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जन्माष्टमी की थाली

जन्माष्टमी में व्रत भी रखना है और सेहत का भी ध्यान रखना है। दोनों में सामजस्य बैठाने के लिए कुछ ऐसा खाएं, जिससे पर्व-परंपरा भी निभ जाए और सेहत भी दुरुस्त रहे। यहां जानें क्या करें इस दिन

जनसत्ता दाना-पानी
जन्माष्टमी व्रत में खाने के लिए विशेष प्रकार की नमकीन और पंजीरी।

मानस मनोहर

जन्माष्टमी का त्योहार नजदीक है। इस दिन प्रसाद के रूप में कई व्यंजन बनाए जाते हैं। मगर इस अवसर पर एक प्रसाद लगभग सभी जगह बनता है, वह है- पंजीरी। फिर इस दिन बहुत सारे लोग व्रत भी रखते हैं। कई लोगों को समझ नहीं आता कि व्रत में खाने के लिए क्या बनाएं। दिनभर फल खाकर रह पाना उन्हें मुश्किल जान पड़ता है। इसलिए इस बार व्रत के लिए घर में आसानी से बन जाने वाले अल्पाहार और प्रसाद की चर्चा।

खास नमकीन
यों तो व्रत-उपवास का विधान इसलिए बनाया गया है कि इससे शरीर शुद्धि हो जाती है। अगर चौबीस घंटे के लिए कुछ भी न खाएं, तो शरीर में जमा बहुत सारे विषैले तत्त्व निकल जाते हैं। मगर कई लोगों को खाली पेट रहने की सलाह नहीं दी जाती। चिकित्सक उन्हें थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहने की सलाह देते हैं। फिर ऐसे भी बहुत सारे लोग होते हैं, जो बहुत मीठा नहीं खा सकते या उन्हें मीठे से परहेज रखने को कहा जाता है। ऐसे लोगों के लिए नमकीन बेहतर विकल्प है। हालांकि आजकल बाजार में व्रत रखने वालों को ध्यान में रख कर बहुत सारी नमकीन बनने लगी हैं, पर बाजार का क्यों खाएं, जब घर में ही आसानी से और शुद्ध रूप में नमकीन बनाई जा सकती है।

व्रत के लिए कई तरह से नमकीन बनाई जाती है। चूंकि व्रत में सफेद नमक नहीं खाया जाता, इसलिए काले नमक का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह कई लोग आलू के चिप्स बना कर खाते हैं। कुछ लोग केवल मूंगफली तल कर खाते हैं। मगर स्वास्थ्य को ध्यान में रख कर कुछ ऐसी नमकीन बनाई जाए, जो शरीर को ऊर्जा भी दे और भूख भी शांत करे। एक बात और, जिन लोगों को पाचन की समस्या रहती हो, उन्हें तली या भुनी हुई मूंगफली के बजाय भिगोई और उबली हुई मूंगफली खानी चाहिए। व्रत में इस तरह भी मूंगफली खा सकते हैं। मगर हम जो नमकीन बनाने जा रहे हैं, उसमें उबली हुई मूंगफली का उपयोग नहीं कर सकते। इसलिए चाहें, तो मूंगफली को छोड़ सकते हैं। अगर तली हुई मूंगफली से कोई दिक्कत नहीं होती, तभी इसका उपयोग करें।

इस नमकीन को बनाने के लिए एक कटोरी साबूदाना, दो कटोरी मखाने, आधा कटोरी बादाम, आधा कटोरी काजू, चौथाई कटोरी किशमिश और स्वाद के अनुसार काला नमक तथा दो चम्मच पिसी हुई चीनी की जरूरत पड़ेगी। अगर चाहें, तो आधा कटोरी मूंगफली भी ले सकते हैं। इन सारी चीजों को तलने के लिए एक कलछी देसी घी भी लगेगा।

सबसे पहले साबूदाने को पांच-सात मिनट के लिए पानी में भिगो कर रखें। फिर अच्छी तरह पानी निथार लें। अब एक कड़ाही में घी गरम करें। उसमें सबसे पहले एक-एक करके मेवों को तलें और निकाल कर एक परात में रख दें। फिर मूंगफली और साबूदाने को अलग-अलग तलें और परात में रखते जाएं। साबूदाने को तलते समय आंच को मध्यम रखें और ध्यान रखें कि वे अच्छी तरह फूल जाएं। सबसे अंत में मखाने तलें, क्योंकि मखाने बचा हुआ सारा घी सोख लेंगे।

सारी चीजों को परात में डालने के बाद ऊपर से जरूरत भर का काला नमक और दो चम्मच पिसी हुई चीनी डाल कर सारी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं, ताकि नमक और चीनी सारी चीजों में रम जाएं। जब नमकीन ठंडा हो जाए, तो इसे किसी बड़े बर्तन में भर कर रख लें। व्रत के समय तो इसे खा ही सकते हैं, बाकी दिनों में भी चाय के साथ या हल्की भूख में इसे खा सकते हैं। यह नमकीन स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत उत्तम है। यह शरीर को भरपूर ऊर्जा देगा।

धनिया पंजीरी
पंजीरी सबसे आसानी से बन जाने वाला और लोकप्रिय प्रसाद है। बहुत सारे इलाकों में यों तो पंजीरी आटे से बनाई जाती है, पर जन्माष्टमी के दिन धनिया की पंजीरी बनती है। कई जगहों पर आटे के हलवे के गोल-गोल लड्डू बना कर इसी पंजीरी में लपेट लिया जाता है और उसे प्रसाद रूप में वितरित किया जाता है। हलवा न भी बनाएं, तो पंजीरी अपने आप में संपूर्ण प्रसाद है।

धनिया स्वास्थ्य के लिए बहुत गुणकारी मसाला है। खासकर बरसात के इस मौसम में जब अक्सर पाचनतंत्र मंद पड़ जाता है, पेट साफ नहीं रहता, तब धनिए का पाउडर इन समस्याओं से निजात दिलाता है। इस दृष्टि से भी धनिया की पंजीरी उत्तम प्रसाद है। धनिया की पंजीरी बनाना बहुत आसान है। इसमें बहुत कम सामग्री की जरूरत पड़ती है। यों अगर बहुत कुछ न भी डालें और सिर्फ साबुत धनिया और चीनी को पीस कर मिश्रण बना लें तो पंजीरी तैयार हो जाती है। मगर इसे और बेहतर स्वाद देने को लिए काजू, बादाम, अखरोट आदि मेवों का उपयोग कर सकते हैं।

पंजीरी बनाने के लिए एक किलो साबुत धनिया ले रहे हैं, तो इतनी ही मात्रा में चीनी लें। इसमें डालने के लिए ढाई सौ ग्राम मेवे भी ले सकते हैं। इस मौसम में धनिया में कुछ नमी हो सकती है, इसलिए बड़ी कड़ाही में पांच मिनट के लिए सेंक लें। फिर ग्राइंडर में पाउडर बना लें। इसी तरह चीनी को भी पीस लें।

कड़ाही में एक से दो कलछी देसी घी गरम करें और उसमें एक-एक करके मेवों को अलग-अलग तल लें। फिर खरल में या फिर मिक्सर में मोटे टुकड़ों में तोड़ लें। अब एक परात में पिसा हुआ धनिया और चीनी डाल कर अच्छी तरह मिलाएं। मेवे तलने के बाद जो घी बचा था, उसे भी इसी मिश्रण में डालें और दोनों हथेलियों से रगड़ते हुए सारी सामग्री को अच्छी तरह मिलाएं। फिर मेवे के टुकड़े डालें और अच्छी तरह मिला लें। जन्माष्टमी का प्रसाद तैयार है।

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