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कुछ हल्का कुछ मन का

इऩ दिनों मौसम बदल रहा है। ऐसे में सुपाच्य और पौष्टिक भोजन ही करना स्वास्थ्य के लिहाज से अच्छा होगा। हर हाल में पाचनतंत्र दुरुस्त रखकर ही हम अपने को फिट रख सकते हैं। ऐसे में कुछ हल्के और मन को भाने वाले भोजन के बारे में यहां जानें।

Jansatta Dana Paniसाबूदाना की खिचड़ी और दही चावल। (फोटो- जनसत्ता)

मानस मनोहर
मौसम बदल रहा है। आयुर्वेद में होली से लेकर रामनवमी तक भोजन को लेकर विशेष रूप से सावधान रहने की हिदायत दी गई है। यानी इस दौरान हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन करना चाहिए, ताकि पाचनतंत्र दुरुस्त रहे और कई रोगों से आपको दूर रखे। ऐसे में कुछ ऐसे व्यंजनों की बात करेंगे, जो इस मौसम में खाना स्वास्थ्य की दृष्टि से अधिक लाभदायक साबित होगा।

साबूदाने की खिचड़ी
बूदाना स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत गुणकारी खाद्य है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता, रक्ताल्पता से दूर रखता, गर्मी से राहत देता और पाचनतंत्र को दुरुस्त रखता है। साबूदाना व्रत में भी खाया जाता है। इसकी खीर बनती है, तो खिचड़ी भी। आलू के साथ मिला कर कटलेट और पकौड़े भी बनाए जाते हैं। साबूदाने की खिचड़ी आमतौर पर लोग मूंगफली के साथ मिला कर सूखी बनाते और खाते हैं, जिसमें उसका हर दाना अलग-अलग होता है। मगर सब्जियों के साथ इसकी पतली खिचड़ी बना कर खाएं, तो उसका स्वाद निराला होता है और सूखी खिचड़ी की अपेक्षा यह अधिक सुपाच्य और पौष्टिक होती है। सूखी खिचड़ी में लोग मूंगफली और अधिक से अधिक उबले आलू का इस्तेमाल करते हैं, पर पतली खिचड़ी में आप कई तरह की सब्जियों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

साबूदाने की पतली खिचड़ी बनाना बहुत आसान है। इसमें सूखी खिचड़ी बनाने के लिए हर दाने को खिला-खिला और अलग-अलग रखने के लिए जो सावधानी बरतनी पड़ती है, वह भी नहीं बरतनी पड़ती। इस खिचड़ी में आप अपनी मर्जी के मुताबिक हरी सब्जियां डाल सकते हैं। पालक, हरी मटर, फूल गोभी, ब्रोकली, बीन्स, गाजर, टमाटर, जो भी उपलब्ध हो और आपको पसंद हो, इसमें इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर हरी सब्जियां न हों, तो केवल आलू और टमाटर डाल कर भी बना सकते हैं। इसकी खूबी यह है कि आप चाहें तो इसे मसालेदार भी बना सकते हैं और बिना मसाले की भी।

एक कटोरी साबूदाना लें। यह चार लोगों के लिए पर्याप्त होगा। इसे धो लें। भिगो कर रखने की जरूरत नहीं। एक कड़ाही में एक-दो चम्मच घी गरम करें। उसमें जीरा, साबुत काली मिर्च और कढ़ी पत्ते का तड़का लगाएं। जो भी सब्जियां डालना चाहते हैं, उन्हें छौंक दें। चाहें तो इसमें कच्ची भिगोई मूंगफली के दाने भी अपनी इच्छानुसार डाल सकते हैं। दो-तीन मिनट चलाते हुए पकाएं। अब साबूदाना डालें और एक बार चला लें। फिर भरपूर पानी डालें, जिससे साबूदाना और सब्जियां अच्छी तरह ढंक जाएं। आप खिचड़ी को कितनी पतली रखना चाहते हैं, उसके अनुपात में पानी मिला सकते हैं।

पानी डालने के बाद जरूरत भर का नमक डालें और अच्छी तरह चलाने के बाद ढक्कन लगा दें। पानी में उबाल उठने लगे तो ढक्कन हटाएं और बड़े आकार में कटे दो टमाटर डालें और एक बार फिर से अच्छी तरह चलाएं। अगर खिचड़ी को चटपटा बनाना चाहते हैं, तो इसमें एक चम्मच सब्जी मसाला और आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर भी डाल सकते हैं। सारी चीजों को मिलाने के बाद कड़ाही पर ढक्कन लगा दें और आंच को मध्यम कर दें। करीब पंद्रह मिनट तक पकने दें। पंद्रह मिनट बाद ढक्कन हटा कर देखें। जब साबूदाने के दाने पक कर पारदर्शी हो जाएं और खिचड़ी मनचाहे ढंग से गाढ़ी हो जाए तो आंच बंद कर दें। अब ढक्कन हटा कर उसमें एक नीबू का रस निचोड़ें। हरा धनिया, अदरक लच्छा और हरी मिर्च से सजा कर गरमागरम परोसें।

दही चावल
ह दक्षिण भारत का लोकप्रिय खाद्य है। अब इसे कर्ड राइस के नाम से जाना-पहचाना जाता है। यों देखने में यह बहुत साधारण व्यंजन लगता है, मगर इसमें गुण भरे हुए हैं। कई प्रांतों में बचे हुए चावलों में हल्का पानी और नमक डाल कर रात भर के लिए ढंक कर रख दिया जाता है। फिर सुबह उसे अच्छी तरह मसल कर तड़का लगा कर खाते हैं। ओड़ीशा में इस चावल को फर्मंटेड होने तक रखा जाता है और फिर बिना तड़का लगाए भी खा लिया जाता है। वहां इसे पखाल बोलते हैं। माना जाता है कि यह गरीब-गुरबा का भोजन है, जो बासी बचे चावलों को इस तरह खाते हैं।

दक्षिण भारत में चावलों में दही मिला कर रख दिया जाता है और अगली सुबह उसमें तड़का लगा कर खा लिया जाता है। इस तरह चावल खाने के कई लाभ हैं। इससे विटामिन बी-12 भरपूर मात्रा में मिलती है। शरीर में इस विटामिन की कमी की वजह से आजकल शहरों में अनेक लोगों को विभिन्न परेशानियों से जूझते देखा जाता है। इसलिए जिन लोगों में इस विटामिन की कमी हो, उन्हें इस तरह दही-चावल बना कर जरूर खाना चाहिए। इसके अलावा यह पाचन संबंधी अनेक परेशानियों को दूर करता है। सुपाच्य और पौष्टिक तो होता ही है।

दही-चावल यानी कर्ड राइस बनाना बहुत आसान है। दिन के बचे चावलों में दही और नमक, लाल मिर्च पाउडर डाल कर फेंट लें। फिर इसे ढंक कर रात भर के लिए रख दें। आजकल गरमी का मौसम है, इसलिए हो सकता है यह कुछ अधिक खट्टा हो जाए, इसलिए चाहें तो इसे फ्रिज में भी रख सकते हैं। फिर अगली सुबह तड़का पैन में दो चम्मच घी गरम करें। उसमें एक चम्मच मूंग दाल, एक चम्मच चना दाल, आठ-दस मूगफली के दाने, आधा चम्मच राई, कुछ कढ़ी पत्ते, चुटकी भर हींग और दो-तीन साबुत लाल मिर्चें डाल कर तड़का लें। इस तड़के को दही-चावल में डालें और अच्छी तरह मिला लें। दही-चावल यानी कर्ड राइस खाने के लिए तैयार है। नाश्ते में, दोपहर के खाने या रात के भोजन के रूप में इसे पेट भर कर खाएं और इसके लाभ देखें। इसका स्वाद तो लाजवाब होता ही है। एक बार बनाएंगे, तो फिर इसमें अलग-अलग प्रयोग करके बार-बार बनाएंगे।

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