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शशांक द्विवेदी का लेख : खतरनाक लत

टार के प्रत्येक कण में नाइट्रोजन, आक्सीजन, हाइड्रोजन कार्बन डाईआक्साइड, कार्बन मोनोआॅक्साइड और कई उड़नशील और अर्द्ध उड़नशील कार्बनिक रासायन होते हैं।
Author नई दिल्ली | June 5, 2016 07:18 am
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हर किसी को पता है कि तंबाकू स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इससे कैंसर हो सकता है, फिर भी इसका कारोबार देश में तेजी से फैल रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है परिवार और समाज के स्तर पर जागरूकता का अभाव क्योंकि सिर्फ सरकारी स्तर पर विज्ञापन देकर तंबाकू के उपयोग को कम नहीं किया जा सकता है। तंबाकू से होने वाले खतरे से बचने के लिए सबसे पहले इसके उत्पादन पर रोक लगानी होगी और इसके राजस्व मॉडल की व्यापक समीक्षा करनी पड़ेगी।

यह तय करना होगा कि भले ही तंबाकू से कोई राजस्व न मिले लेकिन गुटखा, सिगरेट को हर जगह प्रतिबंधित किया जाए, जिससे कि लोग इसे खाने के लिए हतोत्साहित हों। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार तंबाकू के कहर से हर साल साठ लाख लोगों की जान जा रही है और लोग सतर्क नहीं हुए तो यह संख्या अस्सी लाख के पार जा सकती है। भारत में हर साल डेढ़ से दो लाख लोग कैंसर की चपेट में आते हैं। इन लोगों में सत्तर प्रतिशत तंबाकू का सेवन अलग-अलग तरीके से करने वाले लोग भी शामिल हैं।

दुनिया भर में तंबाकू सेवन का बढ़ता चलन स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस पर चिंता जाहिर की है। तंबाकू से संबंधित बीमारियों की वजह से हर साल करीब पचास लाख लोगों की मौत हो रही है। जिनमें लगभग पंद्रह लाख महिलाएं शामिल हैं। यों ज्यादातर पुरुष तंबाकू का सेवन करते हैं, लेकिन कुछ देशों की महिलाओं में तंबाकू सेवन की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। दुनिया भर के धूम्रपान करने वालों का करीब दस फीसद लोग भारत में हैं। भारत में करीब 25 करोड़ लोग गुटखा, बीड़ी, सिगरेट, हुक्का आदि के जरिए तंबाकू का सेवन करते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया के 125 देशों में तंबाकू का उत्पादन होता है। हर साल साढ़े पांच खरब सिगरेट का सालाना उत्पादन होता है और एक अरब से ज्यादा लोग इसका सेवन करते हैं। भारत में 72 करोड़ 50 लाख किलो तंबाकू की पैदावार होती है।

भारत तंबाकू निर्यात के मामले में ब्राजील, चीन, अमेरिका, मलावी और इटली के बाद छठे स्थान पर है। आंकड़ों के मुताबिक तंबाकू से 2022 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की आय हुई थी। विकासशील देशों में हर साल आठ हजार बच्चों की मौत अभिभावकों द्वारा किए जाने वाले धूम्रपान के कारण होती है। दुनिया के किसी अन्य देश के मुकाबले में भारत में तंबाकू से होने वाली बीमारियों से मरने वाले लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। तंबाकू पर आयोजित विश्व सम्मेलन और अन्य अनुमानों के मुताबिक भारत में तंबाकू सेवन करने वालों की तादाद करीब साढ़े 29 करोड़ तक हो सकती है।

देश के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि शहरी क्षेत्र में केवल 0.5 फीसद महिलाएं धूम्रपान करती हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह संख्या दो फीसद है। भारत में दस फीसद महिलाएं विभिन्न रूपों में तंबाकू का सेवन कर रही हैं। शहरी क्षेत्रों की 6 फीसद महिलाएं और ग्रामीण इलाकों की 12 फीसद महिलाएं तंबाकू का सेवन करती हैं।

अगर पुरुषों की बात की जाए तो भारत में हर तीसरा पुरुष तंबाकू का सेवन करता है। कई देशों में तंबाकू सेवन के मामले में लड़कियों की तादाद में काफी इजाफा हुआ है। महिलाओं और लड़कियों में तंबाकू के प्रति बढ़ रहे रुझान से गंभीर समस्या पैदा हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की गैरसंचारी रोग की सहायक महानिदेशक डॉक्टर आला अलवन का कहना है कि तंबाकू विज्ञापन महिलाओं और लड़कियों को ही ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं।

इन नए विज्ञापनों में खूबसूरती और तंबाकू को मिला कर दिखाया जाता है, ताकि महिलाओं को गुमराह कर उन्हें उत्पाद इस्तेमाल करने के लिए उकसाया जा सके। बुल्गारिया, चिली, कोलंबिया, चेक गणराज्य, मेक्सिको और न्यूजीलैंड सहित दुनिया के करीब 151 देशों में किए गए सर्वे के मुताबिक लड़कियों में तंबाकू सेवन की प्रवृत्ति लड़कों के मुकाबले ज्यादा बढ़ रही है।

एक तथ्य के अनुसार जब तंबाकू जलता है तो वह टार नामक एक विशिष्ट पदार्थ को पैदा करता है जो धुएं के साथ फेफड़ों में जाता है। टार के प्रत्येक कण में नाइट्रोजन, आक्सीजन, हाइड्रोजन कार्बन डाईआक्साइड, कार्बन मोनोआॅक्साइड और कई उड़नशील और अर्द्ध उड़नशील कार्बनिक रासायन होते हैं। संघनित होने पर टार एक चिपकने वाला भूरा पदार्थ बन जाता है। यह दांतों ही नहीं वरन फेफड़ों पर भी असर छोड़ता है। फेफडों द्वार अवशोषित टार वहां की कोशिकाओं की मृत्यु का कारण बनता है। यहीं से कैंसर की शुरूआत होती है। सिगरेट के जरिए एक व्यक्ति 48 ज्ञात कैंसरोत्पादकों का सेवन करता है।

‘नशा नहीं जिंदगी अपनाइए’, ये वाक्य हम काफी पहले से सुनते आ रहें है लेकिन फिर भी हम संजीदा नहीं है और देश में तंबाकू सहित तमाम नशे की चीजों का प्रचलन बढ़ता ही जा रहा है। कई राज्यों में गुटखे पर प्रतिबंध है लेकिन बाजार में सब कुछ मिलता है। खुलेआम जहर बिक रहा है लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।

तंबाकू विरोधी अभियानों पर दुनिया के देश जितना खर्च करते हैं, उससे पांच गुणा ज्यादा वे तंबाकू पर टैक्स लगाकर कमाते हैं। सिगरेट पीना पहले शौक होता है फिर आदत बन जाती है, आदत के बाद मजबूरी, फिर बीमारी।

कुल मिलाकर हमें समय रहते तंबाकू से होने वाले खतरे के लिए संजीदा होना होगा नहीं तो आने वाले समय में ये काफी भयावह रूप धारण कर सकता है। हम सबको तंबाकू से होने वाले खतरे के लिए सबसे पहले परिवार के स्तर पर बच्चों को बचपन से ही जागरूक करना होगा जिससे वह युवा अवस्था तक इससे सचेत रहे, दुसरी बात गुटखा और सिगरेट पर देशव्यापी रोक लगाने पर विचार कर सकते है।

अगर पूरी तरह से रोक लगा पाना संभव न हो तो इसके उत्पादन को घटाना होगा। तंबाकू के खिलाफ ठोस अभियान चलाने की जरूरत है तभी इस समस्या से निजात मिल सकती है।

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