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दाना-पानी: दाल का दम

दाल हर घर में बनती है और तरह-तरह से बनती है। दाल के बिना भोजन अधूरा है। आमतौर पर दाल को उबाल कर तड़का लगा लिया जाता है। मगर दाल के साथ कुछ सब्जियों का मेल करके बनाएं, तो उसका स्वाद अलग ही होता है। इस तरह दाल का पोषण और भी बढ़ता है और भोजन में कुछ नयापन आ जाता है। इस बार कुछ ऐसे ही प्रयोग।

दाना पानीस्वादिष्ट दाल।

मानस मनोहर

मूंगदाल बीन्स
जब भी दाल के साथ सब्जियों का मेल करना हो, तो ध्यान रखना चाहिए कि हर दाल के साथ यह मेल सही नहीं बैठता। सब्जियों के साथ मूंगदाल का मेल बहुत अच्छा बनता है। मूंगदाल के बारे में तो आप जानते ही हैं कि यह बहुत जल्दी पच जाती है और स्वाद भी बहुत बढ़िया आता है। मूंगदाल के साथ पालक, बथुआ, मेथी जैसे साग का मेल तो करते ही हैं, पर सब्जियों का मेल कम ही लोग करते हैं। पर, एक बार बीन्स के साथ इसका मेल करके देखिए,लाजवाब बनेगी।

इसके लिए सबसे पहले धुली मूंगदाल को अच्छी तरह धोकर करीब आधे घंटे के लिए भिगो दें। बीन्स को धोकर छोटे-छोटे आकार में काट लें। बीन्स को काटने के कई तरीके हैं। कुछ लोग इसे तिरछा करके काटते हैं। कुछ लोग लंबा रखते हैं। आपको जैसा पसंद हो, वैसा काटें।

अब एक कड़ाही में दो चम्मच घी गरम करें। आंच को तेज रखें। उसमें चलाते हुए दो से तीन मिनट के लिए बीन्स को तल लें। इस तरह बीन्स थोड़ी पक जाती है और फिर अंत तक इसका रंग हरा बना रहता है। इसे कड़ाही से बाहर निकाल कर ऊपर से थोड़ा-सा नमक छिड़क दें और ठंडा होने दें। फिर उसी कड़ाही में बचे हुए घी में जीरा, अजवाइन, हींग का तड़का दें। तड़का तैयार हो जाए तो बारीक कटा प्याज, लहसुन, हरी मिर्च और अदरक डाल कर नरम होने तक भूनें। उसी में भिगोई हुई मूंग दाल डालें और थोड़ा-सा पानी डाल कर ऊपर से जरूरत भर का नमक और हल्दी डाल कर ढक्कन लगा दें। आंच हल्की कर दें। ध्यान रखें कि मूंगदाल जब भी बनानी हो, कड़ाही, हांड़ी या पैन में बनाएं। कुकर में न बनाएं, नहीं तो मूंगदाल बहुत कोमल होती है और गल कर जल्दी ही पानी की तरह हो जाती है।

पांच-सात मिनट पकने के बाद जब दाल का झाग उठ कर बैठ जाए, तो उसमें तली हुई बीन्स डाल दें और एक बार चला दें। अब इसमें थोड़ा-सा सब्जी मसाला या धनिया पाउडर, जीरा पाउडर और लाल मिर्च पाउडर डाल दें। फिर ढक्कन लगा दें। हमें दाल को बिल्कुल गलाना नहीं है, बस वह पक कर नरम हो जाए और साबुत बनी रहे। बीन्स में भी थोड़ा कचकचापन बना रहना चाहिए, इसलिए उसे भी अधिक नहीं पकाना है। सो, शुरू में ही जब इसमें पानी डालें तो मात्रा का ध्यान रखें।

जब पानी सूख जाए और दाल अच्छी तरह पक कर नरम हो जाए, तो आंच बंद कर दें। मूंगदाल-बीन्स तैयार है। इस पर कटा हरा धनिया, हरी मिर्च और अदरक के लच्छे डाल कर गरमा-गरम परोसें। इसे रोटी या परांठे के साथ खा सकते हैं।

मसूरदाल-सीताफल
मसूरदाल को नवाबी दाल कहा जाता है। कहावत भी है- यह मुंह और मसूर की दाल! मसूरदाल को पकाने में काफी सावधानी बरतनी पड़ती है और खाने में काफी लजीज होती है। यह मूंगदाल की तरह ही पचने में बहुत आसान होती है। हालांकि इसे कुकर में पकाएं तो फटाफट तैयार हो जाती है, पर दालों के मामले में जल्दबाजी उनके स्वाद को खराब कर देती है। खासकर मसूरदाल का स्वाद तो इसी बात पर निर्भर करता है कि उसे किस तरह और कितनी देर पकाया गया है। इसलिए इसे पकाने में जल्दबाजी कभी न करें और कुकर के बजाय हांडी, कड़ाही या पैन का ही इस्तेमाल करें। बहुत सारे होटलों में मसूर की दाल इसलिए लोगों को पसंद आती है कि उसे दस से बारह घंटे तक पकाया जाता है। इसलिए आप समझ सकते हैं कि इसे पकाने में कितने धैर्य की जरूरत होती है।

मसूरदाल के दो प्रकार होते हैं- छिलके वाली और बिना छिलके वाली साबुत। सीताफल के साथ मसूरदाल बनाने के लिए बिना छिलके वाली साबुत दाल लें। इसके लिए सीताफल पका हुआ यानी लाल वाला लें। मसूरदाल को धोकर आधे घंटे के लिए भिगो दें। भिगोते समय पानी इतना ही लें कि दाल के ऊपरी हिस्से तक आए। सीताफल का छिलका और भीतर का बीज वाला हिस्सा निकाल कर मध्यम आकार के टुकड़ों में काट लें। इसके अलावा इसमें डालने के लिए आधा कच्चे नारियल की जरूरत पड़ेगी। कच्चे नारियल को थोड़ा पानी डाल कर ग्राइंड कर लें, जिससे कि वह महीन बुरादा बन जाए।

अब एक कड़ाही में दो चम्मच घी गरम करें। उसमें मेथी दाना, जीरा, दो-तीन लौंग, चार-छह साबुत काली मिर्चें, एक तेजपत्ता डाल कर तड़का दें। बारीक कटा हुआ प्याज, लहसुन, अदरक, हरी मिर्च और चुटकी भर हींग डाल कर हल्की आंच पर पारदर्शी होने तक भून लें। इसमें पानी समेत भिगोई हुई मसूरदाल डाल दें। ऊपर से नमक और हल्दी पाउडर डाल कर ढक्कन लगा दें। आंच को बिल्कुल धीमी कर दें। दाल को पंद्रह मिनट तक पकने दें।

जब झाग उठ कर बैठ जाए, तो उसमें कटा हुआ सीताफल डालें और इसके साथ ही थोड़ा-सा सब्जी मसाला, धनिया पाउडर और लाल मिर्च पाउडर डाल कर मिला लें। फिर से ढक्कन लगा दें। ध्यान रखें कि अगर पानी सूख गया है, तो थोड़ा-सा गरम पानी डालें और ढक दें। पंद्रह मिनट बाद ढक्कन खोलें और उसमें कच्चे नारियल का बुरादा मिला कर फिर से ढक्कन बंद कर दें। करीब पंद्रह मिनट तक पकने दें।

ढक्कन खोल कर देखें कि पानी सूख तो नहीं गया है। दाल को पक कर गलना नहीं चाहिए। बस नरम हो जाए और उसके दाने दिखते रहें, पर सब्जी और दाल के रस का मलाईदार गाढ़ा रस बन जाए। एक बार ठीक से सारी चीजों को मिल लें। पानी बिल्कुल नहीं सूखना चाहिए, हल्का रहे, पर इतना भी न रहे कि परोसते समय बहने लगे। बस सब्जी को लबाबदार बनाना है। इसलिए दाल के दाने और सीताफल के टुकड़े साबुत दिखते रहें, बस पक कर नरम हो जाएं।

अब आंच बंद कर दें और दाल को निकाल लें। तड़का पैन में दो चम्मच घी गरम करें। उसमें जीरा, चुटकी भर हींग और आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर का तड़का तैयार करें और दाल के ऊपर डाल दें। इसे रोटी या पराठे के साथ गरमागरम परोसें। ल्ल

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