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परंपरा एक स्वाद अनेक

इस बार कुछ ऐसे व्यंजन जो किसी न किसी रूप में बनते तो पूरे देश में हैं, मगर खासतौर पर गुजराती रंग-रूप में ढल कर विशिष्ट स्वाद देने लगते हैं।

jansatta dishesदाना-पानी: मेथी मुठिया और हांडवो।

मानस मनोहर
भारतीय व्यंजनों की एक खूबसूरती यह है कि सब जगह भोजन की परंपरा लगभग एक-सी है, मगर उन्हें बनाने का तरीका और उनमें उपयोग की जाने वाली चीजों की वजह से उनका स्वाद अलग हो जाता है। भोजन का यही आनंद है कि उसे अलग-अलग तरीके से बनाया जाए, तो उसे खाने से ऊब नहीं होती। इस बार कुछ ऐसे व्यंजन जो किसी न किसी रूप में बनते तो पूरे देश में हैं, मगर खासतौर पर गुजराती रंग-रूप में ढल कर विशिष्ट स्वाद देने लगते हैं।

मेथी मुठिया

यह गुजरात का अपना विशिष्ट व्यंजन है। यों इसे लौकी और दूसरी सब्जियों से भी बनाया जाता है, मगर मेथी मुठिया यहां का पारंपरिक व्यंजन है। यह आमतौर पर स्नैक्स यानी चाय आदि के साथ नाश्ते के रूप में खाया जाता है, पर कई बार इसे दाल, कढ़ी या सब्जी की तरी में डाल कर चावल, रोटी, परांठे वगैरह के साथ मुख्य भोजन के तौर पर भी परोसा जाता है। दरअसल, यह मेथी के पत्तों से बना पकौड़ा ही है। मेथी के पत्तों की सब्जी, परांठे आदि तो आपने खाए होंगे, पर इसके पकौड़े कम लोगों ने खाए होंगे। पर एक बार बना कर खाइए, इसका स्वाद लाजवाब होता है। सेहत की दृष्टि से तो इसमें भरपूर पोषक तत्त्व हैं।

गुजरात में दिवाली के अवसर पर यह अवश्य बनता है। वहां भी मेथी मुठिया बनाने के कई तरीके हैं। इसका पारंपरिक तरीका मेथी के हरे पत्ते डाल कर बनाने का है, पर जब हरे पत्ते नहीं होते, तब मेथी के दाने पीस कर भी यह मुठिया बनाई जाती है। बहुत सारे लोग इसमें पांच प्रकार का आटा उपयोग करते हैं- गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का, चना। पर चूंकि हर समय ये पांचों प्रकार के आटे उपलब्ध नहीं होते, इसलिए गेहूं के आटे और बेसन के इस्तेमाल से ही बहुत सारे लोग मुठिया बनाते हैं।

मेथी मुठिया बनाना बहुत आसान है। पहले मेथी के हरे पत्तों को डंठल से अलग करके अच्छी तरह धो लें। पूरा पानी निथर जाए तो बारीक काट लें। अगर दो कटोरी कटे मेथी के पत्ते ले रहे हैं, तो आधा कटोरी गेहूं का आटा और आधा कटोरी बेसन लें। इन दोनों को मेथी के पत्तों के साथ डाल दें। ऊपर से जरूरत भर का नमक, चौथाई छोटा चम्मच धनिया पाउडर, आधा छोटा चम्मच गरम मसाला, चुटकी भर हींग, चौथाई छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और खाने के चम्मच बराबर दो चम्मच तेल डालें। अगर पिसी हुई सूखी मेथी है, तो वह भी एक चम्मच डाल दें, स्वाद अच्छा आएगा।

हां, गुजराती व्यंजन में गुड़ या चीनी का इस्तेमाल अवश्य होता है। अगर आपको मधुमेह न हो, तो एक चम्मच चीनी भी अवश्य डालें। सारी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं और पानी का छींटा देते हुए कड़ा आटा गूंथ लें। इसे ढंक कर पंद्रह-बीस मिनट के लिए आराम करने रख दें। कड़ाही में तेल गरम करें। तेल गरम हो जाए तो आंच को मध्यम कर दें।

अब गुंथे हुए आटे में से छोटे-छोटे टुकड़े लेकर बेलनाकार मुठिया बनाएं और तेल में डालते जाएं। पलट कर सुनहरा होने तक तलें। मुठिया तैयार है। इसे चटनी या सॉस के साथ नाश्ते के रूप में पकौड़े की तरह खाना चाहें, तो वैसे खाएं। अगर इसे कढ़ी या तरी में डाल कर खाना चाहें, तो वैसे भी खा सकते हैं।

हांडवो
हांडवो दरअसल, एक प्रकार का नमकीन केक ही है। जैसे दक्षिण भारत में उत्पम बनता है या मूंगलेट बनाया जाता है, यह भी बिल्कुल उसी तरह का व्यंजन है। इसे सब्जी वाला ढोकला भी कह सकते हैं। इसे बनाने में थोड़ी अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

दरअसल, इसे बनाने में ज्यादा वक्त नहीं लगता, इसकी तैयारी में समय अधिक लगता है। यानी हांडवो बनाना है, तो कम से कम एक दिन पहले तैयारी करनी पड़ती है। हांडवो चावल और भीगी हुई दालों को दही के साथ पीस कर तैयार घोल से बनाया जाता है। इसलिए इस घोल को पीसने और फिर खमीर उठाने में कम से कम चौबीस घंटे का समय लग जाता है।

सुबह दो कटोरी चावल, एक कटोरी चना दाल, आधा कटोरी अरहर दाल और चार चम्मच धुली उड़द दाल को एक साथ अच्छी तरह धोकर भिगो दें। दोपहर बाद पानी निथार लें और आधा कटोरी दही डाल कर ग्राइंडर में अच्छी तरह पीस लें। इस पिसी हुई सामग्री को ढंक कर रात भर के लिए रख दें। अगली सुबह तक इसमें खमीर उठ जाएगा। अभी मौसम थोड़ा ठंडा है, इसलिए मिश्रण के बर्तन को कपड़े से लपेट कर रखें, तो खमीर अच्छी तरह उठेगा।

इस मिश्रण में आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, जरूरत भर का नमक, आधा चम्मच धनिया पाउडर और चौथाई चम्मच गरम मसाला डालें। गुजराती व्यंजन है तो, चीनी जरूर एक-डेढ़ चम्मच डालें। सारी चीजों को अच्छी तरह फेंट कर मिला लें। अब हरी मटर, गाजर, पत्ता गोभी, बीन्स, शिमला मिर्च को बारीक-बारीक काटें। कुछ हरा धनिया और हरी मिर्च भी काट लें। इन सारी चीजों को मिश्रण में डाल कर अच्छी तरह मिला लें।

अब एक पैन गरम करें। उसमें एक चम्मच घी या तेल डालें और चौथाई चम्मच राई, चौथाई चम्मच सफेद तिल, थोड़ा-सा जीरा और चुटकी भर हींग तड़काएं। फिर मिश्रण डाल कर उसकी मोटी परत बिछा दें। पैन को ऊपर से ढंक दें। आंच मध्यम कर दें। पांच-सात मिनट ढक्कन उठा कर देखें, अगर किनारे पैन को छोड़ने लगे हैं, तो सावधानी से पलट कर दूसरी तरफ से भी सेंकने के लिए रख दें। जब दोनों तरफ से बादामी रंग आ जाए तो हांडवो को प्लेट में निकालें और मनचाहे टुकड़ों में काट कर हरी या लाल चटनी के साथ गरमा-गरम परोसें। स्वादिष्ट, सेहतमंद नाश्ता तैयार है।

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