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आंखों की रेटिना को प्रभावित करती है गर्मी, इन छोटी-छोटी बातों का रखें ख्याल

हवा में उड़ती धूल और उसमें छिपे अनेक तरह के बैक्टीरिया आंखों को संक्रमित कर सकते हैं। ज्यादा देर धूप में रहने से आंखों में चिपचिपापन और पानी गिरने की समस्या पैदा हो जाती है।

Author April 14, 2019 3:54 AM
आंखों को आराम देने के लिए गहरी और भरपूर नींद लेना बहुत जरूरी है।आंखों को आराम देने के लिए गहरी और भरपूर नींद लेना बहुत जरूरी है।

अप्रैल में नवरात्र बीतने के बाद धूप और गरमी में तेजी आने लगती है। हवा लू का रूप लेने लगती है। इसके चलते शरीर में पानी की कमी का खतरा तो रहता ही है, आंखों पर भी बुरा असर पड़ता है। धूप की चमक आंखों की रेटिना को प्रभावित करता है। हवा में उड़ती धूल और उसमें छिपे अनेक तरह के बैक्टीरिया आंखों को संक्रमित कर सकते हैं। ज्यादा देर धूप में रहने से आंखों में चिपचिपापन और पानी गिरने की समस्या पैदा हो जाती है। ऐसे में आंखों की सुरक्षा के लिए खास सावधानी बरतने की जरूरत है। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार गरमी में आंखों में एलर्जी, कंजंक्टिवाइटिस, आंखों का सूखापन और स्टाइज की समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसलिए गरमी में अपनी आंखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान से उपाय आजमा सकते हैं।

ठंडे पानी का छींटा मारें
चूंकि आंखों की प्रकृति ठंडक-पसंद है, इसलिए गरमी के दौरान दिन में तीन बार पानी से धीरे-धीरे छींटे मार कर आंखें धोनी चाहिए। आंखें साफ रखें। जब भी बाहर से चल कर आएं, तो थोड़ी देर रुक कर बेसिन पर जाकर आंखों पर पानी के छींटे जरूर मारें। पूरी गरमी इसे नियम बना लें। इससे आंखों में गई धूल और गंदगी बाहर निकलेगी, आंखों को ठंडक मिलेगी और किसी भी तरह के संक्रमण का खतरा कम होगा।

चश्मे का उपयोग
गरमी की तेज धूप आंखों के रेटिना पर बुरा प्रभाव डालती है। इसलिए इससे बचने के लिए पराबैगनी किरणों को रोकने वाले कांच के सनग्लासेज पहनना जरूरी होता है। सनग्लासेज सिर्फ फैशन का सामान नहीं, बल्कि बल्कि आंखों की सुरक्षा के लिए एक जरूरत है। अत्यधिक ताप से आंखों को बचाने के लिए आपको हमेशा ऐसे सनग्लासेज का चुनाव करना चाहिए, जो आपकी दोनों आंखों को अच्छी तरह ढंकते और पराबैगनी किरणों के प्रभाव को रोकते हों। आपके लेंस का रंग परावर्तन योग्य रोशनी के अस्सी प्रतिशत को रोकता हो, पर नब्बे प्रतिशत से अधिक नहीं, क्योंकि ऐसे में आपके लिए देखना मुश्किल हो जाएगा।

भरपूर नींद लें
आंखों को आराम देने के लिए गहरी और भरपूर नींद लेना बहुत जरूरी है। सो, पूरी नींद लेने में लापरवाही न बरतें। कम से कम सात-आठ घंटे सोने से आंखें चुस्त और दुरूस्त बनी रहती हैं। चाहें तो सोने का समय रात और दिन दोनों को मिला कर पूरा कर सकते हैं।

स्वीमिंग पूल में आंखों का खयाल
गरमी में काफी लोग स्वीमिंग पूल में तैरने के लिए जाते हैं। खासकर बच्चों को देर तक पानी में रहना बहुत भाता है। मगर स्वीमिंग पूल चूंकि एक से अधिक लोग इस्तेमाल करते हैं, इसलिए उसके पानी में आंखों के संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए कभी भी बिना स्वीमिंग गॉगल के स्वीमिंग पूल में न उतरें, तैराकी न करें। इससे आंखों में संक्रमण का खतरा रहता है।

आंखों की मालिश
शरीर के जिस भी अंग की मसाज या मालिश की जाती है वहां खून का संचार बढ़ जाता है। आंखों के अंदर तो तेल डाला नहीं जा सकता, लेकिन उसके आसपास की जगह पर मालिश जरूर की जा सकती है। बादाम रोगन से आंखों के आसापास उंगलियों को हल्का दाब देते हुए गोलाई में मालिश करें। इससे आंखों के इर्दगिर्द की त्वचा पुष्ट होती और आंखों को स्वास्थ्य लाभ मिलता है। इसके अलावा दिन में एक बार आंखों का व्यायाम अवश्य करें।

गुलाब जल डालें
अगर आंखों में थकान महसूस हो, तो गुलाब जल मिश्रित पानी में साफ रूई भिगो कर आंखों पर रखने से राहत मिलती और ताजगी महसूस होती है। इसके अलावा, आंखें बंद करके उस पर खीरे के टुकड़े भी रखे जा सकते हैं। इससे आंखों को ठंडक मिलती है। खीरा आंखों को ठंडक देता और अंखों के किनारे पड़ी कालिमा को भी दूर करता है।

एसी के सामने न बैठें
सर्दियों में तो हम आंखों में सूखापन न आने देने के लिए बहुत कोशिशें करते हैं, लेकिन गरमी में यह सोच कर कोई कोशिश नहीं करते कि इस वक्त आंखों में सूखापन नहीं आता। गरमी में एसी की हवा में देर तक बैठने से आंखों में सूखापन आता है। आंखों की पेशियां सिकुड़ने लगती हैं, जिसके चलते उनमें खुजली होती रहती है। इसलिए कभी एयरकंडीशनर के एकदम सामने न बैठें।

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