ताज़ा खबर
 

दाना-पानी: जायका भी मन का भी

पाकशास्त्र कहता है कि जो कुछ खाएं, मौसम के मिजाज को ध्यान में रखते हुए खाएं, तो वह स्वाद और सेहत दोनों की दृष्टि से बेहतर होता है। यानी जो सब्जी और फल जिस मौसम में उगते हैं, उन्हें उस मौसम में भरपूर खाएं।

Ravivari Special Cuisineछुट्टी के दिन लें स्वादिष्ट मटर इडली ढोकला और राम लड्डू का आनंद।

मानस मनोहर
पाकशास्त्र कहता है कि जो कुछ खाएं, मौसम के मिजाज को ध्यान में रखते हुए खाएं, तो वह स्वाद और सेहत दोनों की दृष्टि से बेहतर होता है। यानी जो सब्जी और फल जिस मौसम में उगते हैं, उन्हें उस मौसम में भरपूर खाएं। बस आप इनसे बनने वाले पारंपरिक व्यंजनों को पकाने में प्रयोग करते रहें और लुत्फ लेते रहें। पेश हैं ऐसे ही कुछ प्रयोग संबंधी हमारे सुझाव।

मटर इडली/ढोकला
इडली और ढोकला बेशक दो अलग-अलग इलाकों के अलग-अलग व्यंजन हैं, मगर दोनों में काफी समानताएं भी हैं। दोनों के बनाने का तरीका एक ही है- भाप में पकाए जाते हैं। ढोकला हल्का मीठा होता है, पर इडली में मीठा नहीं डाला जाता। ढोकला आमतौर पर बेसन से बनाया जाता है, मगर बहुत सारे लोग सूजी यानी रवा से बना ढोकला भी पसंद करते हैं।

इसी तरह इडली बनाने का पारंपरिक तरीका चावल और उड़द की दाल को पीस कर खमीर उठा कर पकाने का है। मगर सूजी से भी इडली बहुत मुलायम और स्वादिष्ट बनती है। इसकी सामग्री तैयार करने के लिए बराबर-बराबर मात्रा में हरी मटर के दाने, सूजी और दही लें। पहले मटर के दानों के साथ दो-तीन हरी मिर्चें और थोड़े-से बारीक कटे अदरक को मिक्सर में डाल कर दरदरा पीस लें।

उसी में सूजी और दही डाल कर अच्छी तरह मिलाएं। अब इसको और स्वादिष्ट बनाने के लिए एक तड़का पैन में एक चम्मच तेल गरम करें, उसमें एक चम्मच राई या सरसों, दो चम्मच मूंग दाल या उड़द दाल और पांच-सात कढ़ी पत्ते डाल कर तड़का लें। ध्यान रखें कि दाल जैसे ही बादामी रंग की हो जाए, आंच बंद कर दें। इसे भी मटर-सूजी-दही के साथ मिला दें। सारी चीजों को अच्छी तरह मिलाने के बाद करीब बीस मिनट तक ढंक कर आराम करने के लिए रख दें।

अब अगर इस सामग्री से ढोकला बनाना चाहते हैं, तो इस मिश्रण में दो से तीन चम्मच चीनी मिला दें। अगर इडली बनाना चाहते हैं, तो चीनी न मिलाएं। अब इडली के कुकर या सामान्य कुकर में दो गिलास पानी डालें और गरम करने रख दें। अगर सामान्य कुकर में बना रहे हैं, तो सीटी न लगाएं। फिर सूजी-मटर के घोल को देख लें। सूजी को फूलने में वक्त लगता है और वह पानी सोख लेती है।

इस तरह अगर घोल ज्यादा गाढ़ा हो गया है, तो थोड़ा पानी और डालें और घोल को थोड़ा नरम कर लें। ध्यान रखें कि घोल ज्यादा पतला न होने पाए। अब इसमें एक छोटी पुड़िया या एक खाने के चम्मच बराबर ईनो पाउडर या चौथाई चम्मच बेकिंग सोडा डालें और उस पर एक चम्मच पानी डाल कर घोल को हल्के हाथों से एक तरफ को चला कर मिला लें।

अब इडली बनानी है, तो इडली के सांचे में हल्का तेल लगा कर इस घोल को भर दें। अगर ढोकला बनाना है, तो एक छोटी थाली या ट्रे का इस्तेमाल करें। कुकर के पेंदे में जाली या कटोरी रख कर पानी की सतह से ऊंचाई बनाएं और उस पर पकने के लिए रख दें। आंच मध्यम रखें। इसे पकने में पंद्रह से अठारह मिनट लगेंगे।

अगर ढोकला बनाया है, तो उस पर राई और साबुत हरी मिर्च के तड़के में दो चम्मच चीनी और आधा गिलास पानी डाल कर तड़का तैयार करें और ढोकले के ठंडा होने के बाद उस पर डाल दें। अगर इडली बनाई है, तो उसे नारियल की चटनी के साथ परोसें।

रामलड्डू
रामलड्डू बनाना बहुत आसान है। अगर आप इसके दीवाने हैं या नहीं भी हैं, तो इसे एक बार घर पर बना कर जरूर खाइए, फिर बार-बार बनाएंगे। रामलड्डू बनाने के लिए धुली मूंग दाल की जरूरत पड़ती है। दाल को चार-पांच घंटे के लिए भिगो कर रख दें। फिर इसका पानी निथार कर मिक्सर में अच्छी तरह पीस लें। घोल पतला न रखें, नहीं तो रामलड्डू बनाने में दिक्कत आएगी। दो-तीन बार ढक्कन खोल कर उलट-पलट कर पीसने से दाल अच्छी तरह पिस जाती है। इस दाल को ढक कर पंद्रह-बीस मिनट के लिए आराम करने रख दें। इस बीच में बाकी की सामग्री तैयार कर लें।

रामलड्डू के साथ मूली के लच्छे और उसके पत्तों की चटनी दी जाती है। इसके लिए ताजा मूली लें। उसमें से नरम पत्ते छांट कर अलग कर लें। मूली का छिलका उतारें और मोटे कद्दूकस पर कस कर अलग रख दें। पत्तों की चटनी बनाने के लिए अच्छी तरह धो लें। इसमें डालने के लिए दो-तीन हरी मिर्च और छोटा टुकड़ा अदरक का बारीक-बारीक काट लें।

मूली के पत्तों के साथ चाहें, तो थोड़े पुदीने के पत्ते भी डाल सकते हैं। इन सारी चीजों को मिक्सर में डालें। इसमें जरूरत भर का नमक, मुट्ठी भर बेसन भुजिया और दो-तीन टुकड़े बर्फ के डाल कर चटनी पीस लें। बर्फ के टुकड़े डालने से चटनी देर तक हरी बनी रहती है। बेसन भुजिया से उसमें गाढ़ापन आता है।

अब मूंगदाल के घोल में एक से डेढ़ चम्मच चटनी डालें और घोल को चम्मच या हाथ से एक तरफ चलाते हुए पंद्रह से बीस मिनट तक फेंटें। जब घोल का रंग सफेद-सा हो जाए तो फेंटना बंद कर दें। जितना फेंटेंगे, लड्डू उतने ही मुलायम और फूले-फूले बनेंगे। अब कड़ाही में तेल गरम करें।

आंच को मध्यम रखें। एक चम्मच से थोड़ा-थोड़ा घोल डालते हुए रामलड्डू तल लें। जैसे पकौड़े तलते हैं, उसी तरह इन्हें भी उलटते-पलटते हुए तलें। सुनहरा रंग आने के बाद बाहर निकाल लें। रामलड्डू पर मूली के लच्छे और चटनी डाल कर परोसें। सर्दी में इससे बढ़िया शाम का नाश्ता भला क्या हो सकता है।

नोट: अगर लड्डू नरम और मुलायम नहीं बन रहे, तो घोल में आधा चम्मच ईनो पाउडर या चौथाई चम्मच बेकिंग सोडा मिला लें, लड्डू अच्छे बनेंगे।