ताज़ा खबर
 

नन्ही दुनिया: कहानी – घमंडी धोलू

रूकरा गांव में एक बहुत पुराना नीम का पेड़ था। उस पर कई प्रकार के पंछी रहते थे। उनमें आपस में बहुत प्रेम था। वे सभी एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी थे। नीम का पेड़ भी उन सबको अपनी संतान समझता था। सारे पंछी नीम को दद्दू कह कर बुलाते थे..

Author August 5, 2018 6:06 AM
बहेलियों की नजर धोलू पर पड़ गई। उन्होंने अपनी तरकीब से उसे जाल में फंसा लिया। अब धोलू गूंटर गूं करके शोर मचाने लगा।

गोविंद भारद्वाज

रूकरा गांव में एक बहुत पुराना नीम का पेड़ था। उस पर कई प्रकार के पंछी रहते थे। उनमें आपस में बहुत प्रेम था। वे सभी एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी थे। नीम का पेड़ भी उन सबको अपनी संतान समझता था। सारे पंछी नीम को दद्दू कह कर बुलाते थे। एक बार आसमान में सफेद कबूतरों का दल होकरा गांव से उड़ता हुआ निकला। तभी अचानक जोरदार आंधी आ गई। इस कारण उनमें से एक सफेद कबूतर अपने दल से पिछड़ गया। इसलिए वह कबूतर दद्दू नीम पर ही ठहर गया। आंधी गुजरने के बाद उस कबूतर की मुलाकात दद्दू नीम से हुई। दद्दू ने पूछा, ‘तुम कौन हो और यहां कैसे रह गए?’ सफेद कबूतर घबरा कर बोला, ‘नीम चाचा, मैं शहर का रहने वाला हूं। एक कबूतरबाज ने हमारे दल को पाल रखा है। रोज शाम वह हमें एक घंटे के लिए उड़ने को छोड़ता है। हम इस गांव की तरफ आ रहे थे कि तेज आंधी ने घेर लिया। मेरे सब साथी पता नहीं कहां निकल गए, लेकिन मैं आपकी शरण में आ गया।’

‘तुमने अभी तक अपना नाम नहीं बताया बेटा?’ दद्दू नीम ने पूछा। ‘जी मेरा नाम धोलू है।’ कबूतर ने कहा। दद्दू ने उसकी हिम्मत बढ़ाते हुए कहा, ‘देखो धोलू, जब तक तुम्हारे साथी नहीं मिल जाते, तब तक तुम यहां हमारे मेहमान बन कर रह सकते हो। यहां सैकड़ों पंछी रहते हैं। लो उनको भी तुम से मिलवा देता हूं।’ नीम ने जैसे ही आवाज लगाई, सभी पंछी अपने कोटर से बाहर आ गए। कालू कौए, मोनू मैना, सल्लू कबूतर, गौरी चिड़िया, टिल्लू तीतर और मीनू मोर, सबने धोलू का स्वागत किया। धोलू उनका प्यार और मेहमाननवाजी देखकर बड़ा खुश हुआ। उसको यहां का परिवेश बहुत अच्छा लगा। अलग-अलग पंछी, जिनका रंग-रूप और नस्ल भिन्न होने के बाद भी उनका आपस में एक परिवार की तरह रहना अजीब लगा। धोलू को अपने साथी के रूप में पाकर सभी पंछी स्नेह करने लगे थे।

एक दिन धोलू ने सोचा कि ‘ये सब पंछी मुझसे इसलिए सबसे ज्यादा प्यार करते हैं कि मैं इन सबसे अधिक खूबसूरत हूं।’ उस दिन से वह सबसे अलग रहने लगा। एक दिन कालू कौआ उड़ता हुआ कहीं से आया और धोलू के पास बैठ कर बोला, ‘धोलू मेरे कोटर में चल तुझे मलाई खिलाता हूं। आज सुबह ही मैं गांव के एक घर से लाया था।’ ‘अरे कालू तेरा लाया खाऊंगा क्या? कभी अपनी शक्ल देखी है! काला कलूटा सा…।’ धोलू ने नफरत से कहा। ‘क्या कह रहा है तू… कहीं मजाक तो नहीं कर रहा है मुझसे?’ कालू ने आश्चर्य से पूछा। धोलू चिल्ला कर बोला, ‘तू बड़ा सुंदर है न, जो तुझसे मजाक करूंगा। चल हट मेरी डाल से।’ कालू उदास होकर वहां से चला गया।

अगले दिन कल्लो कोयल के पास टिल्लू कबूतर आया और बोला, ‘कल्लो दीदी मेरे साथ चलो, धोलू के पास।’ ‘क्यों क्या हुआ, तुम भी तो जा सकते हो अकेले?’ ‘मैं गया था उसके पास… पर।’ टिल्लू कहते-कहते चुप हो गया। ‘क्या टिल्लू?’ कल्लो ने पूछा। ‘हां मैं उसके पास गया था… अपने जन्मदिन की पार्टी का निमंत्रण देने, तो उसने कहा कि वह मुझ जैसे गंदे रंग वाले के घर नहीं आएगा।’ टिल्लू ने आंसू पोंछते हुए जवाब दिया।

उसकी बात सुन कर कल्लो को धोलू की इस हरकत पर गुस्सा आ गया। वह तुरंत टिल्लू के साथ धोलू के पास पहुंची। धोलू ने कल्लो को देख कर भी अनदेखा कर दिया। कल्लो ने पूछा, ‘धोलू, टिल्लू ने तुम्हारे बुरे व्यवहार के बारे में मुझे बताया। क्या यह सब सच है?’ धोलू ने तुरंत जवाब दिया, ‘इसमें मैंने कौन-सी गलत बात कह दी। इन जैसे कबूतरों को कोई पालता भी नहीं है घरों में।’

‘तुम रंग भेद की नीति अपना रहे हो। यह गलत है। हम सब एक हैं। यहां नहीं चलेगा इंसानों वाला व्यवहार। हम पंछी हैं एक डाल के…।’ कल्लो ने उसे समझाते हुए कहा। इस पर धोलू ने कहा, ‘तुम कौन-सी सुंदर हो? सिर्फ आवाज सुरीली होने से कुछ नहीं होता। काली कलूटी-सी आई है मुझे समझाने।’ धोलू के इस व्यवहार से कल्लो को गुस्सा आ गया। वह दद्दू नीम के पास गई। नीम ने कल्लो से कहा, ‘तुम चिंता मत करो मैं उसे समझाऊंगा। उसे इस हरकत के लिए कोई न कोई सबक जरूर मिलेगा।’

एक दिन धोलू कबूतर अपने सुंदरता के घमंड में अकेला घूम रहा था। उसी समय कुछ बहेलिए वहां आ गए। उन्हें सुंदर पंछियों की तलाश थी। बहेलियों की नजर धोलू पर पड़ गई। उन्होंने अपनी तरकीब से उसे जाल में फंसा लिया। अब धोलू गूंटर गूं करके शोर मचाने लगा। उसकी आवाज टिल्लू कबूतर ने सुन ली। उसने धोलू को जाल में फंसा देखा तो वह तुरंत उड़ता हुआ नीम दद्दू के पास पहुंचा। दद्दू नीम ने सबको पुकारा। सारे पंछी इकट्ठा हो गए। उन सबको धोलू के पकड़े जाने की सूचना दी। पहले तो सबने घमंडी धोलू की मदद करने से इंकार दिया। लेकिन नीम ने सबको समझाते हुए कहा, ‘हमको ऐसे मौके पर उसका साथ देना चाहिए। तभी उसको सबक मिलेगा।’ ‘सबक तो अब मिल ही रहा है दद्दू! उसकी सुंदरता को ही उसकी मदद करने दो।’ कालू कौए ने गुस्से से कहा।

नीम दद्दू ने उन्हें समझाया। फिर बड़े चीलू चील और बज्जू बाज को बुलाया गया। तुरंत उनके नेतृत्व में सभी पंछियों ने बहेलियों पर हमला कर दिया। वे अपने जाल को छोड़ कर भागे। कालू कौए और कल्लो कोयल ने धोलू कबूतर को जाल से बाहर निकाला। धोलू आजाद हो चुका था, लेकिन शर्म के मारे उसकी गर्दन झुकी हुई थी। किसी ने उसे कुछ नहीं कहा। सब नीम दद्दू के पास वापस लौट आए। धोलू ने दद्दू से कहा, ‘दद्दू मुझे माफ कर दो। मैंने अपने साथियों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया फिर भी इन्होंने मेरी मदद की। वरना आज मैं कहीं दूर ले जाकर बेच दिया गया होता।’ ‘माफी मुझसे नहीं, उनसे मांगो, जिनको तुमने अपमानित किया था।’ दद्दू नीम ने कहा। धोलू ने सबसे माफी मांगी। उसकी आंखें भर आई थीं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App