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व्रत उपवास कुछ व्यंजन खास

नवरात्रि के साथ व्रत-उपवास के दिन शुरू हो जाते हैं। सेहत की दृष्टि से भी खानपान को लेकर यह विधान उचित है। दरअसल, यह मौसम ग्रीष्म और शीत ऋतु की संधि का होता है। इसमें पाचन तंत्र गड़बड़ रहता है। इसलिए उपवास और हल्के सुपाच्य व्यंजन स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त होते हैं। इस बार कुछ ऐसे ही व्यंजन।

व्रत उपवास कुछ व्यंजन खास
साबूदाना टिक्की और केला अप्पम।

मानस मनोहर

केला अप्पम
अप्पम दरअसल, गुलगुला ही होता है। दक्षिण में इसे अप्पम कहते हैं। उत्तर भारत में इसे गुलगुला कहते हैं। गुलगुला बहुत प्राचीन मीठा व्यंजन है। इसे लेकर तो कहावत भी प्रसिद्ध है- गुड़ खाए गुलगुले से परहेज। अप्पम यों तो गेहूं या चावल के आटे से बनता है, पर इसकी जगह कुट्टू और सिंघाड़े के आटे का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

अगर व्रत और उपवास में खाना है, तो कुछ ऐसी चीज बनानी चाहिए, जो शरीर को ऊर्जा और पोषण भी दे और सुपाच्य भी हो। कई लोग व्रत-उपवास में भी इतनी सारी तली-भुनी चीजें, और मेवे वगैरह खा लेते हैं कि शरीर शुद्धि का मकसद ही हाशिए पर चला जाता है। उपवास का विधान इसलिए बनाया गया था कि शरीर की शुद्धि हो सके।

मगर आजकल कई लोगों को कुछ बीमारियों की वजह से थोड़े-थोड़े समय पर कुछ खाना होता है। ऐसे लोगों के लिए भी अप्पम उपयुक्त खाद्य है। व्रत में खाने के लिए बनाना है, तो इसमें केले या शकरकंदी का इस्तेमाल किया जा सकता है। दक्षिण में केले का उपयोग किया जाता है।

आप भी केले का अप्पम यानी गुलगुले बनाएं। अप्पम बनाना बहुत आसान काम है। इसके लिए विशेषज्ञता की जरूरत नहीं होती। यों तो अप्पम बनाने के लिए अप्पम मेकर का यानी एक विशेष बरतन का इस्तेमाल किया जाता है, मगर उसे लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं। यह अप्पम तेल में तल कर भी बनाया जाता है। उत्तर भारत में गुलगुले तो तेल में ही तले जाते हैं।

केले का अप्पम बनाने के लिए तीन से चार अच्छी तरह पके हुए केले लें। कुट्टू और सिंघाड़े का आटा बराबर मात्रा में मिला कर एक कप ले लें। इसमें डालने के लिए चौथाई कप चीनी का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर चीनी से परहेज है, तो इसकी जगह गुड़ या शहद का उपयोग कर सकते हैं। आटे को छान लें और केले को अच्छी तरह मसल लें।

अब आटा, केले और चीनी को एक साथ मिला कर गूंथें। थोड़ा-थोड़ा पानी डाल कर घोल को थोड़ा पतला बना लें, ताकि सेंकने पर अप्पम अच्छी तरह फूले। मगर घोल बहुत पतला नहीं होना चाहिए।

अब इसमें अगर चिरौंजी, किशमिश जैसे कुछ मेवे डालना चाहें, तो डाल सकते हैं। इस घोल को ढंक कर आधे घंटे के लिए रख दें ताकि सामग्री आपस में घुलमिल जाए। जब बनाना हो, तो एक बार फिर इस घोल को अच्छी तरह फेट लें।

कड़ाही में तेल गरम करें। फिर आंच मध्यम कर दें और एक बड़े चम्मच से नीबू के आकार भर का घोल उसमें डालें और पलट कर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलें। केले के अप्पम तैयार हैं। केले की जगह शकरकंदी का भी उपयोग किया जा सकता है।

जब भी भूख महसूस हो या शरीर में ऊर्जा कम हो रही हो, एक अप्पम खा लें, ताजगी आ जाएगी। इसे व्रत-उपवास के अलावा सामान्य दिनों में भी खा सकते हैं।

साबूदाना टिक्की
सिर्फ मीठा खाते रहने से मन नहीं भरता। नमकीन से ही तृप्ति मिलती है। इसलिए कुछ ऐसा नमकीन बनाएं, जो सुपाच्य और ऊर्जा देने वाला है। ऐसे में साबूदाना सबसे उपयुक्त खाद्य होता है। व्रत-उपवास में भी साबूदाना खाया जा सकता है। साबूदाने की खिचड़ी तो खाते ही हैं, कभी टिक्की भी बना सकते हैं। साबूदाने की टिक्की या पकौड़ा बनाने में भी ज्यादा झंझट नहीं होती।

साबूदाने की टिक्की बनाने के लिए साबूदाने को कम से कम दो घंटे तक भिगो कर रख दें। साबूदाना भिगोते समय सावधानी यह बरतनी चाहिए कि पानी उतना ही डालें, जितना उसकी सतह तक आए।

इस तरह साबूदाना सारा पानी सोख लेता है और फूल कर मुलायम हो जाता है। साबूदाना हमेशा अच्छी गुणवत्ता का ही लेना चाहिए, नहीं तो खराब साबूदाना गल कर पानी में घुल जाता है। दो लोगों के खाने के लिए एक कटोरी साबूदाना पर्याप्त होता है। जब तक साबूदाना फूल रहा है, तब तक दो मध्यम आकार के आलू भी उबाल लें।

साबूदाना फूल जाए तो छिलका उतार कर आलुओं को कद्दूकस करें और साबूदाने के साथ मिलाएं। अब इसमें काला नमक, आठ-दस कुटी काली मिर्च, हरा धनिया पत्ता डालें और अच्छी तरह कड़े हाथों से गूंथ कर पिट्ठी तैयार करें। जब साबूदाने की टिक्की या पकौड़ा बनाना हो, तो उसमें आलू मिलाना जरूरी होता है, क्योंकि इसी से बंधावट आती है। अब तैयार सामग्री में से थोड़ी-थोड़ी लोई तोड़ कर टिक्की का आकार दें।

कड़ाही में तेल गरम करें और उसमें टिक्कियों को सुनहरा होने तक तल लें। इसे चाहें तो इमली की या दही वाली चटनी के साथ खा सकते हैं। व्रत-उपवास में यह टिक्की ऊर्जा भी देती है और पेट को हल्का भी रखती है।

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First published on: 25-09-2022 at 04:12:00 am
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