कुछ लजीज प्रयोग

नाश्ता आमतौर पर सुबह और शाम को खाया जाता है। हालांकि सुबह का कलेवा कुछ भारी होता है, तो शाम का हल्का। मगर शहरों में पश्चिमी ढंग के नाश्ते का चलन ही अधिक देखा जाता है। ब्रेड-बटर-आमलेट वगैरह। मगर ऐसे झटपट बनने वाले भारतीय नाश्तों की भी हजारों किस्में हैं। क्यों न उनमें से कुछ आजमाएं।

Jansatta Dana-Pani, Jansatta Dishes
कच्चा केला रसेदार (ऊपर) और अदरक का हलवा (नीचे।)

कच्चा केला रसेदार
हम बार-बार कहते रहते हैं कि भोजन पकाते समय धैर्य और कल्पनाशीलता की बहुत जरूरत होती है। कल्पनाशीलता है यानी आप भोजन को नए-नए तरीके से बनाने के बारे में सोचते रहते और प्रयोग करते हैं, तो एक ही चीज को नए-नए ढंग से बना सकते हैं, उसे नए-नए स्वाद दे सकते हैं। कच्चे केले को लेकर भी इसी तरह प्रयोग कर सकते हैं। कच्चे केले की रसेदार सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले चार कच्चे केलों के ऊपर हल्का-सा तेल लगा कर मध्यम आंच पर केलों के छिलके काले पड़ने तक पलट-पलट कर चारों तरफ से सेंक लें।

फिर दोनों सिरों को काटें और बीच में से दो-तीन चीरा लगाते हुए छिलका उतार लें। केलों को छोटे टुकड़ों में काट लें। फिर एक कड़ाही में दो-तीन चम्मच सरसों तेल गरम करें। उसमें केले के टुकड़ों को डाल कर तेज आंच पर चलाते हुए तल लें। दो से तीन मिनट में तल जाएंगे, इससे अधिक नहीं तलना है। फिर इन टुकड़ों को एक अलग कटोरे में निकालें और ऊपर से चौथाई चम्मच नमक, चौथाई चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा चम्मच धनिया पाउडर और चौथाई चम्मच गरम मसाला डाल कर अच्छी तरह मिलाएं, ताकि मसाले केले के टुकड़ों पर अच्छी तरह चिपक जाएं।

अब इसकी ग्रेवी यानी रसा बनाने की तैयारी कर लें। इसकी ग्रेवी आप अपने ढंग से बना सकते हैं। आमतौर पर इसके दो तरीके हैं। या तो टमाटर-प्याज, लहसुन, अदरक वगैरह के साथ बना सकते हैं या फिर दही और टमाटर के साथ। दोनों तरीकों की ग्रेवी में केले की सब्जी स्वादिष्ट बनती है। इसके अलावा आप कोई और तरीका भी अपना सकते हैं। केले का स्वाद चूंकि फीका होता है, इसलिए इसका रसा थोड़ा तीखा बनाना चाहिए। हम दही की ग्रेवी बनाने जा रहे हैं, क्योंकि बहुत सारे लोगों को लहसुन-प्याज पसंद नहीं होता।

इसके लिए डेढ़ से दो कटोरी दही को मथानी से अच्छी तरह फेंट लें, ताकि उसमें किसी प्रकार की गांठ न रहने पाए। फिर उसमें आधा चम्मच नमक, आधा चम्मच धनिया पाउडर, आधा चम्मच गरम मसाला, आधा चम्मच कुटी लाल मिर्च, चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर डाल कर अच्छी तरह मिला कर ढंक कर अलग रख दें। इस तरह दही को पकाते समय फटता नहीं है। फिर दो मध्यम आकार के टमाटर ग्राइंडर में पीस कर पेस्ट बना लें। कड़ाही में दो से तीन चम्मच सरसों तेल गरम करें। उसमें एक तेजपत्ता, एक छोटा टुकड़ा दालचीनी, दो लौंग, दो छोटी इलाइची, चौथाई चम्मच जीरा और चौथाई चम्मच अजवाइन का तड़का दें और उसमें पिसा हुआ टमाटर डाल कर तेल छोड़ने तक लगातार चलाते हुए भूनें।

जब टमाटर अच्छी तरह भुन जाए तो उसमें फेंटा हुआ दही डालें और आंच धीमी करके लगातार चलाते हुए पकाएं। जब दही में उबाल आने लगे, तो उसमें केले के टुकड़े डालें और ऊपर से आधा चम्मच देगी मिर्च डाल कर ढंक कर पांच से सात मिनट तक पकाएं। देगी मिर्च से ग्रेवी का रंग अच्छा आता है। पांच-सात मिनट बाद एक चम्मच कसूरी मेथी को हथेंलियों पर रगड़ कर डालें और मिला दें। आंच बंद कर दें। कच्चे केले की रसेदार सब्जी तैयार है।

अदरक का हलवा
दिवाली के बाद मौसम सर्द होना शुरू हो जाता है। ऐसे में सर्दी-जुकाम-खांसी की समस्या रहती है। गले में खराश बनी रहती है। इसमें अदरक बहुत गुणकारी होता है। अदरक का हलवा बनाना बहुत आसान है। इसे हमेशा आटे के साथ बनाएं, सूजी में बेहतर स्वाद नहीं आ पाता। इसकी मात्रा समझ लें। दो सौ ग्राम गेहूं का आटा, डेढ़ सौ ग्राम अदरक, दो सौ ग्राम चीनी और और मुट्ठी भर सूखे मेवे लें। इसके लिए करीब डेढ़ सौ ग्राम देसी घी की भी जरूरत पड़ेगी।

सबसे पहले अदरक का छिलका उतार कर उसे कद्दूकस करके अलग रख लें। फिर कड़ाही में चार-पांच चम्मच घी गरम करें। उसमें सूखे मेवे यानी बादाम, काजू, किशमिश वगैरह को हल्का तल कर बाहर निकाल लें। फिर उसी में आटा डाल कर धीमी आंच पर बादामी रंग का होने तक लगातार चलाते हुए भूनें। अगर जरूरत महसूस हो, तो घी और डाल लें। जब आटे से सोंधी खुशबू आने लगे और रंग बादामी हो जाए, तो आटे को अलग परात में निकाल लें। फिर हल्का ठंडा होने के बाद इसे छन्नी से छान लें, ताकि कोई गांठ न रहने पाए।

अब एक भगोने में एक गिलास पानी के साथ चीनी को उबाल आने तक पिघला लें और अलग रखें। तले हुए मेवे को दरदरा कूट लें। फिर जिस कड़ाही में आटा भूना था, उसे कपड़े से पोंछ कर बचा हुआ घी डालें, गरम हो जाए तो आधा चम्मच अजवाइन डालें और फिर कद्दूकस किया हुआ अदरक डाल कर दो से तीन मिनट तक चलाते हुए तलें।

ध्यान रखें कि अदरक को सूखने तक नहीं पकाना है, बस वह पक कर नरम हो जाना चाहिए। जब अदरक पक जाए तो उसमें भुना हुआ आटा डालें और अच्छी तरह चलाते हुए दो से तीन मिनट तक फिर से पकाएं। अब उसमें धीरे-धीरे चीनी का घोल डालें और फिर कुटे हुए मेवे डाल कर अच्छी तरह चलाते हुए आटे के चीनी को अच्छी तरह सोख लेने तक पलट-पलट कर पकाएं। अदरक का हलवा तैयार है। इसे बच्चे भी मन से खाएंगे। सर्दी में यह हलवा बनाएं जरूर।

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