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मौसम के रंग सेहत के संग

कुछ व्यंजन ऐसे होते हैं, जिन्हें घर में ही बना कर खाना बेहतर रहता है। बाजार के बढ़ते वर्चस्व के बीच भी कई चीजें ऐसी हैं, जिन्हें घर में ही ताजा बना कर खाना ठीक रहता है। कोई भी भोजन अगर घर में ही बना कर खाएं, तो सेहत और स्वाद दोनों की दृष्टि से अच्छा रहता है। ऐसे ही कुछ व्यंजन इस बार।

मानस मनोहर

सोया लबाबदार
आजकल बाजार में सोया चाप, सोया स्टिक का चलन खूब है। खासकर किशोर और युवा इसे खूब पसंद करते हैं। सोयाबीन उत्पाद खाना सेहत की दृष्टि से बहुत लाभकारी है। इसमें भरपूर प्रोटीन होता है। डायबीटिज यानी शर्करा वाले लोगों के लिए भी इसे खाना अच्छा माना जाता है। बहुत सारे लोगों को दूध से बनी चीजें मुफीद नहीं बैठतीं, उन्हें उनसे एलर्जी हो जाती है। इसलिए चिकित्सक उन्हें सोया उत्पाद खाने की सलाह देते हैं। इसलिए अब तो बाजार में सोया उत्पाद की अलग से दुकानें भी खुल गई हैं। सोयाबीन का दूध, दही, पनीर आदि चीजें मिलने लगी हैं। इसके अलावा सोया चाप और सोया स्टिक तो लोकप्रिय हैं ही।

बाजार का बना सोया चाप या सोया स्टिक खाने में तो अच्छा लगता है, मगर वहां इस्तेमाल होने वाले मसाले, तेल आदि पर बहुत भरोसा नहीं किया जा सकता। फिर दुकानों में जिस जगह भोजन पकाया जाता है, उसकी साफ-सफाई आदि को लेकर संशय रहता है। गर्मी के मौसम में वैसे ही बाहर की चीजें खाने से पेट में संक्रमण का खतरा बना रहता है। इस समय तो कोरोना और वायरल बुखार का खतरा भी बना हुआ है। इसलिए ये सब चीजें घर में ही बना कर खाएं, तो हर दृष्टि से बेहतर रहता है। सोया चाप घर में बनाना बहुत मुश्किल काम नहीं। इसे भी उसी तरह बना सकते हैं, जैसे रोजमर्रा की सब्जियां बनाते हैं। बस तरीका समझ लें, तो बार-बार बनाएंगे और बच्चे भी बाहर का खाने के बजाय घर में खाना पसंद करेंगे।

आजकल बाजार में ताजा सोया स्टिक आसानी से मिल जाती है। पैकेट में बंद सोया स्टिक भी आती है। जो भी उपलब्ध हो, आधा किलो सोया स्टिक ले लें। कई लोग स्टिक के साथ ही इसे पकाते हैं, मगर उसमें बेहतर स्वाद नहीं आता। सोया स्टिक बनाने के लिए सबसे पहले खींच कर स्टिक यानी उसमें लगी लकड़ी को बाहर निकाल दें। फिर उन्हें तीन-चार टुकड़ों में काट लें।

अगर अधिक ठंडा है, तो उसे सामान्य होने दें। फिर कड़ाही में पकौड़े तलने लायक भरपूर तेल गरम करें और उसमें कटे हुए सोया को डाल दें। तीन-चार मिनट तक तलें। जब उनका रंग हल्का सुनहरा हो जाए, तो बाहर निकाल लें। ज्यादा नहीं तलना है, नहीं तो सोया कड़े हो जाएंगे। इनके तलने की पहचान यह है कि सोया की परतें हल्की-सी खुल जाएंगी। इस तरह इसमें मसाले अच्छी तरह जज्ब होते हैं।

सोया के तले टुकड़ों को बाहर निकालें और एक कटोरे में रख दें। जब थोड़े ठंडे हो जाएं, तो इसमें थोड़ा नमक, आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, चुटकी भर हल्दी पाउडर, एक चम्मच धनिया पाउडर, आधा चम्मच गरम मसाला डालें और अच्छी तरह मिला लें। ऊपर से एक कटोरी दही डालें और अच्छी तरह मिलाएं, ताकि सारी सामग्री सोया के टुकड़ों में रच-बस जाए। अब इसे ढंक कर बीस मिनट के लिए अलग रख दें।

इस बीच तरी यानी ग्रेवी तैयार करें। तरी के लिए दो मध्यम आकार के टमाटर और दो प्याज, आठ-दस लहसुन की कलियां, थोड़ा-सा अदरक लेकर उन्हें मोटा-मोटा काटें और कड़ाही में एक चम्मच तेल में दालचीनी, सौंफ, जीरे के तड़के के साथ नरम होने तक पका लें। फिर ठंडा करके पीस लें। फिर उसी कड़ाही में एक चम्मच तेल गरम करें और उसमें पिसा हुआ प्याज-टमाटर डाल कर चलाते हुए पकाएं।

जब ग्रेवी सूखने लगे, तो उसमें आधा कटोरी पानी डालें और चलाते हुए उबाल आने दें। उबाल आने के बाद मैरीनेट किए हुए सोया डालें और चलाते हुए सारा मसाला मिला लें। अब कड़ाही पर ढक्कन लगा कर चार से पांच मिनट तक मध्यम आंच पर पकने दें। ढक्कन खोलें और उसमें ऊपर से जरूरत भर का नमक, आधा चम्मच गरम मसाला और चौथाई चम्मच कश्मीरी मिर्च पाउडर डाल कर मिलाएं और आंच बंद कर दें। कड़ाही पर ढक्कन लगा कर पांच मिनट के लिए छोड़ दें। सोया स्टिक तैयार है। इसे चाहें तो रोटी, परांठा, पूड़ी के साथ खाएं या फिर नाश्ते के तौर पर अकेले खाएं।

आम की चटनी
रमी के मौसम में आम की चटनी नियमित भोजन में शामिल कर लेना चाहिए। कच्चा आम गरमी से बचाता है, पाचन को दुरुस्त रखता और भोजन के स्वाद को तो बढ़ता ही है। इस चटनी की खूबी यह भी है कि इसमें पड़ने वाली हर सामग्री लू से बचाती और पाचन को दुरुस्त रखती है। यह चटनी बनाना बहुत आसान है। इसे घर में ही बनाया जा सकता है। आजकल हर चीज डिब्बाबंद मिलने लगी है, मगर आम की चटनी शायद नहीं मिलेगी। इसलिए इसे घर पर बनाएं और रोज बनाएं। कच्चे आम का मौसम थोड़े दिन के लिए ही होता है, फिर यह चटनी नहीं बना पाएंगे।

आम की चटनी बनाने के लिए दो से चार कच्चे आम और मुट्ठी भर पुदीने की पत्ती लें। आम का छिलका उतार कर टुकड़ों में काट लें। अगर उसमें गुठली बन गई है, तो उसे भी निकाल दें। इसे ग्राइंडर में डालें। ऊपर से पुदीने की पत्तियां, एक बड़ा चम्मच सौंफ, आधा चम्मच साबुत धनिया, तीन-चार हरी मिर्च, चार-पांच लहसुन की कलियां और जरूरत भर का नमक डालें और बिना पानी डाले दरदरा पीस लें। चटनी तैयार है। अब देखें कि इसमें पड़ी सौंफ और पुदीना भी पेट के लिए कितना गुणकारी है। इस गरमी में पेट की गरमी शांत करने और लू से बचाने के लिए यह चटनी एक प्रकार की औषधि है। इसे रोज खाएं और स्वस्थ रहें।

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