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निशुल्क दवा की तरह हैं सूर्य की किरणें – सेहत को कराएं धूप स्नान

धूप सेंकने के बाद शरीर में गर्माहट आती है जिससे लगातार लेटे रहने के कारण शरीर में जो दर्द होता है उससे भी आराम मिलता है। हमारे घरों में बच्चों और बुजुर्गों की धूप में मालिश करने का चलन रहा है। यह मालिश उनके शरीर को ताजगी से भर देती है।

सुबह-सुबह गुनगुनी धूप में बैठना सेहत के लिए न केवल अच्छा होता है, बल्कि इससे कई तरह के विटामीन भी शरीर को मिलते हैं।

मौसम एक बार फिर से बदलाव के मूड में है। देशभर में अक्तूबर की आहट के साथ ही सर्दियों की खनक सुनाई देने लगी है। कुछ दिनों के बाद से ही चुभने वाली धूप राहत का सबब बनेगी। खास कर कोरोना संकट के इस समय में अब अपनी सेहत को धूप दिखाने की तैयारी कर लें। वैसे शरीर के लिए धूप सालों भर जरूरी होती है। लेकिन सर्दियों में इसका खासा महत्व हो जाता है क्योंकि इस समय हमारा शरीर धूप को बर्दाश्त कर पाता है। दुनिया भर के कई हिस्सों में धूप को ‘निशुल्क दवा’ भी कहा जाता है।

दरअसल, धूप शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाती है। धरती के उन हिस्सों पर जहां धूप की किरणें कम समय के लिए मिलती हैं वहां धूप स्नान जैसी क्रिया का लोकप्रिय होना इसकी अहमियत बताता है।

शरीर के लिए जरूरी
कई तरह के विटामिन हमारी सेहत की पहरेदारी करते हैं। शरीर में हर तरह के विटामिन का संतुलन होना आवश्यक होता है। विटामिन डी एक ऐसा तत्व है जिस पर बहुत शोध हो रहे हैं। एक स्वस्थ शरीर में विटामिन डी की मात्रा 60 नैनोग्राम तक होती है। अगर इसकी मात्रा 30 नैनोग्राम तक हो जाती है तो विटामिन डी की पूरक दवाएं लेनी पड़ती हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि सूरज की रोशनी इसका कुदरती स्रोत है। विटामिन डी की कमी से हमारा शरीर कैल्शियम का अवशोषण नहीं कर पाता है जिसकी वजह से हमारी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। हड्डियों की मजबूती के लिए विटामिन डी की उचित मात्रा लेना जरूरी है। धूप ऊतकों में आक्सीजन की आपूर्ति भी करती है। अगर आप मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक शारीरिक थकान और हाथ-पैर के सुन्न होने से परेशान हैं तो ये आपके शरीर में विटामिन डी की कमी के लक्षण हो सकते हैं।

शोध बताते हैं कि धूप के जरिए हम अपने शरीर की जरूरत का नब्बे फीसद विटामिन डी का हिस्सा हासिल कर सकते हैं। वैसे तो मछली को भी विटामिन डी का अहम स्रोत बताया जाता है लेकिन इसका उपभोग करना सबके लिए संभव नहीं हो पाता है।

त्वचा से लेकर तनाव तक
त्वचा शरीर का एक ऐसा हिस्सा है जो फंगल संक्रमण का शिकार हो जाता है। इससे बचने के लिए शरीर के ज्यादा से ज्यादा हिस्से को नियमित धूप दिखाना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें कि धूप सेंकते वक्त शरीर का कम से कम हिस्सा ढका हुआ हो। ठंड के दिनों में धूप की कमी अवसाद और तनाव का कारण बन सकती है। खास कर अगर घर में कोई बुजुर्ग हों जो खुद ज्यादा चल-फिर नहीं सकते उनके शरीर के लिए धूप बहुत आवश्यक है। उनके लिए बारामदे या किसी ऐसी जगह पर धूप सेंकने का इंतजाम करना चाहिए जहां वे आसानी से पहुंच सकें।

धूप सेंकने के बाद शरीर में गर्माहट आती है जिससे लगातार लेटे रहने के कारण शरीर में जो दर्द होता है उससे भी आराम मिलता है। हमारे घरों में बच्चों और बुजुर्गों की धूप में मालिश करने का चलन रहा है। यह मालिश उनके शरीर को ताजगी से भर देती है।

धूप सेंकने से पीनियल ग्लैंड भी सक्रिय होता है जिस कारण नींद भी अच्छी आती है। जो लोग हमेशा घरों में बंद रहते हैं और घर से निकल कर वातानुकूलित गाड़ियों में ही सफर करते हैं वे अवसाद और तनाव के शिकार हो सकते हैं।

धूप नहीं तो अवसाद
जिन इलाकों में लंबे समय तक धूप नहीं निकलती वहां के लोग अवसाद से ज्यादा जूझते हैं। जाड़े के दिनों में शीतलहर के समय बहुत से लोगों को अवसाद की शिकायत होती है।

जब हम धूप में बैठते हैं तो हमारे शरीर से सेरेटॉनिन और एंडोर्फिन नाम के हारमोन का ज्यादा स्राव होता है। यह हारमोन हमें अवसाद से बचाता है। अस्थमा के मरीजों के लिए धूप अत्यंत फायदेमंद है।

सुबह-शाम की धूप
डॉक्टरों की सलाह मानें तो शरीर को रोजाना आधे से एक घंटे तक की धूप दिखानी जरूरी है। यह भी कि धूप सेंकने के लिए सुबह या शाम के समय को ही बेहतर माना जाता है। सुबह धूप निकलने से 12 बजे तक और शाम में चार बजे के बाद सूर्यास्त तक की धूप अच्छी होती है।

दोपहर की धूप में पराबैंगनी किरणों की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए उससे बचना चाहिए। धूप सेंकते समय आंखों को प्रत्यक्ष धूप की दिशा में नहीं रखना चाहिए। बहुत ज्यादा देर भी धूप नहीं सेंकना चाहिए। इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है।

(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।)

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