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नन्ही दुनियाः कहानी – अनोखा उपहार

सोनू का जन्मदिन आ रहा था और खुशी के मारे उसके पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। उसका जन्मदिन भी पांच सितंबर यानी टीचर्स डे को पड़ता था। दिन भर वह स्कूल में मस्ती करता और शाम को पार्टी मनाने की तैयारियां करता

Author September 2, 2018 7:12 AM
प्रतीकात्मक चित्र

सोनू का जन्मदिन आ रहा था और खुशी के मारे उसके पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। उसका जन्मदिन भी पांच सितंबर यानी टीचर्स डे को पड़ता था। दिन भर वह स्कूल में मस्ती करता और शाम को पार्टी मनाने की तैयारियां करता। सोनू को वीडियो गेम खेलने का बहुत शौक था। कई दिनों से वह पापा से वीडियो गेम लाने की जिद कर रहा था। हालांकि मोबाइल पर गेम खेलने में भी वह पीछे नहीं था। इसलिए पांचवी कक्षा में ही उसे चश्मा लग गया था। वीडियो गेम पर ज्यादा ध्यान देने की वजह से पढ़ाई में भी उसका मन नहीं लगता था।

इस बार भी जन्मदिन पर उसने पापा से वीडियो गेम मांग लिया था। जन्मदिन के दो दिन पहले, दोपहर की छुट्टी में, सोनू अपने दोस्तों को घर आने के लिए कह रहा था कि तभी हिंदी वाले सर उससे बोले- ‘मुझे नहीं बुलाओगे?’ सोनू यह सुन कर खुश हो गया और उसने अपने सर को तुरंत घर का पता बता दिया। ‘उपहार क्या चाहिए?’ ‘इसे ‘वीडियो गेम’ चाहिए …’, सोनू का दोस्त मीतू बोला। सर ने सोनू को देखा और हंसते हुए चले गए। सोनू ने घर लौटते ही पापा को वीडियो गेम लाने को मना कर दिया, क्योंकि वह जानता था कि सर उसके लिए वीडियो गेम लाएंगे।

दूसरे दिन स्कूल के बाद जब सोनू घर आया तो पूरा घर रंग-बिरंगे गुब्बारों और झालरों से सजा हुआ था। शाम होने पर सभी बच्चों के हंसी-ठहाकों से घर गूंजने लगा। पर सोनू की निगाहें तो दरवाजे पर ही टिकी हुई थीं। तभी उसे सर आते हुए दिखाई दिए।
सर ने मुस्कुराते हुए एक पैकेट आगे कर दिया। सोनू ने खुशी के मारे पैकेट को गले से लगा लिया। कहां तो सोनू हमेशा सोचता था कि उसकी पार्टी कभी खत्म ही न हो और आज उसे लग रहा था कि सब जल्दी से चले जाएं, ताकि वह अपना नया वीडियो गेम खेल सके।

खेलते-कूदते नौ बज गए और स्वादिष्ट केक और खाना खाने के बाद सर के साथ ही सभी बच्चे भी चले गए। दरवाजा बंद करते ही उसने सबसे पहले सर का गिफ्ट खोला। वह खुशी से चिल्लाया- ‘है तो विडिओ गेम, पर कुछ अलग तरह का है।’जैसे ही उसने हरा बटन दबाया, तुरंत वीडियो गेम ने इतिहास के बारे में बताना शुरू कर दिया। सोनू के कुछ भी समझ नहीं आया। वह जब तक उसे बंद करता, विडियो गेम में तीन लेवल दिखने लगे। लेवल पार करने पर कुछ नई जानकारियां आ गर्इं और उसे बोनस मिलने लगा।
मम्मी खुश होते हुए बोलीं- ‘अरे वाह, तुमने तो बहुत सारी चीजें इतनी जल्दी याद कर ली।’

पहली बार सोनू ने इतिहास, भूगोल और अंग्रेजी के सवाल इतने फटाफट कर दिए। पापा बोले- ‘अगर तुम इसी तरह अपनी किताबों को भी ध्यान से पढ़ो, तो तुम्हें वे सब भी बेहद रोचक और मजेदार लगने लगेंगी।’ सोनू बोला- ‘आप सही कह रहे हो पापा, सर ने मुझे एक नए तरह से समझाया है कि अगर हम रुचि लेकर पढ़ें, तो कई बार बोरिंग दिखने वाले विषय भी मजेदार लगने लगते हैं।’मम्मी हंसते हुए बोलीं- ‘और तुमने तो सर को आज के दिन भी विश नहीं किया?’ सोनू ने तुरंत सर को फोन लगाया और कहा- ‘हैप्पी टीचर्स डे सर…’

सर की उनींदी आवाज सुनाई दी- ‘अच्छा हुआ, जो अभी कॉल कर दिया, अगर एक मिनट भी देरी हो जाती, तो बारह बज गए होते।’ सोनू सॉरी बोलने ही जा रहा था कि सर के हंसने की आवाज सुनाई दी और सोनू ने मुस्कुराते हुए फोन रख दिया।

 

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