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रविवारीः अंतरिक्ष की पुकार

आकाशवाणी का मिथ और रहस्य नया नहीं है। अगर कुछ नया है तो इसके साथ वैज्ञानिक मुठभेड़। यह मुठभेड़ अब एक वैज्ञानिक रोमांच में तब्दील हो चुका है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इस रहस्य को भेदने में लगे हैं कि क्षितिज पार से आ रहे संकेतों का मतलब क्या है?

इस साल फरवरी में कुछ ऐसा हुआ, जो वैज्ञानिकों के लिए विस्मय का कारण बन गए। वैज्ञानिकों ने पहली बार ऐसे रेडियो संकेत सुने, जो एक तय अवधि के अंदर बार-बार आ रहे हैं। वैज्ञानिकों ने इसे ‘फास्ट रेडियो ब्रस्ट’ (एफआरबी) यानी ‘तीव्र रेडियो प्रस्फोट’ नाम दिया है।

आकाशवाणी की पौराणिकता अब वैज्ञानिक तथ्य में तब्दील हो रही है। इसके साथ ही ग्रह-उपग्रह की दुनिया के कई और रहस्य हमारी दिलचस्पी में शामिल हो रहे हैं। खास तौर पर एलियंस को लेकर अब तक के वैज्ञानिक तथ्य अब हमें किसी और लोक से आ रही आवाज या रेडियो संकेत के सहारे जीवन और सृष्टि के कुछ और खगोलीय ठिकानों का पता लगाने के लिए उत्सुक कर रहे हैं। ऐसे ही कई रहस्यों से जुड़े नए तथ्यों के बारे में बता रहे हैं प्रमोद भार्गव।

आकाशवाणी का मिथ और रहस्य नया नहीं है। अगर कुछ नया है तो इसके साथ वैज्ञानिक मुठभेड़। यह मुठभेड़ अब एक वैज्ञानिक रोमांच में तब्दील हो चुका है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इस रहस्य को भेदने में लगे हैं कि क्षितिज पार से आ रहे संकेतों का मतलब क्या है? क्या यह कोई सामान्य पर दिलचस्प घटना भर है या कि ब्लैक होल या आकाशगंगा के संघर्ष से जुड़ा ऐसा नया वैज्ञानिक तथ्य, जो हमें पृथ्वी से दूर कहीं और जीवन या एलियन की रहस्यमय मौजूदगी के और करीब ले जाएगा। अंतरिक्ष से आने वाले रेडियो संकेतों की बात पहले भी सामने आई है। बीते तीन वर्षों में इसको लेकर चीन से लेकर अमेरिका तक सघन शोध भी चल रहे हैं। पर इस साल फरवरी में कुछ ऐसा हुआ, जो वैज्ञानिकों के लिए विस्मय का कारण बन गए। वैज्ञानिकों ने पहली बार ऐसे रेडियो संकेत सुने, जो एक तय अवधि के अंदर बार-बार आ रहे हैं। वैज्ञानिकों ने इसे ‘फास्ट रेडियो ब्रस्ट’ (एफआरबी) यानी ‘तीव्र रेडियो प्रस्फोट’ नाम दिया है। ब्रिटिश कोलंबिया और आस्ट्रेलिया नेशनल साइंस आर्गेनाइजेशन में इस बारे में गंभीर प्रयोग चल रहे हैं।

ये संकेत 16.35 दिन के अंतर पर लगातार मिल रहे हैं। 10 सेकंड तक मिलते रहने वाले इस संकेत के साथ दो बातें अनूठी हैं, एक तो अंतरिक्ष से आने वाला यह पहला ऐसा रेडियो संकेत है, जिसकी एक तय अवधि के बाद पुनरावृत्ति हो रही है। दूसरे, यह अंतरिक्ष के बाहरी भाग में स्थित किसी स्रोत से आ रहा है, जो धरती के बहुत करीब है। हालांकि 1972 में पहला रेडियो संकेत मिलने का दावा रसियन अखबार ‘प्रावदा’ ने किया था।

उसके बाद मिलने वाले पांच ऐसे संकेत हैं, जिन्हें बाकायदा रिकार्ड किया गया है। पहला, वाओ नामक संकेत 72 सेकंड तक मिला था। दूसरा, एसएचजीबी-040ए संकेत है। तीसरा, एचडी-164595 रेडियो संकेत सूर्य के पास स्थित किसी सितारे से आया था। चौथे, रेडियो संकेत को ‘कॉस्मिक रॉर’ अर्थात ‘अंतरिक्ष की दहाड़’ नाम दिया गया। पांचवां संकेत एफआरबी-180924, छठा एफआरबी-180916 और सातवां एफआरबी-190523 है। दो अन्य संकेत भी मिले हैं, जो एफआरबी की कड़ियों में ही गिने गए हैं। अंतरिक्ष की विलक्षणता यह है कि वहां हवा नहीं होती है। इसलिए आवाज एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं जाती है। लेकिन तरंगें आ-जा सकती हैं।

दो तरह के एफआरबी

एफआरबी की पहचान 2007 में खगोल विज्ञानी डंकन लोरीमर एवं डेविड नारकेविक ने पल्सरों के अध्ययन के दौरान की थी। इस वजह से इन्हें ‘लोरीमर प्रस्फोट’ भी कहा जाता है। अब तक वैज्ञानिकों ने दो तरह के एफआरबी का पता लगाया है। एक तो वे एफआरबी हैं, जिनसे एक ही बार रेडियो संकेत छोड़ा जाता है और दूसरे हैं, जो बार-बार अपने स्रोत से छोड़े जाते हैं।

वैज्ञानिक टेवनी ने चार फरवरी 2020 को बार-बार आने वाले रेडियो संकेत का नाम एफआरबी-180916 दिया है। इस संकेत के विश्वसनीय स्रोत का फिलहाल पता नहीं चला है। नतीजतन कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि कृष्ण विवर (ब्लैक होल) से यह संकेत आता है। ऐसा अनुमान है कि जिस स्रोत से यह संकेत निकलता है, वह अपने अक्ष पर 16.35 दिनों में एक बार घूमता होगा। इसलिए हर 16.35 दिन में यह संकेत मिल रहा है। कुछ वैज्ञानिक इसके एलियन से संबंध होने की भी आशंका जता रहे हैं।

उनका मानना है कि एलियन की ओर से ये संकेत पृथ्वी पर भेजे जा रहे हैं। वैज्ञानिकों का अंदाजा है कि एफआरबी धरती से 50 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर स्थित तारामंडल के बाहरी हिस्से से आता है। सितंबर 2018 से अक्तूबर 2019 के बीच वैज्ञानिकों ने रेडिया दूरबीन से एफआरबी की निगरानी करने पर पाया कि ये संकेत लगातार चार दिनों तक अनुभव किए जाते हैं और फिर 12 दिन तक गायब रहते हैं। इस तरह 16.35 दिनों की अवधि के बाद ये संकेत फिर लौट आते हैं। कुछ वैज्ञानिक इन्हें धूमकेतुओं से उत्सर्जित होना भी मान रहे हैं।

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