल्दी की चटनी बनाना बहुत आसान है।

ढाई सौ ग्राम कच्ची हल्दी लेकर पहले खुरच कर उसका छिलका उतार लें। फिर कद्दूकस पर सारी हल्दी को घिस लें। इसमें डालने के लिए करीब सौ ग्राम गुड़ तोड़ कर अलग रख लें। अगर अधिक मीठा पसंद करते हैं तो डेढ़ सौ ग्राम गुड़ ले लें। चीनी न लें, गुड़ का ही इस्तेमाल करें। फिर इसमें कुछ खड़े मसालों की जरूरत पड़ती है। इसके लिए एक-एक चम्मच की मात्रा में मेथी दाना, साबुत धनिया, जीरा, सौंफ और अजवाइन ले लें। इसके अलावा आधा चम्मच काला नमक, एक चम्मच धनिया पाउडर और एक से डेढ़ चम्मच कुटी लाल मिर्च की जरूरत पड़ेगी। ध्यान दें कि ये सारी चीजें औषधीय गुणों से भरपूर हैं।

अब एक कड़ाही में दो चम्मच तिल या मंूगफली का तेल गरम करें। चाहें तो देसी घी भी ले सकते हैं, पर सर्दी में ठंडा होने के बाद घी जम जाता है, इसलिए चटनी कड़ी हो जाएगी। ऐसे में तेल बेहतर रहता है। तेल गरम हो जाए तो आंच मध्यम कर दें। अब सारे खड़े मसालों का तड़का दें। तड़का तैयार हो जाए, तो उसमें कद्दूकस किया हुआ हल्दी डाल दें। एक मिनट चलाते हुए सारी चीजों को मिला लें। ऊपर से काला नमक डालें और ढक्कन लगा दें।

करीब सात-आठ मिनट तक पकने दें। हल्दी अपना पानी छोड़ कर सूखने लगेगी। अब इसमें तोड़ा हुआ गुड़, लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर डाल कर अच्छी तरह पकाएं। चलाते हुए पांच मिनट तक पकाएं। जब चटनी अच्छी तरह गाढ़ी हो जाए, तो आंच बंद कर दें। इस चटनी को किसी कांच के बर्तन में भर कर रखें। जब भी भोजन करें, एक चम्मच चटनी लेकर साथ में खा लिया करें। यह चटनी दस-पंद्रह दिनों तक खराब नहीं होती है।

मीठी शलजम
शलजम को सब्जी और सलाद से अलग अगर चटनी की तरह बना कर रख लिया जाए, तो कई दिन तक खाया जा सकता है। मीठी शलजम बनाना बहुत आसान है। इसके लिए भी बहुत मशक्कत नहीं करनी पड़ती। ढाई सौ ग्राम शलजम लें। चाकू या पीलर से इसका छिलका उतार लें। फिर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें या फिर मोटे कद्दूकस पर कस लें। एक कड़ाही में एक से डेढ़ चम्मच तेल गरम करें। उसमें मेथी दाना, जीरा, सौंफ, अजवाइन और हींग का तड़का दें। तड़का तैयार हो जाए तो उसमें शलजम को छौंक दें। आंच को मध्यम रखें। चलाते हुए सारी चीजों को मिला लें। ऊपर से आधा चम्मच नमक डालें और कड़ाही को ढंक दें।

अब इसमें डालने के लिए सौ ग्राम गुड़ तोड़ कर रख लें। शलजम को देखें, वह अपने पानी से ही पक कर नरम हो चुकी होगी। अब उसमें गुड़, एक चम्मच कुटी लाल मिर्च, एक चम्मच अमचूर और आधा चम्मच धनिया पाउडर डाल कर अच्छी तरह मिलाएं। गाढ़ा होने तक पकाएं। मीठी चटपटी शलजम तैयार है।

अमरूद की चटनी
कहते हैं कि सर्दी के मौसम में अगर सुबह नियमित अमरूद खाया जाए, तो पुरानी से पुरानी कब्ज भी समाप्त हो जाती है। यों बरसात के समय भी अमरूद की फसल तैयार होती है, मगर सर्दी वाले अमरूद का स्वाद लाजवाब होता है। आजकल अमरूद की जेली, शेक, आइसक्रीम वगैरह भी बनाए जाते हैं, मगर इसकी चटनी बना कर खाएं, उसकी बात ही कुछ और होती है।

अमरूद की चटनी बनाने की प्रक्रिया भी बाकी चटनियों की तरह ही होती है। बस इसमें ध्यान रखने की जरूरत होती है कि बीच का बीज वाला हिस्सा न लें। चटनी के लिए ताजा और हरे अमरूद लेना अच्छा रहता है। दो अमरूद लें। इन्हें धोकर काट लें और चाकू से बीज वाला हिस्सा निकाल कर अलग कर दें। बाकी हिस्से को टुकड़ों में काट लें। जो बीज वाला हिस्सा निकाला है, उसे मुंह में घुलाते हुए निगल जाएं। अमरूद के बीज को चबाने का प्रयास नहीं करना चाहिए, दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है।

अब इसमें डालने के लिए चार-छह हरी मिर्च, थोड़ा हरा धनिया, चार-पांच लहसुन की कलियां ले लें। जो लोग लहसुन पसंद नहीं करते वे इसे छोड़ भी सकते हैं। इसके अलावा एक चम्मच सफेद तिल को गरम तवे पर रख कर सेंक लें। फिर अमरूद के साथ इन सारी चीजों को मिक्सर में डालें, चौथाई गिलास पानी डालें और जरूरत भर नमक डाल कर चटनी पीस लें। इस चटनी को ताजा-ताजा खाने का ही मजा होता है। अगर बच जाए तो दो से तीन दिन के भीतर खा लें।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 शख्सियत: सृजन का मुक्ति प्रसंग राजकमल चौधरी
2 स्वास्थ्य: दांतों की देखभाल से जुड़ी अहम बातें, कायम रहे सेहत की मुस्कान
3 विचार बोध: लोकमन और तीन स्वप्न
ये पढ़ा क्या?
X